सिंहस्थ कुंभ मेले के खर्च पर सियासी घमासान, रोहित पवार के आरोपों पर मंत्री आशीष जायसवाल का पलटवार
22,425 करोड़ रुपये की विकास योजना को मंजूरी
नागपुर। महाराष्ट्र में आगामी नासिक-त्र्यंबकेश्वर सिंहस्थ कुंभ मेले की तैयारियों और उस पर होने वाले खर्च को लेकर राजनीतिक विवाद तेज हो गया है। राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी (शरदचंद्र पवार) के विधायक रोहित पवार द्वारा कुंभ मेले के खर्च का हिसाब सार्वजनिक नहीं करने के आरोप लगाए जाने के बाद राज्य सरकार के मंत्री आशीष जायसवाल ने पलटवार किया है। उन्होंने विपक्ष पर हिंदुत्व से जुड़े आयोजनों का विरोध करने का आरोप लगाया और कहा कि कुंभ मेला केवल सरकारी धन खर्च करने का आयोजन नहीं है, बल्कि इससे पूरे क्षेत्र के विकास और आर्थिक गतिविधियों को बढ़ावा मिलता है।
नागपुर में मीडिया से बातचीत के दौरान महाराष्ट्र सरकार में मंत्री आशीष जायसवाल ने कहा कि जब भी हिंदुत्व से जुड़ा कोई त्योहार या धार्मिक आयोजन होता है, तब विपक्ष को परेशानी होने लगती है। उन्होंने आरोप लगाया कि विपक्ष लगातार ऐसे आयोजनों का विरोध करता है, जिसका असर महाराष्ट्र में उसकी राजनीतिक स्थिति पर भी पड़ रहा है। हालांकि, उन्होंने विपक्षी नेताओं को सद्बुद्धि देने की प्रार्थना करने की बात भी कही।
कुंभ मेले को बताया विकास का बड़ा अवसर
आशीष जायसवाल ने अपने बयान में उत्तर प्रदेश में आयोजित कुंभ मेले की व्यवस्थाओं का उदाहरण दिया। उन्होंने कहा कि कुंभ जैसे बड़े धार्मिक आयोजन के लिए केवल श्रद्धालुओं की व्यवस्था करना पर्याप्त नहीं होता, बल्कि इसके लिए व्यापक स्तर पर बुनियादी ढांचे का विकास करना पड़ता है। इसमें सड़कों का चौड़ीकरण, यातायात प्रबंधन, आधारभूत सुविधाओं का विस्तार और जलापूर्ति जैसी व्यवस्थाएं शामिल हैं।
मंत्री ने कहा कि जब देशभर से बड़ी संख्या में श्रद्धालु किसी धार्मिक आयोजन में पहुंचते हैं, तो इसका लाभ केवल धार्मिक क्षेत्र तक सीमित नहीं रहता। होटल, परिवहन, व्यापार, छोटे दुकानदारों, स्थानीय बाजारों और पर्यटन से जुड़े कारोबार को भी फायदा मिलता है। इससे विभिन्न क्षेत्रों में आर्थिक गतिविधियां बढ़ती हैं और स्थानीय लोगों के लिए रोजगार तथा कमाई के अवसर पैदा होते हैं।
उन्होंने कहा कि सिंहस्थ कुंभ मेले पर होने वाले खर्च को केवल सरकारी बजट के रूप में नहीं देखा जाना चाहिए। इस आयोजन के लिए तैयार होने वाला बुनियादी ढांचा लंबे समय तक लोगों के काम आता है। इसलिए कुंभ मेले को पूरे क्षेत्र के विकास से जोड़कर देखने की जरूरत है।
रोहित पवार ने उठाए थे खर्च पर सवाल
दरअसल, एनसीपी (शरदचंद्र पवार) के विधायक रोहित पवार ने नासिक सिंहस्थ कुंभ मेले की तैयारियों पर होने वाले खर्च को लेकर महाराष्ट्र सरकार से जवाब मांगा है। उन्होंने आरोप लगाया कि कुंभ मेले के नाम पर लगभग 35 हजार करोड़ रुपये खर्च करने की योजना है, लेकिन सरकार इस राशि के इस्तेमाल का पूरा विवरण सार्वजनिक नहीं कर रही है।
रोहित पवार ने यह भी दावा किया कि उन्होंने अलग-अलग सरकारी विभागों से जानकारी हासिल करने के लिए पत्राचार किया और सूचना का अधिकार (RTI) के तहत आवेदन भी दाखिल किए। इसके बावजूद उन्हें मांगी गई जानकारी उपलब्ध नहीं कराई गई। उन्होंने कुंभ मेले से जुड़े कुछ निर्माण कार्यों की गुणवत्ता, टेंडर प्रक्रिया और कथित वित्तीय अनियमितताओं पर भी सवाल उठाए हैं।
रोहित पवार ने इस मामले में कानूनी लड़ाई लड़ने का संकेत देते हुए समाचार पत्रों में सार्वजनिक नोटिस भी प्रकाशित कराया है। उनका कहना है कि सरकारी धन जनता का पैसा है और इसके इस्तेमाल का पूरा हिसाब नागरिकों के सामने होना चाहिए। उन्होंने आरोप लगाया कि कुंभ मेले के नाम पर होने वाले खर्च में पारदर्शिता की कमी है।
22,425 करोड़ रुपये की विकास योजना को मंजूरी
कुंभ मेले के खर्च को लेकर सामने आए विवाद के बीच सरकारी आंकड़ों के अनुसार महाराष्ट्र सरकार ने नासिक-त्र्यंबकेश्वर सिंहस्थ कुंभ मेले के लिए 22,425.39 करोड़ रुपये की व्यापक विकास योजना को मंजूरी दी है। यह योजना 13 मार्च 2026 को मुख्यमंत्री की अध्यक्षता में हुई शीर्ष समिति की बैठक में स्वीकृत की गई थी।
इस योजना के तहत विभिन्न विभागों के माध्यम से बुनियादी ढांचे और आयोजन से जुड़ी सुविधाओं का विकास किया जाना है। इसके लिए राज्य सरकार ने कुंभ मेला प्राधिकरण और विभिन्न समितियों का गठन भी किया है, ताकि योजनाओं के क्रियान्वयन, विभागों के बीच समन्वय और धन के प्रबंधन को व्यवस्थित किया जा सके।
फिलहाल सिंहस्थ कुंभ मेले के खर्च को लेकर सरकार और विपक्ष के बीच आरोप-प्रत्यारोप का दौर जारी है। एक तरफ सरकार आयोजन को धार्मिक आस्था के साथ क्षेत्रीय विकास और आर्थिक गतिविधियों का माध्यम बता रही है, वहीं विपक्ष सार्वजनिक धन के इस्तेमाल में पारदर्शिता और जवाबदेही की मांग कर रहा है। ऐसे में कुंभ मेले की तैयारियों के साथ-साथ खर्च का विस्तृत ब्योरा सार्वजनिक करना भी राजनीतिक बहस का अहम मुद्दा बन गया है।