New Delhi. नई दिल्ली। नरेंद्र मोदी ने मौजूदा अंतरराष्ट्रीय हालात को देखते हुए कैबिनेट कमेटी ऑन सिक्योरिटी (CCS) की अहम बैठक बुलाई है। सरकारी सूत्रों के अनुसार, प्रधानमंत्री तमिलनाडु दौरे से लौटने के बाद रात करीब 9:30 बजे राष्ट्रीय राजधानी पहुंचेंगे और उसके तुरंत बाद उच्चस्तरीय बैठक की अध्यक्षता करेंगे। माना जा रहा है कि बैठक में मिडिल ईस्ट में तेजी से बिगड़ते हालात और भारत पर उसके संभावित प्रभावों की व्यापक समीक्षा की जाएगी।
दरअसल, इजरायल, अमेरिका और ईरान के बीच जारी संघर्ष ने पूरे मिडिल ईस्ट को युद्ध के मुहाने पर ला खड़ा किया है। अमेरिका और इजरायल की ओर से ईरान पर लगातार दूसरे दिन हवाई हमले किए गए हैं। जवाबी कार्रवाई में ईरान ने इजरायल के साथ-साथ मिडिल ईस्ट के नौ देशों में मौजूद अमेरिकी सैन्य ठिकानों को निशाना बनाते हुए एयर स्ट्राइक और मिसाइल हमले किए हैं। क्षेत्र में मिसाइल और ड्रोन हमलों के चलते हालात बेहद तनावपूर्ण बने हुए हैं।
इस बीच आज सुबह ईरान के सुप्रीम लीडर अली खामेनेई की मौत की पुष्टि होने की खबर ने हालात को और अधिक विस्फोटक बना दिया है। खामेनेई की मौत के बाद कई देशों में विरोध प्रदर्शन शुरू हो गए हैं। कराची में हजारों शिया मुसलमान सड़कों पर उतर आए और अमेरिका-इजरायल के खिलाफ नारेबाजी की। प्रदर्शनकारियों ने अमेरिकी दूतावास की ओर कूच किया और अंदर घुसने की कोशिश की। स्थिति को नियंत्रित करने के लिए सुरक्षा बलों ने फायरिंग की, जिसमें 12 से अधिक लोगों की मौत की खबर है, जबकि कई युवक घायल बताए जा रहे हैं।
पाकिस्तान के ही स्कर्दू में प्रदर्शनकारियों ने संयुक्त राष्ट्र के कार्यालय में आगजनी कर दी। इससे क्षेत्र में तनाव और बढ़ गया है। उधर, ईरान की ओर से मिडिल ईस्ट के कई हिस्सों में हमले जारी हैं। आज सुबह से कतर, दुबई और अबू धाबी में मिसाइल और ड्रोन हमलों की खबरें सामने आई हैं। कतर में मौजूद भारतीय नागरिकों ने सोशल मीडिया पर हमलों के वीडियो साझा किए हैं, जिनमें आसमान में धमाकों और एयर डिफेंस सिस्टम की गतिविधियां देखी जा सकती हैं।
मिडिल ईस्ट में बिगड़ते हालात का असर भारत पर भी साफ दिखाई देने लगा है। सुरक्षा और कूटनीतिक दृष्टि से यह क्षेत्र भारत के लिए बेहद महत्वपूर्ण है, क्योंकि यहां लाखों भारतीय काम करते हैं और भारत की ऊर्जा जरूरतों का बड़ा हिस्सा इसी क्षेत्र से पूरा होता है। ऐसे में CCS की बैठक में भारतीय नागरिकों की सुरक्षा, संभावित निकासी योजना, तेल आपूर्ति, हवाई सेवाओं और समुद्री मार्गों की सुरक्षा जैसे मुद्दों पर चर्चा होने की संभावना है।
स्थिति की गंभीरता को देखते हुए Central Board of Secondary Education (CBSE) ने मिडिल ईस्ट के कई देशों में 2 मार्च से होने वाली कक्षा 10वीं और 12वीं की बोर्ड परीक्षाएं स्थगित कर दी हैं। जिन देशों में परीक्षाएं टाली गई हैं, उनमें बहरीन, ईरान, कुवैत, ओमान, कतर, सऊदी अरब और यूएई शामिल हैं। बोर्ड ने कहा है कि नई परीक्षा तिथियों की घोषणा जल्द की जाएगी।
हवाई सेवाओं पर भी संकट गहराता दिख रहा है। आज भारत में 350 से अधिक उड़ानें रद्द रहीं। एयरलाइंस कंपनियों ने मिडिल ईस्ट के एयरस्पेस से बचने या उड़ानें अस्थायी रूप से स्थगित करने का फैसला लिया है। इससे यात्रियों को भारी असुविधा का सामना करना पड़ रहा है और अंतरराष्ट्रीय उड़ानों के किराए में भी बढ़ोतरी की आशंका जताई जा रही है।
ऐसे संवेदनशील समय में प्रधानमंत्री की अध्यक्षता में होने वाली CCS बैठक को बेहद अहम माना जा रहा है। सूत्रों के मुताबिक, बैठक में रक्षा, गृह, विदेश और वित्त मंत्रालय के शीर्ष अधिकारी मौजूद रहेंगे। भारत सरकार हालात पर करीबी नजर बनाए हुए है और जरूरत पड़ने पर त्वरित निर्णय लेने की तैयारी में है। मिडिल ईस्ट में जारी संघर्ष का वैश्विक प्रभाव पड़ने की आशंका के बीच आज की बैठक भारत की रणनीतिक प्रतिक्रिया तय करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकती है।