वेलिंग्टन/नई दिल्ली: भारत के साथ एफटीए को न्यूजीलैंड की संसद से मंजूरी मिलने पर प्रधानमंत्री क्रिस्टोफर लक्सन ने खुशी जताते हुए कहा कि इससे बड़ी संख्या नौकरियां पैदा होंगी।
साथ ही, इस समझौते से दोनों देशों के बीच द्विपक्षीय व्यापार को बढ़ावा मिलेगा। सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म 'एक्स' पर न्यूजीलैंड के पीएम क्रिस्टोफर लक्सन ने पोस्ट किया कि लोगों ने मुझसे कहा था कि भारत के साथ फ्री ट्रेड एग्रीमेंट (एफटीए) मुमकिन नहीं है, लेकिन आज उस समझौते को संसद से मंजूरी मिल गई है।
उन्होंने आगे कहा कि नेशनल पार्टी ने कहा था कि हम अपने पहले कार्यकाल में भारत के साथ फ्री ट्रेड एग्रीमेंट करेंगे, और हमने वह करके दिखाया है। इस अहम समझौते का मतलब है कि न्यूजीलैंड के लोगों के लिए ज्यादा नौकरियां और ज्यादा आमदनी होगी। साथ 1.4 अरब भारतीय ग्राहकों तक पहुंचने का रास्ता खुलने से भारत में न्यूजीलैंड के और ज्यादा उत्पाद बिकेंगे। साथ ही, यह अर्थव्यवस्था को आगे बढ़ाने और आपको तरक्की में मदद करने का एक तरीका है।
न्यूजीलैंड की संसद ने बुधवार को भारत के साथ हुए फ्री ट्रेड एग्रीमेंट (एफटीए) को 93-29 (पक्ष-विपक्ष) की मत से मंजूरी दे दी है। इससे पहले न्यूजीलैंड के व्यापार और निवेश मंत्री टॉड मैक्ले ने कहा कि जब यह समझौता लागू होगा, तो भारत को होने वाले न्यूजीलैंड के 57 प्रतिशत निर्यात पर कोई शुल्क नहीं लगेगा।
पूरी तरह लागू होने पर, 95 प्रतिशत निर्यात पर शुल्क हटा दिए जाएंगे या काफी कम कर दिए जाएंगे। उन्होंने कहा कि इस समझौते से बॉर्डर पर तेजी से क्लीयरेंस मिलेगी और भारत के बढ़ते मध्यम वर्ग तक बेहतर पहुंच मिलेगी, जो भोजन, टेक्नोलॉजी, शिक्षा, पर्यटन, प्रोफेशनल सेवाओं और अन्य उत्पादों की मांग बढ़ा रहा है।
मैक्ले ने कहा कि न्यूजीलैंड-भारत के बीच बातचीत की घोषणा मार्च 2025 में की गई थी और सरकार को उम्मीद है कि यह समझौता इस साल के आखिर तक लागू हो जाएगा। उन्होंने कहा कि एफटीए से न्यूजीलैंड के निर्यातकों को अपने बिजनेस संबंध बढ़ाने में मदद मिलेगी और इससे भारतीय प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और न्यूजीलैंड के प्रधानमंत्री क्रिस्टोफर लक्सन द्वारा 2030 तक दोनों देशों के बीच व्यापार को दोगुना करने के लक्ष्य को भी समर्थन मिलेगा।
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