Pune पुणे। केंद्रीय सड़क परिवहन एवं राजमार्ग मंत्री नितिन गडकरी ने देश में इंफ्रास्ट्रक्चर और सड़क निर्माण की योजनाओं को लेकर दीर्घकालिक सोच की जरूरत पर जोर दिया है। पुणे में सिम्बायोसिस इंटरनेशनल की ओर से आयोजित ‘फेस्टिवल ऑफ थिंकर्स लेक्चर सीरीज’ में उन्होंने कहा कि विकास की योजना बनाते समय वर्तमान जरूरतों के साथ अगले 25 से 50 वर्षों की आवश्यकताओं को भी ध्यान में रखना चाहिए। कार्यक्रम को संबोधित करते हुए गडकरी ने मुंबई-पुणे एक्सप्रेसवे के निर्माण के समय का अपना अनुभव साझा किया। उन्होंने बताया कि वर्ष 1996-97 में जब उन्हें मुंबई-पुणे एक्सप्रेसवे बनाने का अवसर मिला था, तब उनके सचिव ने चार लेन की सड़क बनाने की बात कही थी। उस समय उपलब्ध परिस्थितियों और भविष्य की जरूरतों को ध्यान में रखते हुए परियोजना पर काम किया गया।
गडकरी ने कहा कि बाद में विदेश यात्राओं के दौरान वहां की सड़क और परिवहन व्यवस्था देखने के बाद उन्हें महसूस हुआ कि भविष्य की जरूरतों को देखते हुए सड़क कहीं ज्यादा चौड़ी होनी चाहिए थी। उन्होंने इसे अपनी योजना से जुड़ी एक गलती बताते हुए कहा कि विकास परियोजनाओं को तैयार करते समय बहुत आगे की सोच जरूरी है। उन्होंने दिल्ली में बनाई गई एक बड़ी सड़क परियोजना का उदाहरण भी दिया। गडकरी के मुताबिक दिल्ली से मेरठ की ओर जाते समय अक्षरधाम मंदिर के पास सड़क का संयुक्त विस्तार करीब 40 लेन तक पहुंचता है, लेकिन इसके बावजूद वहां ट्रैफिक देखने को मिलता है। उन्होंने इस उदाहरण के जरिए बढ़ती आबादी और वाहनों की संख्या के अनुरूप भविष्य की जरूरतों का आकलन करने की आवश्यकता बताई।
केंद्रीय मंत्री ने कहा कि कई बार योजना बनाते समय गलतियां हो जाती हैं, लेकिन उनसे सीखकर भविष्य की परियोजनाओं को बेहतर बनाया जा सकता है। तेजी से बढ़ते शहरीकरण और वाहनों की संख्या को देखते हुए सड़क, परिवहन और अन्य बुनियादी ढांचा परियोजनाओं में दीर्घकालिक दृष्टिकोण बेहद जरूरी है। गडकरी ने कहा कि किसी भी बड़े इंफ्रास्ट्रक्चर प्रोजेक्ट को केवल वर्तमान यातायात या मौजूदा आबादी के आधार पर तैयार करना पर्याप्त नहीं है। आने वाले दशकों में शहरों के विस्तार, आर्थिक गतिविधियों, आबादी और यातायात में होने वाली वृद्धि का अनुमान लगाकर योजना तैयार करनी चाहिए।
उन्होंने विकास के लिए उचित विजन की आवश्यकता बताते हुए कहा कि योजनाकारों को 25 से 50 साल आगे की जरूरतों के बारे में सोचना होगा। ऐसा करने से भविष्य में बढ़ते दबाव के बावजूद बुनियादी ढांचा लंबे समय तक उपयोगी रह सकेगा। गडकरी का यह बयान देश में तेजी से विकसित हो रहे एक्सप्रेसवे और हाईवे नेटवर्क के बीच महत्वपूर्ण माना जा रहा है। उन्होंने अपने पुराने अनुभव का उदाहरण देते हुए भविष्य की परियोजनाओं में दूरदर्शी योजना और बेहतर इंफ्रास्ट्रक्चर निर्माण पर जोर दिया।
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