इंदिरा गांधी सेंटर फॉर एटॉमिक रिसर्च की एक बड़ी उपलब्धि, PFBR सफल हुआ

Update: 2026-04-06 16:28 GMT
Delhi दिल्ली: भारत ने अपने नागरिक परमाणु कार्यक्रम के दूसरे चरण की दिशा में एक ऐतिहासिक उपलब्धि हासिल की है। तमिलनाडु के कल्पक्कम स्थित प्रोटोटाइप फास्ट ब्रीडर रिएक्टर (PFBR) ने ‘क्रिटिकलिटी’ हासिल कर ली है, जो देश की ऊर्जा आत्मनिर्भरता की दिशा में एक बड़ा कदम माना जा रहा है। यह रिएक्टर पूरी तरह स्वदेशी तकनीक से डिजाइन और निर्मित किया गया है, जो भारत की वैज्ञानिक और तकनीकी क्षमता का प्रतीक है। इंदिरा गांधी परमाणु अनुसंधान केंद्र और भारतीय परमाणु ऊर्जा निगम लिमिटेड की महत्वपूर्ण भूमिका इस परियोजना में रही है।



फास्ट ब्रीडर रिएक्टर की खासियत यह है कि यह जितना ईंधन उपयोग करता है, उससे अधिक ईंधन उत्पन्न करने की क्षमता रखता है। यह प्लूटोनियम-आधारित ईंधन का उपयोग करते हुए यूरेनियम-238 को अधिक उपयोगी फिशाइल सामग्री में बदलता है। इससे देश के सीमित यूरेनियम संसाधनों का बेहतर उपयोग संभव होगा। भारत का तीन-चरणीय परमाणु कार्यक्रम लंबे समय से थोरियम आधारित ऊर्जा सुरक्षा पर केंद्रित रहा है। PFBR की सफलता इस दिशा में अहम मील का पत्थर है, क्योंकि यह भविष्य में थोरियम आधारित रिएक्टरों के विकास का मार्ग प्रशस्त करेगा।


विशेषज्ञों का मानना है कि इस उपलब्धि से न केवल भारत की ऊर्जा उत्पादन क्षमता में वृद्धि होगी, बल्कि स्वच्छ और टिकाऊ ऊर्जा के क्षेत्र में देश की वैश्विक स्थिति भी मजबूत होगी। सरकार ने इसे ‘आत्मनिर्भर भारत’ की दिशा में एक महत्वपूर्ण उपलब्धि बताया है। आने वाले समय में यह रिएक्टर देश की बढ़ती ऊर्जा जरूरतों को पूरा करने में अहम भूमिका निभाएगा और भारत को उन्नत परमाणु तकनीक वाले देशों की श्रेणी में और मजबूती से स्थापित करेगा।
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