रामभद्राचार्य के बयान पर प्रयागराज कोर्ट में याचिका, 12 अक्टूबर को पेश होने का नोटिस
नई दिल्ली: जगद्गुरु रामभद्राचार्य के एक पुराने बयान को लेकर प्रयागराज जिला अदालत में याचिका दाखिल की गई है। याचिकाकर्ता का आरोप है कि वृंदावन में भागवत कथा के दौरान दिए गए बयान में ब्राह्मण समाज की कुछ उपजातियों को लेकर आपत्तिजनक टिप्पणी की गई थी। मामले में प्रयागराज जिला अदालत ने गुरुवार को रामभद्राचार्य को नोटिस जारी किया है। अदालत ने उन्हें 12 अक्टूबर को कोर्ट में पेश होने के लिए कहा है।
2024 की भागवत कथा के बयान को लेकर मामला
याचिकाकर्ता के मुताबिक, 3 फरवरी 2024 को वृंदावन में भागवत कथा के दौरान रामभद्राचार्य ने ब्राह्मण समाज की कुछ उपजातियों को लेकर टिप्पणी की थी। याचिका में कहा गया है कि उन्होंने उपाध्याय, चौबे, त्रिगुणायत, दीक्षित और पाठक जैसे समाजों को लेकर उन्हें ‘अधम’ मानने की बात कही थी।
रामभद्राचार्य ने अपने बयान में यह भी कहा था कि ऊंचे कुल के लोग इन समाजों में अपनी बेटियां नहीं देते और न ही वहां से बेटियां लेते हैं। उन्होंने विद्यार्थियों से पढ़ाने के बदले पैसे लेने की बात का भी जिक्र किया था।
अपने बारे में उन्होंने कहा था कि वह सरयूपारीण ब्राह्मण हैं और वशिष्ठ गोत्र से संबंधित हैं। इसके बाद उन्होंने खुद को साधु, संन्यासी और जगद्गुरु रामानंदाचार्य बताया था।
याचिकाकर्ता ने क्या आरोप लगाए?
वाराणसी निवासी सुरेश चंद्र उपाध्याय ने 14 सितंबर 2026 को प्रयागराज कोर्ट में याचिका दाखिल की। याचिकाकर्ता का कहना है कि रामभद्राचार्य संत हैं और बड़ी संख्या में लोग उनका सम्मान करते हैं। उनके अनुसार, वृंदावन में दिए गए बयान के बाद उपाध्याय समाज के लोगों को लेकर समाज में गलत धारणा बनने लगी।
याचिका में दावा किया गया है कि इस बयान का असर लड़के-लड़कियों की शादी पर भी पड़ रहा है और विवाह में रुकावट आने लगी है। याचिकाकर्ता ने कहा कि बयान को लेकर उन्होंने प्रयागराज के पुलिस कमिश्नर से भी मुलाकात की थी। उनके मुताबिक, वहां से कार्रवाई नहीं होने के बाद उन्होंने अदालत का रुख किया।
कोर्ट ने जारी किया नोटिस
मामले में प्रयागराज जिला अदालत ने रामभद्राचार्य को नोटिस जारी किया है। उन्हें 12 अक्टूबर को अदालत में पेश होने के लिए कहा गया है। याचिकाकर्ता ने अदालत से रामभद्राचार्य के खिलाफ कार्रवाई की मांग की है। अब इस मामले में आगे की प्रक्रिया अदालत में होगी।
फिलहाल अदालत की ओर से नोटिस जारी किया गया है। नोटिस जारी होना अपने आप में आरोपों के सही साबित होने का निष्कर्ष नहीं है।
बयान में ब्राह्मण पहचान का भी किया था जिक्र
दिए गए बयान में रामभद्राचार्य ने अपनी ब्राह्मण पहचान का भी उल्लेख किया था। उन्होंने कहा था कि वह पहले ब्राह्मण हैं, उसके बाद साधु और संन्यासी हैं तथा फिर जगद्गुरु रामानंदाचार्य हैं। उन्होंने अपने ब्राह्मण होने पर गर्व की बात भी कही थी।
याचिकाकर्ता ने इसी बयान के उस हिस्से को आधार बनाया है, जिसमें ब्राह्मण समाज की अलग-अलग उपजातियों को लेकर टिप्पणी की गई थी।
अब 12 अक्टूबर को होगी अगली कार्रवाई
इस मामले में अगला प्रमुख चरण 12 अक्टूबर को होगा, जब रामभद्राचार्य को अदालत में पेश होने के लिए कहा गया है। मामला एक पुराने धार्मिक कार्यक्रम के दौरान दिए गए बयान से जुड़ा है। याचिकाकर्ता ने बयान को समाज के एक वर्ग के प्रति अपमानजनक बताते हुए कानूनी कार्रवाई की मांग की है। अब अदालत के सामने मामले से जुड़े पक्ष और दस्तावेज आने के बाद आगे की न्यायिक प्रक्रिया तय होगी।