उन्होंने कहा कि भारत पर विदेशी कर्ज बढ़ गया है, महंगाई बढ़ी है। रोजगार छीना गया है। स्वतंत्रता घटी है। उद्योगीकरण बंद करके ट्रेडिंग शुरू कर दी गई है। देश के अंदर किसान आत्महत्या कर रहे हैं। उन्होंने कहा कि ओलंपिक में स्वर्ण पदक जीतने वाली खिलाड़ी की रक्षा नहीं कर पाए। हम जनता के वकील हैं, हमें अपनी बात सदन में कहने से रोकने के लिए उकसाने वाले बयान दिए जा रहे हैं। संसद भवन लोकतंत्र का मंदिर है। वहां ड्रामा नहीं होता है। हम जनता और मंदिर दोनों के सेवक हैं।
एसआईआर को लेकर हरेंद्र मलिक ने कहा कि हर भारतीय से कहा जा रहा है कि आप बताओ कि भारतीय हो कि नहीं हो। उन्होंने कहा कि जिसे आप विदेशी समझते हैं, उनसे प्रूफ मानिए। यह सोची समझी रणनीति है, जिसके जरिए वोट काटे जा रहे हैं। उन्होंने कहा कि गरीब को अनाज देकर उन्हें लगता है कि वे देश को खरीद लेंगे। कभी दस हजार खाते में भेज देते हैं। ये लोग किसी भी तरह से सरकार में बने रहना चाहते हैं।
संसद के शीतकालीन सत्र की शुरुआत से पहले प्रधानमंत्री मोदी ने सोमवार को मीडिया को संबोधित करते हुए साफ कहा कि संसद परिसर में ड्रामा करने की बहुत जगहें बाहर हैं, लेकिन सदन में हंगामे की कोई जगह नहीं है। सदन में ड्रामा नहीं होना चाहिए। उन्होंने सभी राजनीतिक दलों, खासकर विपक्ष से अपील की कि वे सत्र को सुचारू और गरिमामय तरीके से चलाने में सहयोग दें।a