दिल्ली। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने देशवासियों को आत्मनिर्भरता, सामूहिक शक्ति और दृढ़ संकल्प का संदेश देते हुए कहा कि संकट चाहे कितना भी बड़ा हो और चुनौती कितनी भी कठिन क्यों न हो, हमें दूसरों के भरोसे नहीं बैठना चाहिए। उन्होंने कहा कि प्रत्येक व्यक्ति को अपनी क्षमता पहचानकर उपलब्ध संसाधनों पर विश्वास करना चाहिए और मेहनत के बल पर समस्याओं का समाधान निकालना चाहिए।
प्रधानमंत्री मोदी ने भगवान श्रीराम के जीवन का उदाहरण देते हुए कहा कि कठिन परिस्थितियां कभी भी लक्ष्य प्राप्ति के मार्ग में बाधा नहीं बन सकतीं, यदि संकल्प मजबूत हो और प्रयास निरंतर जारी रहें। पीएम मोदी ने कहा, "संकट कितना भी बड़ा क्यों न हो, चुनौती कितनी भी कठिन क्यों न हो, हमें दूसरों के भरोसे नहीं बैठना है। हमें अपना सामर्थ्य पहचानना है। हमें संसाधनों पर विश्वास करना है। अपने संकल्प को शक्ति बनाना है और अपने परिश्रम से समाधान निकालना है।
प्रधानमंत्री ने भगवान श्रीराम की लंका यात्रा का उल्लेख करते हुए कहा कि उनके सामने विशाल समुद्र था और लंका दूर थी, लेकिन उनका संकल्प अडिग था। उन्होंने जनता की सामूहिक शक्ति को जगाया और जनभागीदारी को अपना संबल बनाया। इसी सामूहिक प्रयास से असंभव दिखाई देने वाले लक्ष्य को संभव बनाया जा सका। उन्होंने कहा कि भगवान श्रीराम का जीवन सिखाता है कि रास्ते की कठिनाइयां हमारी यात्रा को रोक नहीं सकतीं। मजबूत इच्छाशक्ति, परिश्रम और सामूहिक सहयोग के माध्यम से बड़ी से बड़ी चुनौती का सामना किया जा सकता है।
प्रधानमंत्री मोदी ने अपने संदेश में आत्मविश्वास और जनभागीदारी के महत्व को रेखांकित किया। उन्होंने कहा कि सफलता के लिए केवल संसाधन होना पर्याप्त नहीं है, बल्कि उपलब्ध संसाधनों का सही उपयोग और लक्ष्य के प्रति समर्पण भी आवश्यक है। प्रधानमंत्री के संबोधन का मुख्य संदेश था कि दृढ़ संकल्प, सामूहिक शक्ति और निरंतर परिश्रम ही सफलता का मूलमंत्र हैं।