भारत-कनाडा आर्थिक सहयोग बढ़ाने पर जोर निर्मला सीतारमण ने गिनाए तीन प्रमुख मुद्दे
Canada कनाडा: केंद्रीय वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने कनाडा के वित्त और राष्ट्रीय राजस्व मंत्री फ्रांस्वा-फिलिप शैम्पेन के साथ हुई संयुक्त प्रेस कॉन्फ्रेंस में भारत और कनाडा के बीच आर्थिक सहयोग को मजबूत करने पर जोर दिया। उन्होंने कहा कि दोनों देशों के बीच बातचीत मुख्य रूप से तीन प्रमुख विषयों पर केंद्रित रही। निर्मला सीतारमण ने कहा कि पहली चर्चा मैक्रो-इकोनॉमिक डेवलपमेंट को लेकर हुई। उन्होंने कहा कि भारत ने मजबूत आर्थिक प्रदर्शन दिखाया है और दोनों देशों ने भारत-कनाडा की अर्थव्यवस्थाओं के बीच एक-दूसरे की जरूरतों को पूरा करने की क्षमता को पहचाना है।
केंद्रीय वित्त मंत्री ने कहा कि भारत और कनाडा के बीच निवेश और आर्थिक सहयोग को और गहरा करने की काफी संभावनाएं मौजूद हैं। उन्होंने कहा कि दोनों देश मिलकर वैश्विक आर्थिक स्थिरता और विकास में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकते हैं। उन्होंने बताया कि बातचीत का दूसरा प्रमुख विषय वित्तीय क्षेत्र में सहयोग रहा। इसमें क्रॉस-बॉर्डर पेमेंट, वित्तीय स्थिरता, फिनटेक और कैपिटल मार्केट जैसे महत्वपूर्ण मुद्दों पर चर्चा की गई। सीतारमण ने कहा कि भारत और कनाडा के वित्तीय सिस्टम के बीच बेहतर तालमेल स्थापित करने की बड़ी संभावनाएं हैं। इससे व्यापार, निवेश और रेमिटेंस के प्रवाह को बढ़ावा मिल सकता है।
उन्होंने कहा कि डिजिटल वित्तीय सेवाओं और आधुनिक तकनीक आधारित वित्तीय समाधानों के क्षेत्र में दोनों देशों के बीच सहयोग को और मजबूत किया जा सकता है। फिनटेक क्षेत्र में साझेदारी दोनों अर्थव्यवस्थाओं के लिए नए अवसर पैदा कर सकती है। केंद्रीय मंत्री ने बताया कि तीसरे विषय के रूप में साझा हितों से जुड़े अंतरराष्ट्रीय और बहुपक्षीय सहयोग के अवसरों पर चर्चा हुई। उन्होंने कहा कि वर्तमान वैश्विक परिस्थितियों में देशों के बीच सहयोग और संवाद पहले से अधिक महत्वपूर्ण हो गया है।
उन्होंने कहा कि भारत और कनाडा जैसी अर्थव्यवस्थाएं वैश्विक विकास में स्थिरता और भरोसा बढ़ाने में योगदान दे सकती हैं। संयुक्त प्रेस कॉन्फ्रेंस में दोनों देशों के प्रतिनिधियों ने आर्थिक संबंधों को आगे बढ़ाने और आपसी सहयोग के नए क्षेत्रों की पहचान करने पर सहमति जताई। भारत और कनाडा के बीच व्यापार, निवेश, वित्तीय सेवाओं और तकनीकी सहयोग को लेकर लंबे समय से संभावनाएं बनी हुई हैं। इस बैठक को दोनों देशों के आर्थिक संबंधों को नई दिशा देने के प्रयास के तौर पर देखा जा रहा है।