NEET पेपर लीक रोकने के लिए नंदन नीलेकणि का नया सुझाव, परीक्षा वाले दिन बनेगा प्रश्नपत्र?
नई दिल्ली: NEET-UG पेपर लीक विवाद के बाद परीक्षा व्यवस्था में सुधार के लिए बनाई गई टास्क फोर्स के प्रमुख नंदन नीलेकणि ने प्रश्नपत्र लीक रोकने का एक नया तरीका सुझाया है। उनका कहना है कि प्रश्नों का बड़ा बैंक बनाया जाए और परीक्षा का प्रश्नपत्र आखिरी समय में तैयार किया जाए। इस व्यवस्था में डिजिटल सुरक्षा, प्रश्नों की गुणवत्ता और निष्पक्षता जैसी चुनौतियां भी सामने आ सकती हैं। टास्क फोर्स की पहली रिपोर्ट 28 अक्टूबर को आने वाली है।
NEET पेपर लीक रोकने के लिए क्या है नीलेकणि का सुझाव?
NEET-UG पेपर लीक विवाद के बाद परीक्षा व्यवस्था को बेहतर बनाने की कोशिशें जारी हैं। इसी कड़ी में इंफोसिस के सह-संस्थापक और परीक्षा सुधार के लिए गठित हाई-पावर्ड टास्क फोर्स के प्रमुख नंदन नीलेकणि ने प्रश्नपत्र लीक रोकने का एक तरीका सुझाया है। मंगलवार, 13 अक्टूबर को उन्होंने कहा कि प्रश्नों का एक बड़ा बैंक तैयार किया जाना चाहिए और परीक्षा के दिन प्रश्नपत्र को अंतिम समय में बनाया जाना चाहिए।
नीलेकणि के मुताबिक, परीक्षा का पेपर पहले से तैयार होने पर उसके लीक होने और पैसे लेकर बेचे जाने का खतरा पैदा हो जाता है। ऐसे में केवल सुरक्षा बढ़ाने के बजाय पूरी व्यवस्था में बदलाव करना जरूरी है। उन्होंने यह भी कहा कि आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस यानी AI की मदद से परीक्षा के प्रश्नपत्र तैयार किए जा सकते हैं।
पेपर तैयार करने के तरीके में बदलाव पर जोर
नीलेकणि ने नई दिल्ली में आयोजित ब्लूमबर्ग न्यू इकोनॉमी फोरम 2026 के दौरान अपनी बात रखी। उनका मानना है कि जब कोई प्रश्नपत्र पहले से तैयार कर लिया जाता है, तो उसके गलत हाथों में पहुंचने की आशंका बनी रहती है। इसलिए प्रश्नों का बड़ा संग्रह तैयार करके परीक्षा के लिए पेपर आखिरी समय में बनाना एक विकल्प हो सकता है। उनके अनुसार, पेपर लीक को केवल सुरक्षा से जुड़ी परेशानी मानने के बजाय व्यवस्था की खामी के तौर पर देखना चाहिए। यदि समस्या की जड़ तक पहुंचकर समाधान निकाला जाए, तो इस पर काबू पाया जा सकता है।
नीलेकणि की अगुवाई वाली टास्क फोर्स के सुझाव पहले की समितियों की 101 सिफारिशों से अलग बताए जा रहे हैं। हालांकि उन्होंने अपनी रिपोर्ट की पूरी जानकारी साझा नहीं की, लेकिन कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी इन बदलावों को लागू करने के लिए उत्सुक हैं।
डिजिटल प्रश्नपत्र से जुड़ी चुनौतियां भी कम नहीं
प्रश्नपत्र को परीक्षा से ठीक पहले तैयार करने का विचार सामने आया है, लेकिन इसे लागू करना आसान नहीं होगा। यदि प्रश्नपत्र डिजिटल तरीके से तैयार किया जाता है, तो उसके लीक होने का खतरा पूरी तरह खत्म नहीं होगा। खतरा प्रिंटिंग प्रेस से हटकर सर्वर और नेटवर्क की सुरक्षा पर आ सकता है। ऐसी स्थिति में हैकिंग, डेटा चोरी और सिस्टम के भीतर से जानकारी लीक होने जैसे साइबर जोखिमों से निपटना जरूरी होगा। इसके अलावा, प्रश्नों का बड़ा और विश्वसनीय बैंक तैयार करना भी एक बड़ी चुनौती साबित हो सकता है।
प्रत्येक प्रश्न की गुणवत्ता, कठिनाई का स्तर और परीक्षा की निष्पक्षता बनाए रखना होगा। यह सुनिश्चित करना भी जरूरी होगा कि अलग-अलग प्रश्नपत्रों में कठिनाई का स्तर समान रहे। इन सभी पहलुओं को ध्यान में रखे बिना नई व्यवस्था को सफलतापूर्वक लागू करना मुश्किल हो सकता है।
NTA को मजबूत करना भी जरूरी
प्रश्नपत्र तैयार करने की प्रक्रिया में बदलाव के साथ राष्ट्रीय परीक्षा एजेंसी यानी NTA की कार्यप्रणाली को मजबूत करना भी एक अहम मुद्दा है। खबर के मुताबिक, स्थायी कर्मचारियों की कमी और पूर्णकालिक निदेशक का अभाव नई व्यवस्था को लागू करने में बाधा बन सकता है।
NEET पेपर लीक मामले में सुप्रीम कोर्ट ने भी परीक्षा व्यवस्था में स्थायित्व को महत्वपूर्ण बताया था। इसलिए केवल तकनीक में बदलाव करना पर्याप्त नहीं होगा, बल्कि परीक्षा कराने वाली संस्था की कार्यप्रणाली को भी मजबूत बनाना होगा।
टास्क फोर्स की रिपोर्ट 28 अक्टूबर को आने की उम्मीद
25 जुलाई को जंतर-मंतर पर छात्रों के बड़े विरोध-प्रदर्शन और शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे की मांग के बीच प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने छह सदस्यों वाली हाई-पावर्ड कमेटी बनाई थी। इसका उद्देश्य परीक्षा व्यवस्था में सुधार के उपाय तलाशना है। टास्क फोर्स ने 13 सितंबर तक विद्यार्थियों, अभिभावकों, शिक्षकों, शैक्षणिक संस्थानों और विभिन्न संगठनों से सुझाव मांगे थे। अब इसकी पहली रिपोर्ट 28 अक्टूबर को आने वाली है।
पिछली समिति की 101 सिफारिशों में क्या था?
वर्ष 2024 में NEET पेपर लीक विवाद के बाद ISRO के पूर्व प्रमुख के. राधाकृष्णन की अध्यक्षता में सात सदस्यीय उच्चस्तरीय समिति बनाई गई थी। इस समिति ने परीक्षा सुधार, डेटा सुरक्षा और NTA की संरचना जैसे विषयों पर काम करते हुए 101 सिफारिशें प्रस्तावित की थीं।
इनमें प्रश्नपत्र के प्रबंधन, अभ्यर्थियों के पंजीकरण, भुगतान की प्रक्रिया और कंप्यूटर आधारित परीक्षाओं से जुड़े सुझाव शामिल थे। अब नीलेकणि की अगुवाई वाली टास्क फोर्स के नए विचारों से परीक्षा प्रणाली में किस तरह के बदलाव होंगे, इस पर सबकी नजर है।