नई दिल्ली: अमेरिकी सिंगर मैरी मिलबेन ने कॉकरोच जनता पार्टी (CJP) और उसके संस्थापक अभिजीत दीपके पर विदेशी फंडिंग मिलने का आरोप लगाया है। उन्होंने दावा किया कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के विरोधी कुछ अमेरिकी डोनर्स दीपके को पैसा भेज रहे हैं, जिसका इस्तेमाल भारत में अशांति फैलाने के लिए किया जा रहा है। हालांकि, दीपके पहले ही विदेशी फंडिंग के आरोपों को खारिज कर चुके हैं और संगठन का खर्च दोस्तों के सहयोग से जुटाने की बात कह चुके हैं। दिल्ली में 10 अक्टूबर को हुए प्रदर्शन को लेकर हार्वर्ड यूनिवर्सिटी के पूर्व छात्रों के दो समूहों ने भी अलग-अलग बयान जारी किए हैं।
मैरी मिलबेन ने CJP की फंडिंग पर उठाए सवाल
अमेरिकी सिंगर मैरी मिलबेन ने कॉकरोच जनता पार्टी (CJP) पर विदेशी फंडिंग मिलने का आरोप लगाया है। उन्होंने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर दावा किया कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के विरोधी कुछ अमेरिकी डोनर्स, संगठन के संस्थापक अभिजीत दीपके को आर्थिक मदद दे रहे हैं। हालांकि, इन आरोपों की स्वतंत्र पुष्टि होना बाकी है।
मिलबेन के मुताबिक, इस धन का इस्तेमाल भारत में अशांति फैलाने और सरकार के कामकाज में बाधा डालने के लिए किया जा रहा है। उन्होंने अपनी पोस्ट में भारत के युवाओं से इस मुद्दे पर आवाज उठाने की अपील भी की। मिलबेन ने लिखा कि अब चुप रहने का समय नहीं है।
हालांकि, उनके इन आरोपों के समर्थन में खबर में कोई स्वतंत्र प्रमाण नहीं दिया गया है। इसलिए विदेशी फंडिंग और उसके कथित इस्तेमाल से जुड़े दावों की पुष्टि होना बाकी है।
PM मोदी के समर्थन में भी बोलीं मिलबेन
मैरी मिलबेन ने अपने बयान में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के राजनीतिक सफर का जिक्र करते हुए उनका समर्थन किया। उन्होंने दावा किया कि कुछ अमेरिकी डोनर्स दुनिया के अलग-अलग देशों में परंपरावादी नेताओं को निशाना बनाने के लिए एक खास तरीका अपनाते हैं।
मिलबेन के आरोप के अनुसार, ऐसे लोग अमेरिका में पढ़ चुके किसी व्यक्ति को चुनते हैं, उसे अपने विचारों के अनुसार तैयार करते हैं और फिर अपने देश लौटने के बाद अराजकता फैलाने के लिए आर्थिक सहायता देते हैं। उन्होंने इसी दावे को CJP और अभिजीत दीपके से जोड़कर पेश किया।
मिलबेन ने कहा कि मोदी करीब 25 साल से सरकार में रहकर लोगों की सेवा कर रहे हैं और 12 साल से प्रधानमंत्री हैं। उनके अनुसार, प्रधानमंत्री अमेरिका से आने वाले दबाव के आगे नहीं झुकेंगे। जून 2023 में प्रधानमंत्री मोदी की अमेरिका यात्रा के दौरान मिलबेन ने भारत का राष्ट्रगान गाया था। उस समय प्रधानमंत्री के पैर छूने के बाद भी वह चर्चा में आई थीं।
मैरी मिलबेन इससे पहले भी कई राजनीतिक और नीतिगत मुद्दों पर प्रधानमंत्री मोदी का समर्थन कर चुकी हैं।
- किसान आंदोलन: फरवरी 2021 में उन्होंने केंद्र सरकार के कृषि कानूनों का समर्थन किया था। उन्होंने कहा था कि उन्हें किसानों की जिंदगी बेहतर बनाने के प्रधानमंत्री के दृष्टिकोण पर भरोसा है।
- मणिपुर हिंसा: अगस्त 2023 में उन्होंने इस मुद्दे पर मोदी का समर्थन करते हुए कहा था कि भारत को अपने नेता पर भरोसा है।
- BBC की डॉक्यूमेंट्री: वर्ष 2023 में प्रसारित डॉक्यूमेंट्री ‘India: The Modi Question’ की उन्होंने आलोचना की थी। इसमें 2002 के गुजरात दंगों के दौरान नरेंद्र मोदी की भूमिका पर सवाल उठाए गए थे।
- नागरिकता संशोधन कानून: मार्च 2024 में CAA लागू होने पर उन्होंने सरकार के फैसले की तारीफ की थी। लोकसभा चुनाव के दौरान भी उन्होंने भारतीय मतदाताओं से मोदी को वोट देने की अपील की थी।
भारत में भी CJP की फंडिंग को लेकर सवाल उठे
CJP की आर्थिक मदद को लेकर भारत में भी पहले सवाल उठ चुके हैं। भाजपा सांसद निशिकांत दुबे ने अभिजीत दीपके की अमेरिका में पढ़ाई के खर्च पर सवाल उठाते हुए जॉर्ज सोरोस से जुड़े किसी फाउंडेशन की संभावित भूमिका के बारे में पूछा था।
भाजपा अध्यक्ष नितिन नवीन ने भी विपक्ष और CJP पर विदेशी सहायता के जरिए देश में अस्थिरता पैदा करने की कोशिश करने का आरोप लगाया था। इसके अलावा, अगस्त 2026 में RTI कार्यकर्ता अमित तिवारी ने दीपके की पढ़ाई के खर्च और CJP के कानूनी सहायता फंड की जांच की मांग की थी। ये आरोप और सवाल अपने आप में विदेशी फंडिंग की पुष्टि नहीं करते। इनके संबंध में जांच या प्रमाण की स्थिति इस खबर में स्पष्ट नहीं की गई है।
अभिजीत दीपके ने विदेशी मदद मिलने से किया था इनकार
CJP के संस्थापक अभिजीत दीपके विदेशी फंडिंग के आरोपों को पहले ही नकार चुके हैं। संगठन के आंदोलनों का खर्च कैसे उठाया जाता है, इस बारे में उन्होंने कहा था कि वह और उनके दोस्त मिलकर पैसे जुटाते हैं।
दीपके के अनुसार, CJP को किसी विदेशी डोनर या बड़े उद्योगपति से आर्थिक सहायता नहीं मिली है। उन्होंने आगे चलकर क्राउडफंडिंग के जरिए धन जुटाने की योजना भी बताई थी। विदेशी फंडिंग के आरोपों पर उन्होंने केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह से सवाल किया था। दीपके का कहना था कि यदि आंदोलन में विदेशी धन का इस्तेमाल हुआ है, तो उसकी जांच करना और ऐसे लेनदेन को रोकना गृह मंत्रालय की जिम्मेदारी है।
दिल्ली प्रदर्शन पर हार्वर्ड के पूर्व छात्रों के दो बयान
10 अक्टूबर को दिल्ली में हुए प्रदर्शन और पुलिस कार्रवाई को लेकर हार्वर्ड यूनिवर्सिटी के पूर्व छात्रों के दो समूहों ने अलग-अलग बयान जारी किए। 12 अक्टूबर को जारी पहले बयान पर 100 पूर्व छात्रों के हस्ताक्षर थे। इस समूह ने पुलिस पर प्रदर्शनकारियों के साथ बर्बरता करने, गैरकानूनी तरीके से हिरासत में रखने और संवैधानिक अधिकारों का उल्लंघन करने के आरोप लगाए।
वहीं, बुधवार को जारीदूसरे बयान पर 44 लोगों ने हस्ताक्षर किए। खुद को ‘हार्वर्ड कम्युनिटी’ बताने वाले इस समूह ने भारत की संवैधानिक संस्थाओं के खिलाफ कथित अभियान को लेकर चिंता जताई। बयान में चुनाव आयोग, सुप्रीम कोर्ट, मुख्य न्यायाधीश के कार्यालय और संसद के खिलाफ नकारात्मक माहौल बनाने की कोशिशों का उल्लेख किया गया।
इस तरह CJP की फंडिंग को लेकर आरोप-प्रत्यारोप के साथ दिल्ली के प्रदर्शन और उस पर हुई कार्रवाई भी चर्चा में बनी हुई है।
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