IIT बॉम्बे में छात्र की मौत के बाद बड़ा फैसला, हॉस्टल-कैंपस से हटेंगे सीलिंग फैन, लगेंगे वॉल फैन
नई दिल्ली: IIT बॉम्बे में BTech छात्र साहिल रविंद्र वाकोडे की मौत के बाद कैंपस और हॉस्टल में लगे सीलिंग फैन हटाकर वॉल फैन लगाने का फैसला किया गया है। 18 सितंबर को साहिल की मौत के बाद यह फैसला लागू किया गया। इस मामले को लेकर छात्रों का प्रदर्शन पांचवें दिन भी जारी है। छात्र जवाबदेही, पारदर्शिता, छात्र कल्याण और मानसिक स्वास्थ्य से जुड़ी व्यवस्थाओं में बदलाव की मांग कर रहे हैं। वहीं फैकल्टी के एक वर्ग ने प्रोफेसर सूर्यनारायण दुल्ला का समर्थन किया है।
साहिल की मौत के बाद IIT बॉम्बे में बदलेंगे पंखे
साहिल रविंद्र वाकोडे की मौत के बाद IIT बॉम्बे ने कैंपस और हॉस्टल में लगे सीलिंग फैन हटाकर उनकी जगह वॉल फैन लगाने का फैसला किया है। कैंपस में वॉल फैन पहुंचने की तस्वीर भी सोशल मीडिया पर सामने आई है। सूत्रों के मुताबिक, पंखे बदलने को लेकर चर्चा जुलाई में एक छात्र की मौत के बाद शुरू हुई थी। 18 सितंबर को साहिल की मौत के बाद इस फैसले को लागू किया गया।
पांचवें दिन भी छात्रों का प्रदर्शन
साहिल की मौत को लेकर छात्रों का प्रदर्शन पांचवें दिन भी जारी रहा। छात्र संस्थान में जवाबदेही और पारदर्शिता बढ़ाने के साथ छात्र कल्याण और मानसिक स्वास्थ्य की व्यवस्था में बदलाव की मांग कर रहे हैं।
छात्रों ने अपनी मांगें IIT बॉम्बे के डायरेक्टर के सामने औपचारिक तौर पर रखीं। डायरेक्टर ने मांगों को स्वीकार किया और तय समयसीमा में उन्हें लागू करने की दिशा में काम करने पर सहमति जताई। इसके बाद छात्रों के साथ ओपन हाउस भी किया गया।
18 सितंबर को CCTV में क्या दिखा?
साहिल 22 साल का था और IIT बॉम्बे के एनर्जी साइंस एंड इंजीनियरिंग विभाग में BTech सेकंड ईयर का छात्र था। वह महाराष्ट्र के यवतमाल जिले का रहने वाला था।
क्राइम ब्रांच के अनुसार, 18 सितंबर को दोपहर करीब 12:30 से 12:45 बजे के बीच परीक्षा हॉल की CCTV फुटेज में साहिल अपनी जेब में रखी किसी चीज को देखने के लिए झुकता नजर आया था। इसके बाद एक प्रोफेसर ने उससे सवाल किया और उसे अलग ले गए।
जांच एजेंसी के मुताबिक साहिल करीब 1:25 बजे हॉस्टल के कमरे में पहुंचा। इसके बाद वह कमरे से बाहर नहीं निकला। बाद में उसी दिन वह कमरे में मृत मिला। क्राइम ब्रांच परीक्षा हॉल, कैंपस और हॉस्टल की CCTV फुटेज की जांच कर रही है। हालांकि, फुटेज अभी सार्वजनिक नहीं की गई है और जांच टीम ही इसे देख रही है।
CBI जांच की भी मांग
साहिल के परिवार ने आरोप लगाया है कि उसे जाति आधारित उत्पीड़न और भेदभाव का सामना करना पड़ा था। परिवार ने मामले की विस्तृत जांच के साथ CBI जांच की मांग की है। साहिल के माता-पिता ने SC/ST एक्ट के तहत मामला दर्ज कराया है। FIR में प्रोफेसर सूर्यनारायण दुल्ला का नाम भी शामिल है।
छात्रों ने कहा- किसी को पहले से दोषी नहीं मान रहे
प्रदर्शन कर रहे छात्रों ने कहा है कि वे प्रोफेसर दुल्ला को पहले से दोषी नहीं मान रहे हैं। उनकी मांग है कि पूरे मामले की जांच निष्पक्ष और स्वतंत्र तरीके से की जाए। छात्रों ने यह भी मांग रखी है कि जांच पूरी होने तक दुल्ला को प्रशासनिक जिम्मेदारियों से अलग रखा जाए, ताकि जांच की निष्पक्षता पर सवाल न उठें।
ChatGPT को लेकर IIT ने बदला अपना बयान
घटना के बाद 19 सितंबर को IIT बॉम्बे ने कहा था कि साहिल ने परीक्षा का प्रश्नपत्र ChatGPT पर अपलोड किया था। संस्थान के मुताबिक, चीटिंग करते पकड़े जाने के बाद साहिल ने सुसाइड कर लिया। हालांकि, 21 सितंबर को IIT बॉम्बे ने इस बयान के लिए माफी मांगी और अपना बयान वापस ले लिया। संस्थान ने कहा कि पूरी जांच खत्म होने से पहले ऐसा बयान देना सही नहीं था।
IIT बॉम्बे में निकाला गया मार्च
IIT बॉम्बे के फैकल्टी फोरम ने प्रोफेसर सूर्यनारायण दुल्ला के समर्थन में कैंपस में मार्च निकाला। फोरम का कहना है कि दुल्ला ने सीनेट से मंजूर परीक्षा प्रक्रिया के तहत अपनी जिम्मेदारी निभाई थी। फैकल्टी फोरम के अध्यक्ष प्रो. राजकुमार एस. पंत ने कहा कि दुल्ला को केवल डीन के पद से हटाया गया है और वह अभी भी टीचिंग फैकल्टी का हिस्सा हैं।
उन्होंने कहा कि साहिल ने SC/ST सेल में कोई शिकायत की थी या नहीं, इसकी उन्हें जानकारी नहीं है। जाति से जुड़ी टिप्पणियों के आरोपों की पुष्टि या खंडन करने के लिए भी उन्होंने प्रत्यक्ष जानकारी नहीं होने की बात कही।
IIT दिल्ली और IIT मद्रास की फैकल्टी भी सामने आई
IIT दिल्ली के फैकल्टी फोरम ने भी प्रोफेसर दुल्ला का समर्थन किया है। फोरम के मुताबिक, दुल्ला संस्थान की गाइडलाइंस के अनुसार अपनी जिम्मेदारी निभा रहे थे। फोरम ने फैकल्टी को संस्थागत, कानूनी और आर्थिक मदद देने की मांग भी की है।
वहीं IIT मद्रास फैकल्टी एसोसिएशन ने मामले की निष्पक्ष, पारदर्शी और समयबद्ध जांच की मांग की है। एसोसिएशन ने अकादमिक नियम लागू करने वाले फैकल्टी को पर्याप्त सपोर्ट और काउंसलिंग देने की बात कही है। साथ ही तनाव की स्थिति में सुरक्षा व्यवस्था की समीक्षा की मांग भी की गई है।
छात्रों ने कहा- अनुशासन और कल्याण दोनों जरूरी
छात्रों ने स्पष्ट किया है कि उनका प्रदर्शन नकल या अकादमिक नियमों के उल्लंघन को सही ठहराने के लिए नहीं है।
उनका कहना है कि अकादमिक अनुशासन अपनी जगह जरूरी है, लेकिन छात्रों के कल्याण और मानसिक स्वास्थ्य से जुड़े मामलों पर भी संस्थान को कदम उठाने चाहिए। छात्रों की मांगों में जवाबदेही, पारदर्शिता और छात्र कल्याण से जुड़ी व्यवस्था में बदलाव प्रमुख हैं।