Raipur. रायपुर। छत्तीसगढ़ के बहुचर्चित 6 हजार करोड़ रुपये के महादेव ऑनलाइन सट्टा ऐप मामले में केंद्रीय जांच ब्यूरो (CBI) को बड़ी सफलता मिली है। मामले के मुख्य आरोपी और प्रमोटर सौरभ चंद्राकर को ओमान से प्रत्यर्पण के बाद भारत लाया गया है। सोमवार, 2 नवंबर को CBI ने उसे दिल्ली की राउज एवेन्यू कोर्ट में पेश किया। जांच एजेंसी ने आरोपी को रायपुर की विशेष CBI अदालत में पेश करने के लिए दो दिन की ट्रांजिट रिमांड मांगी है। हालांकि, अदालत ने इस मांग पर अपना फैसला सुरक्षित रख लिया है।
जानकारी के मुताबिक, कोर्ट से ट्रांजिट रिमांड की मंजूरी मिलने के बाद CBI की टीम सौरभ चंद्राकर को रायपुर लेकर आएगी। यहां उसे विशेष CBI अदालत में पेश किया जाएगा। चंद्राकर के भारत पहुंचने के बाद महादेव ऑनलाइन सट्टा नेटवर्क से जुड़े कई बड़े खुलासे होने की संभावना जताई जा रही है। महादेव सट्टा ऐप मामले की जांच CBI और प्रवर्तन निदेशालय (ED) दोनों एजेंसियां कर रही हैं। छत्तीसगढ़ सरकार ने इस प्रकरण से संबंधित 13 एफआईआर की जांच CBI को सौंपी थी। इनमें से दो मामलों में जांच एजेंसी चार्जशीट दाखिल कर चुकी है। वहीं, ED ने मनी लॉन्ड्रिंग के मामले में सौरभ चंद्राकर के खिलाफ अभियोजन शिकायत दाखिल की है।
मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय ने CBI को दी बधाई
सौरभ चंद्राकर को भारत लाए जाने पर मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय ने CBI की कार्रवाई की सराहना करते हुए जांच एजेंसी को बधाई दी है। मुख्यमंत्री ने कहा कि इस मामले की जांच आगे बढ़ने से यह खुलासा हो सकता है कि महादेव सट्टा ऐप से मिलने वाली प्रोटेक्शन मनी किन-किन लोगों तक पहुंचती थी। उनके इस बयान के बाद मामले से जुड़े राजनीतिक और प्रशासनिक संबंधों को लेकर चर्चाएं तेज हो गई हैं।
फर्जी पहचान के सहारे गिरफ्तारी से बचने की कोशिश
CBI के मुताबिक, महादेव सट्टा नेटवर्क की जांच शुरू होने के बाद से ही सौरभ चंद्राकर फरार चल रहा था। वह वर्ष 2023 से दुबई में रह रहा था। उसके खिलाफ इंटरपोल का रेड कॉर्नर नोटिस भी जारी किया गया था। आरोप है कि गिरफ्तारी से बचने के लिए उसने फर्जी पहचान दस्तावेजों का सहारा लिया और संयुक्त अरब अमीरात से ओमान पहुंच गया। मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, सौरभ चंद्राकर के कथित फर्जी इंडोनेशियाई पासपोर्ट में उसकी तस्वीर लगी थी, लेकिन नाम 'अजंता मेंडिस' दर्ज था। यह नाम श्रीलंका के पूर्व क्रिकेटर अजन्ता मेंडिस से मिलता-जुलता है। पासपोर्ट में दर्ज जन्मतिथि भी अन्य दस्तावेजों से अलग बताई गई है। हालांकि, इन दस्तावेजों की प्रामाणिकता की आधिकारिक पुष्टि आवश्यक है।
8 जुलाई को ओमान में हुई थी गिरफ्तारी
जांच एजेंसियों से मिली खुफिया जानकारी और इंटरपोल के रेड कॉर्नर नोटिस के आधार पर 8 जुलाई 2026 को रॉयल ओमान पुलिस ने सौरभ चंद्राकर को गिरफ्तार किया था। इसके बाद भारत सरकार के माध्यम से CBI और ED ने उसके प्रत्यर्पण की औपचारिक प्रक्रिया शुरू की। भारतीय एजेंसियों ने ओमान के अधिकारियों को मामले से संबंधित दस्तावेज और सबूत उपलब्ध कराए। लंबी कानूनी और कूटनीतिक प्रक्रिया के बाद प्रत्यर्पण को मंजूरी मिली। इसके बाद CBI की टीम मस्कट पहुंची और 1 नवंबर को चंद्राकर को भारत लेकर आई। CBI ने इस कार्रवाई में सहयोग के लिए ओमान सरकार, रॉयल ओमान पुलिस और इंटरपोल का आभार व्यक्त किया है।
पूछताछ में सामने आ सकते हैं कई बड़े नाम
सौरभ चंद्राकर के भारत आने के बाद जांच एजेंसियों का ध्यान महादेव ऑनलाइन सट्टा ऐप के वित्तीय नेटवर्क, कथित अवैध लेनदेन और संरक्षण देने वाले लोगों की भूमिका पर केंद्रित हो सकता है। CBI पहले आरोपी से पूछताछ कर सकती है। इसके बाद ED भी अदालत से रिमांड की अनुमति लेकर मनी लॉन्ड्रिंग से जुड़े सवाल पूछ सकती है। जांच के दौरान यह पता लगाने का प्रयास किया जाएगा कि ऑनलाइन सट्टेबाजी से अर्जित रकम का इस्तेमाल कहां किया गया और कथित प्रोटेक्शन मनी किन लोगों तक पहुंचाई गई। हालांकि, इन आरोपों की अंतिम पुष्टि न्यायिक प्रक्रिया और जांच के निष्कर्षों के आधार पर ही होगी। महादेव सट्टा ऐप मामले में सौरभ चंद्राकर का प्रत्यर्पण जांच के लिहाज से महत्वपूर्ण घटनाक्रम माना जा रहा है। अब सभी की निगाहें दिल्ली की अदालत के ट्रांजिट रिमांड संबंधी फैसले और रायपुर में होने वाली आगे की कानूनी कार्रवाई पर टिकी हैं।
Tags: