BHARAT: चालू वित्त वर्ष 2026-27 में सरकार का एलपीजी सब्सिडी बिल एक लाख करोड़ रुपये से अधिक पहुंचने का अनुमान है। यह राशि केंद्रीय बजट में किए गए प्रावधान से करीब 70 हजार करोड़ रुपये ज्यादा होगी। बढ़ती ईंधन कीमतों और एलपीजी पर सरकार व तेल कंपनियों की ओर से उठाए जा रहे अतिरिक्त बोझ के कारण सब्सिडी खर्च में भारी वृद्धि का अनुमान लगाया जा रहा है।
बजट में सरकार ने एलपीजी सब्सिडी के लिए करीब 30 हजार करोड़ रुपये का प्रावधान किया था, लेकिन मौजूदा परिस्थितियों को देखते हुए यह खर्च एक लाख करोड़ रुपये के पार जा सकता है। इससे सरकार के राजकोष पर अतिरिक्त दबाव बढ़ने की संभावना है।
पीएल कैपिटल की एक रिपोर्ट के अनुसार, वर्तमान समय में तेल कंपनियों को प्रति एलपीजी सिलेंडर करीब 490 रुपये का नुकसान उठाना पड़ रहा है। ईंधन कीमतों में बढ़ोतरी का पूरा भार उपभोक्ताओं पर डालने के बजाय सरकार और तेल कंपनियां मिलकर इस नुकसान को वहन कर रही हैं। इसी वजह से सब्सिडी का खर्च लगातार बढ़ रहा है।
रिपोर्ट में बताया गया है कि चालू वित्त वर्ष के शुरुआती दो महीनों में ही सब्सिडी खर्च में बड़ा उछाल देखने को मिला है। अप्रैल और मई 2026 के दौरान मुख्य सब्सिडी खर्च बढ़कर 755.40 अरब रुपये पहुंच गया, जबकि पिछले साल इसी अवधि में यह आंकड़ा 512.50 अरब रुपये था। यानी सालाना आधार पर सब्सिडी खर्च में करीब 47 प्रतिशत की बढ़ोतरी दर्ज की गई है।
आंकड़ों के अनुसार, इस अवधि में खाद्य सब्सिडी का खर्च भी तेजी से बढ़ा है। पिछले वर्ष अप्रैल-मई में खाद्य सब्सिडी 279.90 अरब रुपये थी, जो इस साल बढ़कर 408 अरब रुपये हो गई। इसमें करीब 46 प्रतिशत की वृद्धि दर्ज की गई है।
इसके अलावा पोषक तत्व आधारित उर्वरक सब्सिडी में भी बढ़ोतरी हुई है। पिछले साल अप्रैल-मई में यह खर्च 43.1 अरब रुपये था, जो इस साल बढ़कर 60.10 अरब रुपये हो गया। वहीं, पेट्रोलियम सब्सिडी में भी वृद्धि दर्ज की गई है। पिछले साल इस अवधि में पेट्रोलियम सब्सिडी लगभग 280 करोड़ रुपये थी, जबकि इस साल इसमें बढ़ोतरी हुई है।
विशेषज्ञों के अनुसार, सब्सिडी खर्च में बढ़ोतरी के पीछे वैश्विक परिस्थितियां भी जिम्मेदार हैं। अंतरराष्ट्रीय स्तर पर जारी तनाव, युद्ध जैसी परिस्थितियां और कच्चे तेल की कीमतों में उतार-चढ़ाव का असर ऊर्जा क्षेत्र पर पड़ रहा है। सरकार को उपभोक्ताओं पर अतिरिक्त बोझ डालने से बचने के लिए सब्सिडी व्यवस्था को बनाए रखना पड़ रहा है।
पीएल कैपिटल की रिपोर्ट में यह भी अनुमान लगाया गया है कि चालू वित्त वर्ष की पहली छमाही में सरकार पूंजीगत खर्च को लेकर सतर्क रुख अपना सकती है। सरकार राजकोषीय घाटे को नियंत्रण में रखने के लिए अधिक कर्ज लेने से बचने की कोशिश कर सकती है।
रिपोर्ट के अनुसार, मई 2026 तक सरकार का पूंजीगत खर्च सालाना आधार पर 13 प्रतिशत बढ़कर करीब 2.5 लाख करोड़ रुपये पहुंच गया था। हालांकि, बढ़ते सब्सिडी खर्च के कारण सरकार को विकास योजनाओं और वित्तीय प्रबंधन के बीच संतुलन बनाना होगा।
एलपीजी सब्सिडी में यह वृद्धि सरकार के लिए एक बड़ी आर्थिक चुनौती बन सकती है। एक ओर जहां आम लोगों को राहत देने के लिए ईंधन कीमतों को नियंत्रित रखना जरूरी है, वहीं दूसरी ओर बढ़ता सब्सिडी बिल सरकारी खजाने पर दबाव डाल रहा है। आने वाले महीनों में सरकार की नीति और अंतरराष्ट्रीय बाजार की स्थिति यह तय करेगी कि सब्सिडी खर्च किस स्तर तक पहुंचता है।