दिल्ली। राजधानी दिल्ली में एक ऐसा घटनाक्रम सामने आया है, जिसने पुलिस और पत्रकारों के बीच संबंधों को लेकर नई चर्चा छेड़ दी है। पिछले करीब तीन महीनों से जिन प्रदर्शनकारियों को रोकने की जिम्मेदारी दिल्ली पुलिस निभा रही थी, सोमवार को वही पुलिसकर्मी खुद धरने पर बैठ गए। इस बार पुलिसकर्मी अपनी मांगों और विभागीय फैसले के विरोध में प्रदर्शन करते नजर आए।
जानकारी के मुताबिक, दिल्ली में वकीलों की मांग के बाद एक ACP और एक इंस्पेक्टर का तबादला कर दिया गया। इस फैसले से नाराज पुलिसकर्मियों ने विरोध प्रदर्शन शुरू कर दिया। प्रदर्शनकारी पुलिसकर्मी तबादले की कार्रवाई का विरोध कर रहे थे और इसे लेकर अपनी नाराजगी जाहिर कर रहे थे। उनका कहना था कि इस तरह के फैसलों को लेकर पुलिसकर्मियों की बात भी सुनी जानी चाहिए।
इस घटनाक्रम का सबसे दिलचस्प पहलू पत्रकारों की भूमिका रही। बताया जा रहा है कि पिछले करीब तीन महीनों से दिल्ली पुलिस कई बार प्रदर्शन स्थलों पर पत्रकारों को कवरेज करने से रोकती रही थी। लेकिन सोमवार को हालात बदले हुए नजर आए। जिन पत्रकारों को पहले प्रदर्शन कवर करने से रोका जाता था, वही पत्रकार इस बार पुलिसकर्मियों के धरने की कवरेज करते दिखाई दिए।
पत्रकारों ने प्रदर्शनकारी पुलिसकर्मियों की बात को प्रमुखता से उठाया और उनकी मांगों को सामने लाने का प्रयास किया। इस घटनाक्रम ने अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता, मीडिया की भूमिका और विरोध प्रदर्शन के दौरान पत्रकारों की पहुंच जैसे सवालों को फिर चर्चा में ला दिया है। हालांकि, ACP और इंस्पेक्टर के तबादले के पीछे की पूरी प्रशासनिक परिस्थितियों और पुलिसकर्मियों की विस्तृत मांगों को लेकर आधिकारिक पक्ष सामने आना बाकी है।
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