लैफटिस की सत्ता खत्म, लेकिन अंडे बरकरार
लेफ्ट के किताबों वाले स्टॉल का विरोध, वायरल वीडियो पर चर्चा
कोलकाता। पश्चिम बंगाल में दुर्गा पूजा के दौरान वामपंथी दलों द्वारा लगाए जा रहे किताबों के स्टॉल को लेकर विवाद बढ़ गया है। कोलकाता के नागरबाजार इलाके का बताया जा रहा एक वीडियो सोशल मीडिया पर चर्चा में है। वीडियो के साथ दावा किया जा रहा है कि स्थानीय लोगों और युवाओं ने वामपंथी साहित्य बेचने वाले स्टॉल का विरोध किया। हालांकि, इस विशेष वीडियो की जगह, तारीख और पूरे घटनाक्रम की स्वतंत्र पुष्टि नहीं हो सकी है।
किताबों में 'कश्मीर मांगे आजादी' लिखे होने का दावा
सोशल मीडिया पर वायरल दावों के मुताबिक, कुछ वामपंथी बुक स्टॉल पर ऐसी किताबें रखी गई थीं, जिनमें 'कश्मीर मांगे आजादी' जैसे विचारों का उल्लेख था। इसी को लेकर स्थानीय लोगों में नाराजगी होने और स्टॉल संचालकों से सवाल पूछे जाने की बात कही जा रही है। हालांकि, संबंधित किताबों के नाम, उनकी वास्तविक सामग्री और नागरबाजार में कथित विरोध के कारणों की आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई है।
दुर्गा पूजा के दौरान कई जगह विवाद
पश्चिम बंगाल में वामपंथी दलों के बुक स्टॉल पर विवाद की अन्य घटनाएं सामने आई हैं। दक्षिण कोलकाता के ढाकुरिया इलाके में सीपीआई (एमएल) लिबरेशन के एक बुक स्टॉल में तोड़फोड़ और कार्यकर्ताओं से मारपीट की शिकायत दर्ज हुई थी। रिपोर्ट के अनुसार, इस घटना में 88 वर्षीय वामपंथी कार्यकर्ता अमलेंदु चौधरी सहित कुछ लोग घायल हुए। वामपंथी दलों ने भाजपा समर्थकों पर हमले का आरोप लगाया, जबकि भाजपा ने आरोपों से इनकार किया।
दशकों पुरानी है किताबों के स्टॉल लगाने की परंपरा
बंगाल में दुर्गा पूजा पंडालों के आसपास राजनीतिक और वैचारिक साहित्य के स्टॉल लगाने की परंपरा कई दशक पुरानी है। इसलिए यह दावा सही नहीं है कि वामपंथी दलों ने 15 साल बाद पहली बार इस तरह के स्टॉल लगाने शुरू किए हैं। इस बार स्टॉल लगाने की अनुमति को लेकर भी विवाद हुआ। उत्तर 24 परगना के नैहाटी और बनगांव में अनुमति नहीं मिलने के बाद मामला कलकत्ता हाईकोर्ट तक पहुंचा।
राजनीतिक आरोप-प्रत्यारोप तेज
वामपंथी नेताओं ने आरोप लगाया है कि उनके साहित्यिक कार्यक्रमों और बुक स्टॉल को निशाना बनाया जा रहा है। दूसरी ओर, भाजपा नेतृत्व ने हिंसा में पार्टी की संलिप्तता से इनकार किया है। इस विवाद ने धार्मिक उत्सवों के दौरान राजनीतिक गतिविधियों, अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता और कानून-व्यवस्था को लेकर नई बहस छेड़ दी है। फिलहाल नागरबाजार के कथित वीडियो में दिखाई गई घटना की पुष्टि और संबंधित पक्षों की आधिकारिक प्रतिक्रिया सामने आना बाकी है।