नई दिल्ली: भारत और संयुक्त अरब अमीरात (UAE) ने अपने रणनीतिक रिश्तों को और मजबूत करने तथा पश्चिम एशिया में शांति बनाए रखने के लिए आपसी सहयोग जारी रखने पर जोर दिया है। विदेश मंत्री डॉ. एस. जयशंकर ने मंगलवार को मुंबई में UAE के उप प्रधानमंत्री और विदेश मंत्री शेख अब्दुल्ला बिन जायद अल नाहयान के साथ मुलाकात की। बैठक में क्षेत्रीय सुरक्षा, व्यापार, ऊर्जा, निवेश और दोनों देशों के बीच बढ़ते सहयोग जैसे महत्वपूर्ण मुद्दों पर चर्चा हुई।
शेख अब्दुल्ला बिन जायद अल नाहयान सोमवार रात दो दिवसीय भारत यात्रा पर मुंबई पहुंचे थे। मंगलवार को हुई बैठक के दौरान जयशंकर ने भारत और UAE के संबंधों में आए बदलाव का उल्लेख किया। उन्होंने कहा कि एक दशक से अधिक समय से लगातार बढ़ते सहयोग ने दोनों देशों की साझेदारी को व्यापक रणनीतिक स्तर तक पहुंचाया है।
जयशंकर के मुताबिक, इस वर्ष भारत और UAE के शीर्ष नेतृत्व के बीच भी लगातार संपर्क और संवाद देखने को मिला है। दोनों देशों के बीच राजनीतिक रिश्तों के साथ-साथ आर्थिक और सुरक्षा सहयोग भी आगे बढ़ रहा है। बैठक को इसी साझेदारी को आगे बढ़ाने के प्रयास के तौर पर देखा जा रहा है।
बैठक ऐसे समय हुई
यह बैठक ऐसे समय हुई है, जब पश्चिम एशिया और खाड़ी क्षेत्र में सुरक्षा को लेकर चिंताएं बनी हुई हैं। क्षेत्र में जारी तनाव और सऊदी अरब पर हूती विद्रोहियों के हमलों से जुड़े मुद्दे भी क्षेत्रीय सुरक्षा की चुनौतियों को बढ़ाते हैं।
जयशंकर ने कहा कि मौजूदा हालात चिंता पैदा करते हैं और क्षेत्र में शांति स्थापित करने के लिए बातचीत तथा कूटनीति को प्राथमिकता दी जानी चाहिए। उन्होंने स्पष्ट किया कि भारत ऐसे प्रयासों का समर्थन करता रहेगा, जिनसे तनाव कम करने और स्थिरता बनाए रखने में मदद मिले। भारत और UAE इस दिशा में मिलकर काम जारी रखने के पक्ष में हैं।
भारत की ऊर्जा जरूरतों और क्षेत्रीय व्यापार...
विदेश मंत्री ने कहा कि भारत व्यापार, ऊर्जा और उर्वरकों की आपूर्ति का प्रवाह स्वतंत्र, सुरक्षित और बिना बाधा जारी रखने के पक्ष में है। पश्चिम एशिया में तनाव का असर इन क्षेत्रों पर पड़ने की आशंका के बीच आपूर्ति व्यवस्था का सुरक्षित रहना दोनों देशों के लिए महत्वपूर्ण है।
भारत की ऊर्जा जरूरतों और क्षेत्रीय व्यापार को देखते हुए खाड़ी क्षेत्र में स्थिरता का विशेष महत्व है। ऐसे में दोनों देशों के बीच संवाद और सहयोग से आर्थिक गतिविधियों को सुचारु बनाए रखने के प्रयासों को भी बल मिल सकता है।
जयशंकर ने UAE में रहने वाले भारतीय समुदाय की सुरक्षा और भलाई के लिए शेख अब्दुल्ला तथा वहां के नेतृत्व का आभार भी जताया। UAE में बड़ी संख्या में भारतीय नागरिक रहते और काम करते हैं। इसलिए उनकी सुरक्षा, सुविधाएं और हित भारत-UAE संबंधों का अहम हिस्सा हैं।
100 अरब डॉलर से ज्यादा हुआ द्विपक्षीय व्यापार
बैठक में दोनों देशों के आर्थिक रिश्तों पर भी विशेष ध्यान दिया गया। जयशंकर ने व्यापक आर्थिक साझेदारी समझौते (CEPA) का जिक्र करते हुए कहा कि वैश्विक और क्षेत्रीय चुनौतियों के बावजूद भारत तथा UAE के बीच आर्थिक सहयोग आगे बढ़ रहा है।
साल 2022 में लागू हुए इस समझौते के बाद दोनों देशों का द्विपक्षीय व्यापार 100 अरब अमेरिकी डॉलर के आंकड़े को पार कर चुका है। इसके साथ ही एक-दूसरे के यहां निवेश करने की गतिविधियों में भी बढ़ोतरी हुई है। CEPA का उद्देश्य दोनों देशों के बीच व्यापार को आसान बनाना और कारोबारी अवसरों का विस्तार करना है।
जयशंकर ने कहा ...
जयशंकर ने कहा कि भारत और UAE के बीच सहयोग अब केवल व्यापार तक सीमित नहीं है। रक्षा, ऊर्जा और तकनीक जैसे क्षेत्रों में भी साझेदारी को रणनीतिक रूप दिया जा रहा है। इसके अलावा सांस्कृतिक संबंधों और दोनों देशों के लोगों के बीच संपर्क को मजबूत करने पर भी काम हुआ है।
स्थानीय मुद्राओं में लेनदेन की व्यवस्था और द्विपक्षीय निवेश संधि को भी आर्थिक रिश्तों के विस्तार में अहम माना जा रहा है। इन पहलों से कारोबार और निवेश के लिए नए अवसर बन सकते हैं।
कुल मिलाकर, मुंबई में हुई यह बैठक भारत और UAE के बीच राजनीतिक संवाद, आर्थिक सहयोग और क्षेत्रीय शांति से जुड़े मुद्दों पर निरंतर संपर्क का संकेत देती है। दोनों देशों के लिए चुनौती यह रहेगी कि क्षेत्रीय तनाव के बीच व्यापार, ऊर्जा आपूर्ति और रणनीतिक साझेदारी की गति बनाए रखी जाए।
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