वॉशिंगटन। विदेश मंत्री एस. जयशंकर ने न्यूयॉर्क में भारत-अमेरिका संबंधों, सीमापार आतंकवाद और बदलती वैश्विक व्यवस्था को लेकर अहम टिप्पणी की। उन्होंने कहा कि भारत लंबे समय से पड़ोसी देश से आने वाले आतंकवाद को गंभीर सुरक्षा चुनौती के रूप में देखता है और इस मुद्दे पर सहयोगी देशों की संवेदनशीलता द्विपक्षीय संबंधों को प्रभावित करती है।
न्यूयॉर्क में एशिया सोसाइटी के एक कार्यक्रम में जयशंकर ने कहा कि भारत के लिए आतंकवाद केवल विदेश नीति का मुद्दा नहीं, बल्कि राष्ट्रीय सुरक्षा से जुड़ी प्रमुख चिंता है। उन्होंने कहा कि बहुत कम देशों को अपने पड़ोसी से उस तरह के आतंकवाद का सामना करना पड़ा है, जैसा भारत ने दशकों तक झेला है।
जयशंकर ने स्पष्ट किया कि जब कोई साझेदार भारत की प्रमुख सुरक्षा चिंताओं को पर्याप्त महत्व नहीं देता, तो उसका असर आपसी संबंधों पर पड़ना स्वाभाविक है। हाल के दिनों में उन्होंने संयुक्त राष्ट्र के मंच से भी पाकिस्तान पर आतंकवाद को लेकर कड़ा रुख अपनाया और आतंकवाद को सामान्य बनाने की कोशिशों को अस्वीकार्य बताया।
वैश्विक कूटनीति में आया बदलाव
जयशंकर ने कहा कि अंतरराष्ट्रीय राजनीति अब पहले की तुलना में अधिक खुली और बहुध्रुवीय हो रही है। उनके मुताबिक पहले बड़े देश अपने साझेदारों से सीमित विकल्प रखने की अपेक्षा करते थे, लेकिन मौजूदा दौर में अलग-अलग देश अपने हितों के आधार पर कई देशों के साथ समानांतर संबंध बना रहे हैं।
उन्होंने कहा कि व्यापार और कूटनीति में भी वन-टू-वन बातचीत का चलन बढ़ रहा है। देशों के बीच पुराने खेमों की सीमाएं कमजोर हो रही हैं और राष्ट्रीय हितों को ध्यान में रखते हुए नए समीकरण बनाए जा रहे हैं।
जयशंकर ने दुनिया में बढ़ती बहुध्रुवीयता का भी उल्लेख किया। उन्होंने कहा कि वर्तमान वैश्विक व्यवस्था में तीखी प्रतिस्पर्धा के साथ गहरी आर्थिक निर्भरता भी मौजूद है। खाद्य, ईंधन, उर्वरक और वित्त से जुड़े संकटों ने कई देशों के सामने नई चुनौतियां पैदा की हैं। हाल के अपने संबोधनों में भी जयशंकर ने इन ‘4F’ चुनौतियों और वैश्विक व्यवस्था में बढ़ती अनिश्चितता पर जोर दिया है।
भारत-अमेरिका रिश्तों पर क्या बोले
भारत-अमेरिका संबंधों को लेकर जयशंकर ने कहा कि दोनों देशों की साझेदारी में आगे बढ़ने की काफी संभावनाएं हैं, लेकिन कुछ संवेदनशील मुद्दों को समझना भी जरूरी है। भारत के लिए आतंकवाद ऐसी ही प्रमुख चिंता है।
उन्होंने कहा कि भारत चाहता है कि अमेरिका के साथ संबंध लगातार मजबूत हों। इसके साथ ही दोनों देशों को उन मुद्दों पर यथार्थवादी तरीके से काम करना होगा, जहां मतभेद या अलग-अलग प्राथमिकताएं मौजूद हैं।
हाल के दिनों में भारत और अमेरिका के बीच व्यापार और रूस से जुड़े प्रतिबंधों जैसे मुद्दों पर भी बातचीत हुई है। सितंबर में जयशंकर और अमेरिकी विदेश मंत्री मार्को रुबियो के बीच न्यूयॉर्क में मुलाकात हुई थी, जिसमें भारत ने अमेरिकी प्रतिबंध संबंधी कानून पर अपनी चिंताएं रखी थीं।
जयशंकर ने यह संकेत दिया कि बदलती वैश्विक व्यवस्था में भारत अपनी रणनीतिक स्वायत्तता बनाए रखते हुए अलग-अलग देशों के साथ सहयोग बढ़ाना चाहता है। उनके अनुसार आज की दुनिया में किसी एक ध्रुव पर निर्भर रहने के बजाय कई साझेदारियों के साथ आगे बढ़ना वैश्विक राजनीति की नई वास्तविकता बन रही है।