ट्रंप पर भड़कीं इटली की प्रधानमंत्री मेलोनी, बोलीं- “झूठ की भी हद होती है
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New Delhi. नई दिल्ली। अमेरिका और उसके पारंपरिक सहयोगी देशों के बीच बढ़ते तनाव के बीच इटली की प्रधानमंत्री जॉर्जिया मेलोनी ने अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के बयानों पर तीखा और सीधा हमला बोला है। मेलोनी ने ट्रंप के दावों को पूरी तरह गलत और “गढ़ी हुई कहानी” बताते हुए कहा कि ऐसे बयान सुनकर उन्हें हैरानी और दुख होता है कि अमेरिका का राष्ट्रपति अपने ही सहयोगी देशों के बारे में इस तरह की बातें कर रहा है। मेलोनी ने स्पष्ट शब्दों में कहा कि ट्रंप के बयान तथ्यों से दूर हैं और यह पहली बार नहीं है जब इस तरह की स्थिति सामने आई है। उन्होंने कहा, “यह बेहद शर्मनाक है।” इटली की प्रधानमंत्री ने सवाल उठाया कि जो सख्ती ट्रंप अपने मित्र देशों के खिलाफ दिखाते हैं, वही रुख अमेरिका के विरोधियों और वैश्विक प्रतिद्वंद्वियों के सामने क्यों नहीं दिखता।
अपने बयान की शुरुआत में मेलोनी ने कहा, “कुछ बातों का तुरंत जवाब देना जरूरी होता है। डोनाल्ड ट्रंप के बयान पूरी तरह से मनगढ़ंत और झूठे हैं। सच कहूं तो मैं बेहद हैरान और स्तब्ध हूं।” उन्होंने आगे कहा कि सहयोगी देशों पर दबाव बनाना आसान होता है, लेकिन असली नेतृत्व वही है जो विरोधियों के सामने मजबूती दिखाए। मेलोनी ने अपने बयान में यह भी साफ संदेश दिया कि इटली किसी भी तरह के दबाव में आने वाला देश नहीं है। उन्होंने कहा, “एक बात उन्हें याद रखनी चाहिए—मैं और इटली कभी भीख नहीं मांगते।” उनके इस बयान को कूटनीतिक रूप से बेहद सख्त प्रतिक्रिया माना जा रहा है।
इसी विवाद के बीच इटली के उप प्रधानमंत्री और विदेश मंत्री एंटोनियो तजानी ने भी ट्रंप की टिप्पणियों की कड़ी आलोचना की है। उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री मेलोनी के खिलाफ कही गई बातें केवल उनका नहीं, बल्कि पूरे इटली का अपमान हैं। इसी वजह से उन्होंने 21 और 22 जून को प्रस्तावित अपनी अमेरिका यात्रा रद्द करने का फैसला लिया है। यह पूरा विवाद तब और बढ़ गया जब डोनाल्ड ट्रंप ने इटली की प्रधानमंत्री को लेकर एक बयान दिया। ट्रंप ने दावा किया कि जॉर्जिया मेलोनी ने जी7 शिखर सम्मेलन के दौरान उनके साथ तस्वीर खिंचवाने के लिए अनुरोध किया था। उन्होंने कहा कि उन्हें मेलोनी पर दया आ गई, इसलिए उन्होंने फोटो खिंचवा ली। ट्रंप ने यह भी कहा कि उन्हें उनसे बातचीत करने की कोई जरूरत नहीं थी।
ट्रंप के इस बयान को इटली में अपमानजनक और गलत बताया जा रहा है। मेलोनी ने साफ किया है कि इस तरह के बयान न केवल व्यक्तिगत स्तर पर गलत हैं, बल्कि दो देशों के रिश्तों को भी प्रभावित कर सकते हैं। विशेषज्ञों के अनुसार, यह विवाद ऐसे समय सामने आया है जब पश्चिमी देशों के भीतर पहले से ही कई मुद्दों पर मतभेद चल रहे हैं। नाटो सहयोग, आर्थिक नीतियों और वैश्विक सुरक्षा जैसे विषयों पर अमेरिका और यूरोपीय देशों के बीच पहले से तनाव की स्थिति बनी हुई है।
मेलोनी के सख्त रुख के बाद यह माना जा रहा है कि इटली अमेरिका के साथ अपने कूटनीतिक रिश्तों को लेकर और अधिक स्पष्ट और स्वतंत्र नीति अपनाने की दिशा में आगे बढ़ सकता है। वहीं इस पूरे मामले ने अंतरराष्ट्रीय राजनीति में एक नई बहस को जन्म दे दिया है कि सहयोगी देशों के बीच सार्वजनिक बयानबाजी किस हद तक उचित है। इटली सरकार के भीतर भी इस मुद्दे पर एकजुट प्रतिक्रिया देखने को मिल रही है, जहां सभी प्रमुख नेता मेलोनी के बयान का समर्थन कर रहे हैं और ट्रंप की टिप्पणियों को अनुचित बता रहे हैं। इस घटनाक्रम ने अमेरिका और इटली के बीच संबंधों में एक नया तनाव पैदा कर दिया है, जिसके आगे और बढ़ने की संभावना से इनकार नहीं किया जा सकता।