क्या धरती पहले से ज्यादा कांप रही है जानें भूकंप आने की वजह
धरती के कांपने का राज क्या है भूकंप क्यों आते हैं
नई दिल्ली: जब भी दुनिया के किसी हिस्से में लगातार भूकंप की खबरें सामने आती हैं तो लोगों के मन में एक सवाल उठता है कि क्या धरती पहले से ज्यादा कांपने लगी है? क्या भूकंपों की संख्या वास्तव में बढ़ गई है? वैज्ञानिकों के अनुसार ऐसा मानना पूरी तरह सही नहीं है। धरती पर भूकंप हमेशा से आते रहे हैं और उनकी संख्या में होने वाले छोटे-मोटे उतार-चढ़ाव प्राकृतिक प्रक्रिया का हिस्सा हैं। लंबे समय में वैश्विक स्तर पर भूकंपीय गतिविधि में लगातार बढ़ोतरी का कोई स्पष्ट वैज्ञानिक प्रमाण नहीं मिला है।
धरती की ऊपरी परत कई बड़ी चट्टानी प्लेटों से बनी है, जिन्हें टेक्टोनिक प्लेट कहा जाता है। ये प्लेटें लगातार बहुत धीमी गति से एक-दूसरे के संपर्क में रहती हैं। कहीं ये प्लेटें आपस में टकराती हैं, कहीं एक-दूसरे से दूर जाती हैं और कहीं एक-दूसरे के किनारे से खिसकती हैं। इन प्लेटों की हलचल के कारण धरती के अंदर तनाव यानी ऊर्जा जमा होती रहती है। जब यह तनाव अचानक रिलीज होता है तो जमीन में कंपन पैदा होता है, जिसे हम भूकंप कहते हैं।
भूकंप आने की मुख्य वजह क्या है?
भूकंप का सबसे बड़ा कारण धरती की प्लेटों का खिसकना है। जब दो प्लेटों के बीच घर्षण बढ़ जाता है तो वे कुछ समय के लिए एक-दूसरे को रोक लेती हैं। लेकिन अंदर जमा ऊर्जा लगातार बढ़ती रहती है। एक सीमा के बाद चट्टानें टूटती हैं और जमा ऊर्जा तरंगों के रूप में बाहर निकलती है। यही ऊर्जा धरती को हिलाने लगती है। इसके अलावा कुछ भूकंप ज्वालामुखी गतिविधियों, भूमिगत विस्फोटों और मानव गतिविधियों से भी जुड़े हो सकते हैं। हालांकि दुनिया के अधिकांश बड़े भूकंप प्राकृतिक टेक्टोनिक गतिविधियों के कारण ही आते हैं।
क्या सच में बढ़ गए हैं भूकंप?
वैज्ञानिकों का कहना है कि आज भूकंप ज्यादा महसूस होने का एक कारण यह भी है कि दुनिया में निगरानी की तकनीक पहले से बेहतर हो गई है। अब छोटे से छोटे भूकंप को भी आधुनिक उपकरणों से रिकॉर्ड किया जा सकता है। इसके अलावा सोशल मीडिया और 24 घंटे चलने वाले समाचार माध्यमों के कारण किसी भी हिस्से में आए भूकंप की जानकारी तुरंत दुनिया तक पहुंच जाती है।
अमेरिकी भूवैज्ञानिक सर्वेक्षण (USGS) के अनुसार भूकंपों की संख्या में कुछ समय के लिए बढ़ोतरी या कमी सामान्य प्राकृतिक उतार-चढ़ाव हो सकती है। केवल कुछ बड़े भूकंपों के लगातार आने से यह निष्कर्ष नहीं निकाला जा सकता कि पूरी धरती ज्यादा कांप रही है।
हाल के बड़े भूकंपों से क्यों बढ़ी चिंता?
दुनिया के अलग-अलग हिस्सों में जब कुछ समय के अंतराल में बड़े भूकंप आते हैं तो लोगों को लगता है कि इनके बीच कोई संबंध है। लेकिन वैज्ञानिकों के अनुसार अलग-अलग क्षेत्रों में आने वाले ज्यादातर भूकंप एक-दूसरे से जुड़े नहीं होते। वे अपने-अपने क्षेत्र की प्लेट गतिविधियों और फॉल्ट लाइनों के कारण आते हैं।
उदाहरण के तौर पर किसी इलाके में प्लेटों की हलचल लंबे समय से दबाव बना रही होती है और अचानक वहां ऊर्जा निकलने पर बड़ा भूकंप आ सकता है। दूसरे देश में उसी समय आया भूकंप अक्सर केवल संयोग होता है।
भूकंप इतना खतरनाक क्यों बन जाता है?
भूकंप की ताकत के अलावा कई अन्य चीजें भी नुकसान तय करती हैं। किसी शहर की इमारतों की मजबूती, जमीन की गुणवत्ता, जनसंख्या घनत्व और आपदा तैयारी महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं। कमजोर निर्माण वाले क्षेत्रों में मध्यम तीव्रता का भूकंप भी भारी नुकसान पहुंचा सकता है, जबकि मजबूत भवन नियमों वाले देशों में बड़े भूकंप के बावजूद नुकसान कम किया जा सकता है। वैज्ञानिकों के अनुसार भूकंप को रोका नहीं जा सकता, लेकिन बेहतर निर्माण और तैयारी से इसके प्रभाव को काफी कम किया जा सकता है।
क्या भूकंप की भविष्यवाणी संभव है?
वर्तमान विज्ञान के पास ऐसा कोई तरीका नहीं है जिससे यह सटीक बताया जा सके कि किसी खास तारीख और समय पर कहां बड़ा भूकंप आएगा। वैज्ञानिक भूकंप संभावित क्षेत्रों की पहचान कर सकते हैं और जोखिम का आकलन कर सकते हैं, लेकिन निश्चित भविष्यवाणी अभी संभव नहीं है। हालांकि वैज्ञानिक अर्ली वार्निंग सिस्टम पर काम कर रहे हैं। ये सिस्टम भूकंप शुरू होने के बाद शुरुआती संकेत पकड़कर कुछ सेकंड से लेकर कुछ समय पहले चेतावनी दे सकते हैं, जिससे ट्रेन रोकने, गैस लाइन बंद करने और लोगों को सुरक्षित स्थान पर जाने में मदद मिल सकती है।
भारत में क्यों आते हैं भूकंप?
भारत का बड़ा हिस्सा भूकंपीय दृष्टि से सक्रिय क्षेत्रों में आता है। खासकर हिमालय क्षेत्र में भारतीय प्लेट और यूरेशियन प्लेट के टकराव के कारण भूकंप का खतरा अधिक रहता है। उत्तराखंड, हिमाचल प्रदेश, जम्मू-कश्मीर और पूर्वोत्तर भारत के कई क्षेत्र भूकंप की दृष्टि से संवेदनशील माने जाते हैं। इसके अलावा दिल्ली-NCR सहित कई मैदानी इलाके भी भूकंपीय खतरे वाले क्षेत्रों में आते हैं, क्योंकि यहां आसपास सक्रिय फॉल्ट लाइनें मौजूद हैं।
भूकंप के समय क्या करें?
भूकंप आने पर घबराने के बजाय सुरक्षित कदम उठाना जरूरी है। घर के अंदर हों तो मजबूत मेज के नीचे छिपें, खिड़कियों और भारी सामान से दूर रहें। लिफ्ट का इस्तेमाल न करें। बाहर हों तो इमारतों, बिजली के खंभों और पेड़ों से दूर खुले स्थान पर चले जाएं। कुल मिलाकर धरती पहले से ज्यादा कांप रही है, ऐसा वैज्ञानिक आंकड़े साबित नहीं करते। भूकंप पृथ्वी की प्राकृतिक प्रक्रिया है, जो करोड़ों वर्षों से चल रही है। लेकिन बढ़ती आबादी, बड़े शहरों और कमजोर निर्माण के कारण आज इनके प्रभाव ज्यादा गंभीर दिखाई देते हैं। इसलिए भूकंप को रोकने के बजाय तैयारी, सुरक्षित निर्माण और जागरूकता ही सबसे बड़ा बचाव है।