ईरान ने ऊर्जा ढांचा बहाली तेज की, 60 दिनों में 80% क्षमता बहाल करने का लक्ष्य

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Update: 2026-04-12 16:49 GMT
New Delhi. नई दिल्ली। अमेरिका और इजरायल के हालिया हमलों से प्रभावित ईरान ने अपने ऊर्जा क्षेत्र को फिर से मजबूत करने के लिए तेजी से पुनर्निर्माण कार्य शुरू कर दिया है। देश ने अगले 1 से 2 महीनों के भीतर अपनी क्षतिग्रस्त रिफाइनिंग और डिस्ट्रीब्यूशन क्षमता का लगभग 70 से 80 प्रतिशत तक बहाल करने का लक्ष्य तय किया है। ईरान के ऊर्जा क्षेत्र को हाल के संघर्ष में बड़ा नुकसान पहुंचा था, जिसमें रिफाइनरियां, ऑयल डिपो, पाइपलाइन नेटवर्क और गैस प्रोसेसिंग यूनिट्स प्रभावित हुई थीं। इन हमलों के कारण देश की तेल और गैस उत्पादन क्षमता पर सीधा असर पड़ा, जिससे घरेलू आपूर्ति और निर्यात दोनों प्रभावित हुए।

ईरान सरकार के वरिष्ठ अधिकारियों के अनुसार, अब मरम्मत कार्य युद्धस्तर पर शुरू कर दिया गया है। डिप्टी ऑयल मिनिस्टर मोहम्मद सादिक अजीमीफर ने अंतरराष्ट्रीय समाचार एजेंसी रॉयटर्स को बताया कि कई महत्वपूर्ण ऊर्जा ढांचों पर तकनीकी टीमें लगातार काम कर रही हैं और चरणबद्ध तरीके से उत्पादन को फिर से सामान्य करने की प्रक्रिया शुरू हो चुकी है। उन्होंने कहा कि ईरान का लक्ष्य आने वाले 60 दिनों में ऊर्जा आपूर्ति प्रणाली को युद्ध से पहले के स्तर के करीब लाना है। प्रारंभिक चरण में रिफाइनिंग क्षमता को बहाल किया जा रहा है, जिसके बाद डिस्ट्रीब्यूशन नेटवर्क और अन्य सप्लाई चैनल को धीरे-धीरे सक्रिय किया जाएगा।

अधिकारियों के अनुसार, लवन रिफाइनरी का एक महत्वपूर्ण हिस्सा लगभग 10 दिनों के भीतर फिर से चालू किए जाने की संभावना है। इसके बाद अन्य रिफाइनरियों और वितरण इकाइयों को भी क्रमबद्ध तरीके से शुरू किया जाएगा। सरकार का मानना है कि यदि मरम्मत कार्य तय समय पर पूरा होता है, तो देश की ऊर्जा आपूर्ति प्रणाली काफी हद तक स्थिर हो सकती है। हालांकि, अधिकारियों ने यह भी स्पष्ट किया है कि पूरी तरह सामान्य स्थिति बहाल होने में समय लगेगा। यह इस बात पर निर्भर करेगा कि तकनीकी टीमों को क्षतिग्रस्त ढांचों की मरम्मत में कितनी सफलता मिलती है और नुकसान का आकलन किस स्तर का है।

ईरान के ऊर्जा मंत्रालय के अनुसार, युद्ध के दौरान कई प्रमुख तेल रिफाइनरियों को निशाना बनाया गया था। इसके अलावा ऑयल स्टोरेज डिपो और पाइपलाइन नेटवर्क को भी नुकसान पहुंचा, जिससे सप्लाई चेन बाधित हुई। कुछ गैस प्रोसेसिंग और ट्रांसमिशन सुविधाएं भी प्रभावित हुईं, जिसके कारण घरेलू गैस आपूर्ति पर असर देखा गया। ऊर्जा ढांचे पर हुए इन हमलों का उद्देश्य ईरान की आर्थिक क्षमता को कमजोर करना था, क्योंकि देश की अर्थव्यवस्था काफी हद तक तेल और गैस निर्यात पर निर्भर है। समुद्री टर्मिनल और निर्यात पोर्ट पर भी हमलों की रिपोर्ट सामने आई है, जिससे अंतरराष्ट्रीय बाजार में ईरान की सप्लाई क्षमता प्रभावित हुई।

अब सरकार और तकनीकी विशेषज्ञ मिलकर क्षतिग्रस्त ढांचे को फिर से खड़ा करने में जुटे हैं। कई जगहों पर आपात मरम्मत कार्य चल रहा है, जबकि कुछ स्थानों पर स्थायी पुनर्निर्माण की योजना बनाई गई है। तकनीकी टीमों को प्राथमिकता के आधार पर उन इकाइयों पर काम करने के निर्देश दिए गए हैं, जो देश की ऊर्जा आपूर्ति के लिए सबसे महत्वपूर्ण हैं। यदि ईरान अपने लक्ष्य के अनुसार 70 से 80 प्रतिशत क्षमता बहाल करने में सफल होता है, तो इसका असर वैश्विक तेल बाजार पर भी देखने को मिल सकता है। इससे अंतरराष्ट्रीय स्तर पर तेल की कीमतों और सप्लाई स्थिरता में कुछ सुधार की संभावना जताई जा रही है। फिलहाल ईरान सरकार का पूरा ध्यान ऊर्जा क्षेत्र को दोबारा मजबूत करने और उत्पादन क्षमता को स्थिर करने पर केंद्रित है। आने वाले दो महीने इस दृष्टि से बेहद अहम माने जा रहे हैं, क्योंकि इसी अवधि में यह तय होगा कि देश कितनी तेजी से अपने ऊर्जा सिस्टम को सामान्य स्थिति में ला पाता है।
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