NDA बैठक का न्योता: TMC के 20 बागी सांसदों वाले NCPI को....?
NCPI विलय पर टिकी नजरें
Delhi दिल्ली। तृणमूल कांग्रेस (TMC) से अलग हुए 20 बागी सांसदों वाले नेशनलिस्ट सिटिजन्स पार्टी ऑफ इंडिया (NCPI) को मंगलवार को होने वाली राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन (NDA) की बैठक में शामिल होने का निमंत्रण मिला है। इस घटनाक्रम को बंगाल की राजनीति और संसद के समीकरणों के लिहाज से काफी अहम माना जा रहा है। जानकारी के अनुसार, TMC से अलग हुए इन सांसदों ने लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला के सामने NCPI में अपने विलय को मान्यता देने के लिए याचिका दायर कर रखी है। बागी सांसदों को उम्मीद है कि स्पीकर जल्द ही इस मामले पर फैसला ले सकते हैं।
बताया जा रहा है कि इसी साल अप्रैल में हुए पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव के बाद तृणमूल कांग्रेस में बड़ी राजनीतिक हलचल देखने को मिली थी। पार्टी के 28 लोकसभा सांसदों में से 20 सांसदों ने पार्टी नेतृत्व को लेकर नाराजगी जताते हुए अलग रास्ता अपनाया और नेशनलिस्ट सिटिजन्स पार्टी ऑफ इंडिया (NCPI) में शामिल हो गए। यह पार्टी पश्चिम बंगाल के हावड़ा में पंजीकृत बताई जा रही है। एक बागी सांसद ने कहा कि NCPI में विलय को लेकर उनकी याचिका लोकसभा अध्यक्ष के पास लंबित है और उन्हें जल्द फैसले की उम्मीद है। यदि लोकसभा अध्यक्ष विलय को मंजूरी दे देते हैं तो ये सांसद संसद में NCPI के प्रतिनिधि के रूप में माने जाएंगे और NDA की बैठकों में भी इसी पहचान के साथ शामिल हो सकेंगे।
इस राजनीतिक बदलाव की झलक संसद के मानसून सत्र से पहले हुई सर्वदलीय बैठक में भी देखने को मिली। संसदीय कार्य मंत्री किरेन रिजिजू के निमंत्रण पर TMC के बागी सांसद सुदीप बंद्योपाध्याय और काकोली घोष दस्तीदार बैठक में शामिल हुए। उनके शामिल होने का विपक्षी दलों ने विरोध किया और कुछ समय के लिए वॉकआउट भी किया।
हालांकि, अभी अंतिम फैसला लोकसभा अध्यक्ष के हाथ में है। अगर NCPI में विलय को मंजूरी मिलती है तो यह तृणमूल कांग्रेस के इतिहास की सबसे बड़ी राजनीतिक टूट में से एक हो सकती है। वहीं, अगर विलय को मंजूरी नहीं मिलती है तो इन सांसदों की स्थिति TMC के बागी सांसदों के रूप में बनी रहेगी। राजनीतिक विशेषज्ञों की नजर अब लोकसभा अध्यक्ष के फैसले पर है, क्योंकि इसका असर संसद में दलों की संख्या और आगामी राजनीतिक रणनीतियों पर पड़ सकता है।