भारतीय अंतरिक्ष स्टेशन: 2028 में लॉन्च होगा पहला मॉड्यूल

Update: 2026-07-30 13:11 GMT
नई दिल्ली: सरकार ने गुरुवार को बताया कि भारत के पहले स्वदेशी अंतरिक्ष स्टेशन 'भारतीय अंतरिक्ष स्टेशन' (BAS) के लिए योजना बनाई गई है। इसमें पांच मॉड्यूल होंगे और इसे 2035 तक स्थापित करने का लक्ष्य है। इसके पहले मॉड्यूल, BAS-01 का विकास और लॉन्च 2028 तक किया जाएगा।
राज्यसभा में परमाणु ऊर्जा और अंतरिक्ष राज्य मंत्री डॉ. जितेंद्र सिंह ने बताया कि BAS-01 के लिए बेसलाइन डिज़ाइन रिव्यू और सिस्टम इंजीनियरिंग का काम पूरा हो चुका है, 31 बेसलाइन डिज़ाइन दस्तावेज़ जारी किए गए हैं, सब-सिस्टम डिज़ाइन का काम शुरू हो गया है और मानव अंतरिक्ष कार्यक्रम के लिए प्रोटोटाइप हार्डवेयर का विकास चल रहा है।
गगनयान कार्यक्रम के तहत, ह्यूमन रेटेड लॉन्च व्हीकल (HLVM3), ऑर्बिटल मॉड्यूल, क्रू एस्केप सिस्टम, ज़मीनी बुनियादी ढांचे की स्थापना, उड़ान संचालन और संचार नेटवर्क की स्थापना, और क्रू रिकवरी ऑपरेशन जैसे क्षेत्रों में नई प्रगति हुई है।
मंत्री ने बताया कि प्रीकर्सर मिशन TV-D1, IADT-01 और 02 पूरे हो चुके हैं और पहले बिना चालक दल वाले मिशन, G1 के लिए गतिविधियां एडवांस स्टेज में हैं।
इलेक्ट्रिकल और मैकेनिकल इंटरफेस सहित डॉकिंग सिस्टम पर काम किया गया है। रीफ्यूलिंग मैकेनिज्म के कॉन्सेप्ट डेमो मॉडल का सफलतापूर्वक प्रदर्शन किया गया है।
मानव अंतरिक्ष उड़ान की ज़रूरतों के लिए अन्य महत्वपूर्ण तकनीकों में फ्लाइट सूट, व्यू पोर्ट और क्रू सीट शामिल हैं। गगनयान मिशन के लिए इन्हें अभी बाहरी स्रोतों से लिया गया है।
मानव अंतरिक्ष कार्यक्रम के लिए प्रमुख महत्वपूर्ण तकनीकों की पहचान की गई है, जिनमें फ्लाइट सूट, व्यू पोर्ट, क्रू सीट और डॉकिंग तकनीक शामिल हैं। सरकार ने इन महत्वपूर्ण तकनीकों के स्वदेशी विकास को मंज़ूरी दे दी है।
मंत्री ने कहा, "ये पहल BAS के बाकी चार मॉड्यूल के स्वदेशी डिज़ाइन और विकास के लिए तकनीकी आधार तैयार करेंगी।"
उन्होंने कहा कि इससे मानव अंतरिक्ष उड़ान की महत्वपूर्ण तकनीकों में आत्मनिर्भरता आएगी, जिससे मानव अंतरिक्ष उड़ान के लिए ज़रूरी इनोवेशन और हाई-टेक्नोलॉजी मैन्युफैक्चरिंग को बढ़ावा मिलेगा।
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