भारतीय नौसेना प्रमुख ने अमेरिकी नौसेना शीर्ष कमांडरों से की बैठक

Update: 2025-11-15 16:26 GMT
Delhi दिल्ली: भारतीय नौसेना प्रमुख एडमिरल अरुण प्रभाकर ने हाल ही में अमेरिकी नौसेना के शीर्ष कमांडरों से द्विपक्षीय बैठक की, जिसमें Indo-Pacific क्षेत्र में रणनीतिक और सुरक्षा सहयोग को सुदृढ़ करने पर व्यापक चर्चा हुई। यह बैठक दोनों देशों की नौसेना के बीच चल रहे सहयोग और सामरिक साझेदारी को और मजबूत करने के उद्देश्य से आयोजित की गई। बैठक में भारतीय नौसेना के वरिष्ठ अधिकारियों के साथ-साथ अमेरिकी नौसेना के एडमिरल और वरिष्ठ कमांडर मौजूद थे। बैठक के दौरान मुख्य रूप से इंडो-पैसिफिक क्षेत्र में समुद्री सुरक्षा, संयुक्त नौसैनिक अभ्यास, समुद्री निगरानी, काउंटर-पाइरेट्री ऑपरेशन और तकनीकी सहयोग पर चर्चा की गई। दोनों पक्षों ने क्षेत्रीय स्थिरता और समुद्री कानूनों के पालन की अहमियत पर भी जोर दिया। 

बैठक में एडमिरल प्रभाकर ने भारत की नौसेना की तैयारियों और समुद्री क्षमताओं के बारे में जानकारी दी। उन्होंने बताया कि भारतीय नौसेना लगातार अपने जहाजों, हथियार प्रणालियों और तकनीकी क्षमताओं को अद्यतन कर रही है, ताकि किसी भी आपातकालीन स्थिति में त्वरित और प्रभावी कार्रवाई की जा सके। अमेरिकी नौसेना के कमांडरों ने भारत की समुद्री रणनीति और navy modernization की योजनाओं की सराहना की और द्विपक्षीय सहयोग के नए क्षेत्रों की पहचान की। दोनों देशों ने navy-to-navy relations को और मजबूत बनाने के लिए संयुक्त प्रशिक्षण और नौसैनिक अभ्यास बढ़ाने पर सहमति व्यक्त की। इसके तहत भारत और अमेरिका के नौसैनिक दल विभिन्न तकनीकी और सामरिक संचालन में परस्पर सहयोग करेंगे। इसके अलावा, navy interoperability और navy intelligence sharing के माध्यम से समुद्री खतरों का बेहतर आकलन और नियंत्रण किया जा सकेगा। 

बैठक के दौरान Indo-US defense cooperation के तहत navy technology exchange, naval infrastructure development, fleet deployment, और navy operational coordination जैसे विषयों पर भी बातचीत हुई। दोनों पक्षों ने navy joint operations और navy strategic engagement को बढ़ावा देने पर बल दिया। बैठक का समापन दोनों देशों की नौसेना के बीच सहयोग को और गहरा करने और समुद्री सुरक्षा के महत्व को उजागर करने वाले वक्तव्यों के साथ हुआ। इस बैठक के बाद रणनीतिक और सामरिक दृष्टिकोण से दोनों नौसेनाओं के बीच संबंध और सुदृढ़ होंगे, जिससे इंडो-पैसिफिक क्षेत्र में स्थिरता और सुरक्षा सुनिश्चित करने में मदद मिलेगी।
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