Delhi दिल्ली: भारत और यूरोपीय संघ (EU) ने प्रस्तावित मुक्त व्यापार समझौते (FTA) के लिए अपनी बातचीत सफलतापूर्वक पूरी कर ली है और समझौते को अंतिम रूप दे दिया गया है। इस ऐतिहासिक घोषणा को मंगलवार को होने वाली भारत-यूरोपीय संघ शिखर वार्ता में किया जाएगा। वाणिज्य सचिव राजेश अग्रवाल ने सोमवार को इस जानकारी की पुष्टि की। अग्रवाल ने कहा कि भारत के दृष्टिकोण से यह व्यापार समझौता संतुलित और भविष्योन्मुखी है। इसका उद्देश्य भारत और यूरोपीय संघ के बीच आर्थिक एकीकरण को मजबूत करना और दोनों अर्थव्यवस्थाओं में व्यापार और निवेश को नई गति प्रदान करना है। उन्होंने भरोसा जताया कि समझौता दोनों पक्षों के लिए दीर्घकालिक लाभकारी सिद्ध होगा।
समझौते की कानूनी प्रक्रियाएं और लागू होने की समय-सीमा
वाणिज्य सचिव ने बताया कि वर्तमान में समझौते के मसौदे की कानूनी जांच जारी है। सरकार की कोशिश है कि इसे जल्द पूरा कर इस वर्ष ही समझौते पर हस्ताक्षर किए जाएं। इसके प्रभावी होने की संभावना अगले वर्ष की शुरुआत में है। इस FTA के माध्यम से व्यापार, निवेश, रणनीतिक रक्षा सहयोग और प्रवासियों की सुगम आवाजाही को अंतिम रूप दिया जाएगा।
सुरक्षा और रक्षा साझेदारी
यूरोपीय आयोग की अध्यक्ष उर्सुला वॉन डेर लेयेन ने कहा कि “एक सफल भारत दुनिया को अधिक स्थिर, समृद्ध और सुरक्षित बनाता है।” उन्होंने इस वर्ष गणतंत्र दिवस परेड में यूरोपीय संघ की सैन्य टुकड़ी की भागीदारी को दोनों पक्षों के बीच गहराते सुरक्षा सहयोग का प्रतीक बताया। उन्होंने कहा कि मंगलवार को सुरक्षा और रक्षा साझेदारी पर हस्ताक्षर के साथ समझौते का औपचारिक समापन होगा। यूरोपीय संघ के व्यापार और आर्थिक सुरक्षा आयुक्त मारोस सेफकोविच ने गणतंत्र दिवस के अवसर पर भारत में अपनी उपस्थिति को सम्मानजनक बताया और कहा कि भारत-यूरोपीय संघ मुक्त व्यापार समझौते को अंतिम रूप देने का समय उपयुक्त है। उनका मानना है कि इस समझौते के जरिए दोनों पक्षों के बीच साझेदारी और मजबूती प्राप्त होगी।
शिखर सम्मेलन में रणनीतिक वार्ता
मंगलवार को शिखर सम्मेलन में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी यूरोपीय आयोग की अध्यक्ष वॉन डेर लेयेन और यूरोपीय परिषद के अध्यक्ष एंटोनियो कोस्टा की मेजबानी करेंगे। इस बैठक में व्यापार, निवेश, सुरक्षा और रक्षा सहयोग के मुद्दों पर विस्तार से चर्चा की जाएगी। दोनों पक्ष भू-राजनीतिक अस्थिरता के बीच एक व्यापक रणनीतिक दृष्टिकोण अपनाने के लिए तैयार हैं। विशेषज्ञों का मानना है कि यह समझौता भारत-यूरोपीय संघ आर्थिक एवं रणनीतिक साझेदारी में एक मील का पत्थर साबित होगा। व्यापार, निवेश और सुरक्षा के क्षेत्र में दोनों पक्षों के बीच सहयोग की दिशा में यह महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है।