वाराणसी। उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने बुधवार को वाराणसी में भारत सेवाश्रम संघ के शताब्दी समारोह को संबोधित करते हुए संन्यासियों के कर्तव्य, धर्म और राष्ट्र की रक्षा को लेकर महत्वपूर्ण बयान दिया। उन्होंने कहा कि एक संन्यासी के जीवन का ध्येय केवल साधना तक सीमित नहीं होना चाहिए, बल्कि आवश्यकता पड़ने पर राष्ट्र और धर्म की रक्षा के लिए भी तैयार रहना चाहिए। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने कहा, "धन के निमित्त धर्म नहीं त्यागूंगा और छिड़ गया युद्ध तो बम-गोले भी दागूंगा।" उन्होंने इस कथन के माध्यम से संन्यासी के संकल्प और राष्ट्र के प्रति उसके दायित्व का उल्लेख किया।




वाराणसी के सिगरा स्थित भारत सेवाश्रम संघ में आयोजित दस दिवसीय शताब्दी समारोह के चौथे दिन मुख्यमंत्री शामिल हुए। इस दौरान उन्होंने आश्रम में स्थापित मां दुर्गा के दर्शन किए और धार्मिक-सांस्कृतिक कार्यक्रमों में भाग लिया।
अपने संबोधन में मुख्यमंत्री ने कहा कि भारत के इतिहास में संतों और संन्यासियों ने आध्यात्मिक साधना के साथ राष्ट्रीय चेतना को जागृत करने में भी महत्वपूर्ण योगदान दिया है। योगी आदित्यनाथ ने कहा कि जब कोई राष्ट्र संकट में होता है, तो उसकी आध्यात्मिक, ऐतिहासिक और सांस्कृतिक विरासत भी प्रभावित होती है। उन्होंने देश के इतिहास का उल्लेख करते हुए आपसी बंटवारे को विदेशी आक्रमणकारियों की सफलता का एक कारण बताया।
मुख्यमंत्री ने भारत सेवाश्रम संघ के संस्थापक स्वामी प्रणवानंद महाराज के योगदान की सराहना की। उन्होंने बताया कि स्वामी प्रणवानंद का गोरक्षपीठ से गहरा संबंध रहा है। इसके साथ ही मुख्यमंत्री ने भारत सेवाश्रम संघ द्वारा 100 परिवारों को आत्मनिर्भर बनाने की पहल की प्रशंसा की। उन्होंने धर्म को मानवता और अध्यात्म को सेवा से जोड़ने पर भी जोर दिया।
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