मुंबई: बॉम्बे हाईकोर्ट ने महाराष्ट्र में सार्वजनिक सड़कों, गलियों और फुटपाथों पर पटाखे फोड़ने पर रोक पूरे साल लागू कर दी है। यह प्रतिबंध नवरात्रि, दिवाली और क्रिसमस समेत सभी त्योहारों पर लागू होगा। अदालत ने प्रदूषण को लेकर जागरूकता अभियान और शिकायत व्यवस्था शुरू करने के निर्देश दिए हैं। हालांकि, पटाखों के निर्माण और बिक्री पर रोक नहीं लगाई गई है। मामले की अगली सुनवाई 25 नवंबर को होगी।
सार्वजनिक जगहों पर पटाखे फोड़ने पर सालभर रोक
महाराष्ट्र में अब सार्वजनिक सड़कों, गलियों और फुटपाथों पर पटाखे फोड़ने की मनाही पूरे साल लागू रहेगी। बॉम्बे हाईकोर्ट ने गुरुवार को पहले से जारी रोक का दायरा बढ़ाते हुए यह आदेश दिया। इसका मतलब है कि नवरात्रि, दिवाली, क्रिसमस या किसी अन्य त्योहार के दौरान भी इन सार्वजनिक जगहों पर पटाखे नहीं फोड़े जा सकेंगे।
अदालत ने यह फैसला त्योहारों के दौरान निकलने वाले जुलूसों से होने वाले शोर और वायु प्रदूषण को कम करने के उद्देश्य से दिया है। जस्टिस गिरीश एस. कुलकर्णी और जस्टिस नीला के. गोकले की खंडपीठ ने मामले की सुनवाई करते हुए प्रदूषण के बढ़ते खतरे पर चिंता जताई।
कोर्ट ने कहा कि जब तक लोग मौजूदा परिस्थितियों की गंभीरता और शहरों में रहने से जुड़े लंबे समय के खतरों को नहीं समझेंगे, तब तक स्थिति और खराब हो सकती है। अदालत ने चेतावनी दी कि प्रदूषण बढ़ने से शहरों की हालत गैस चैंबर जैसी हो सकती है।
गणेशोत्सव के आदेश को किया गया व्यापक
हाईकोर्ट ने यह फैसला 22 सितंबर को गणेशोत्सव के दौरान दिए गए अपने पुराने आदेश का दायरा बढ़ाते हुए सुनाया। उस समय त्योहारों के जुलूसों में तेज आवाज और वायु प्रदूषण को नियंत्रित करने के लिए निर्देश जारी किए गए थे। अब इन निर्देशों के तहत सार्वजनिक सड़कों, गलियों और फुटपाथों पर पटाखे फोड़ने पर लगी रोक को पूरे साल लागू कर दिया गया है।
यह मामला ‘हाईकोर्ट ऑन इट्स ओन मोशन बनाम महाराष्ट्र सरकार और अन्य’ से जुड़ा है। इसमें अदालत ने खुद संज्ञान लेकर जनहित याचिका (PIL) पर सुनवाई की। इसके साथ ही सार्वजनिक सड़कों पर तेज आवाज वाले साउंड सिस्टम के इस्तेमाल और पटाखे फोड़ने को लेकर दायर अन्य याचिकाएं भी इस मामले से जुड़ी हैं। अदालत ने स्पष्ट किया कि उसका आदेश पटाखों के निर्माण या उनकी बिक्री पर प्रतिबंध नहीं लगाता। रोक सार्वजनिक सड़कों, गलियों और फुटपाथों पर पटाखे फोड़ने को लेकर है।
बच्चों और बुजुर्गों पर प्रदूषण के असर को लेकर चिंता
सुनवाई के दौरान जजों ने दिवाली के बाद फैलने वाले प्रदूषण के प्रभावों पर भी चिंता जाहिर की। अदालत के मुताबिक, जहरीली हवा का असर बच्चों और बुजुर्गों पर खास तौर पर पड़ सकता है। कोर्ट ने कहा कि प्रदूषण से जुड़े नियमों को प्रभावी ढंग से लागू करना जरूरी है।
अदालत ने महाराष्ट्र सरकार, बृहन्मुंबई महानगरपालिका (BMC) और महाराष्ट्र प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड (MPCB) को इस दिशा में मिलकर काम करने का निर्देश दिया है। इन संस्थाओं को लोगों को प्रदूषण के नुकसान के बारे में जानकारी देने और नियमों के पालन को लेकर जागरूकता बढ़ाने के लिए कदम उठाने होंगे।
हाईकोर्ट ने संबंधित संस्थाओं को...
हाईकोर्ट ने संबंधित संस्थाओं को सार्वजनिक जागरूकता अभियान चलाने के लिए भी कहा है। निर्देशों के मुताबिक, एक सप्ताह के भीतर स्कूलों और सार्वजनिक परिवहन से जुड़े स्थानों पर अभियान शुरू किया जाना चाहिए। अदालत ने अभियान में फिल्मी हस्तियों सहित सेलिब्रिटीज को शामिल करने और कम प्रदूषण वाले ग्रीन पटाखों को बढ़ावा देने की बात भी कही है। इसके अलावा, लोगों की शिकायतें सुनने और नियमों के उल्लंघन की जानकारी देने के लिए पुलिस के साथ मिलकर एक प्रभावी शिकायत व्यवस्था तैयार करने का निर्देश दिया गया है।
मामले में अगली सुनवाई 25 नवंबर को होगी। तब तक संबंधित संस्थाओं को अदालत के निर्देशों के अनुरूप जागरूकता और शिकायत संबंधी व्यवस्था पर काम करना होगा।
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