Bhopal. भोपाल। मध्य प्रदेश की राजधानी भोपाल में एक युवती ने उत्तर प्रदेश निवासी युवक पर अपनी पहचान छिपाकर करीब पांच साल तक संबंध बनाने, शादी का भरोसा देने, मारपीट और जबरन गर्भपात कराने के गंभीर आरोप लगाए हैं। पीड़िता की शिकायत पर एमपी नगर पुलिस ने एफआईआर दर्ज कर मामले की जांच शुरू कर दी है। पुलिस का कहना है कि शिकायत में लगाए गए सभी आरोपों की जांच और साक्ष्यों का सत्यापन किया जा रहा है।
पीड़िता का आरोप है कि उसकी मुलाकात आरोपी से कार्यालय में हुई थी। आरोपी ने कथित तौर पर अपना नाम ‘सौरभ राय’ बताया था, जबकि बाद में उसकी पहचान उत्तर प्रदेश निवासी अफजल खान के रूप में सामने आने का दावा किया गया। युवती के मुताबिक दोनों करीब पांच साल तक एक-दूसरे के संपर्क में रहे। शिकायत में आरोप लगाया गया है कि युवक ने अपनी वास्तविक पहचान छिपाकर उसे प्रेम संबंध में फंसाया और शादी का भरोसा दिया। पीड़िता का कहना है कि आरोपी ने हिंदू रीति-रिवाज से शादी करने की बात भी कही थी। बाद में जब उसने शादी के लिए दबाव बनाया तो आरोपी कथित तौर पर टालमटोल करने लगा।
युवती ने आरोपी पर शारीरिक और मानसिक शोषण का भी आरोप लगाया है। शिकायत में दावा किया गया है कि शादी की बात को लेकर विवाद होने पर उसके साथ मारपीट की गई। पीड़िता ने कई बार जबरन गर्भपात कराए जाने का आरोप भी लगाया है। इन आरोपों की स्वतंत्र पुष्टि अभी नहीं हुई है और पुलिस जांच जारी है। अतिरिक्त पुलिस कमिश्नर शैलेंद्र सिंह चौहान के मुताबिक, एमपी नगर थाने में एक युवती ने शिकायत दर्ज कराई है। शिकायतकर्ता ने बताया है कि वह करीब पांच साल से एक व्यक्ति के साथ ऑफिस में काम करती थी और युवक ने कथित रूप से पहचान छिपाकर उसके साथ संबंध बनाए। शिकायत के आधार पर एफआईआर दर्ज कर ली गई है और सभी आरोपों की जांच की जा रही है।
मामला सामने आने के बाद बजरंग दल सहित कुछ हिंदू संगठनों के कार्यकर्ता थाने पहुंचे और प्रदर्शन किया। प्रदर्शनकारियों ने फर्जी पहचान के जरिए महिलाओं को निशाना बनाने के आरोप वाले मामलों में सख्त कार्रवाई की मांग की। संगठनों ने गरबा और अन्य धार्मिक आयोजनों में प्रवेश के दौरान पहचान सत्यापन की व्यवस्था मजबूत करने की मांग भी उठाई। पुलिस अब आरोपी की पहचान, दोनों के बीच संबंधों की परिस्थितियों, शादी के कथित वादे, मारपीट और गर्भपात से जुड़े आरोपों के संबंध में साक्ष्य जुटा रही है। आरोपी पक्ष का विस्तृत बयान सामने आने के बाद मामले में अन्य तथ्य स्पष्ट हो सकते हैं। फिलहाल एफआईआर में लगाए गए आरोप जांच के दायरे में हैं और दोष या जिम्मेदारी का अंतिम निर्धारण न्यायिक प्रक्रिया के तहत होगा।
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