एमपी में 21 साल बाद फिर दौड़ेंगी सरकारी बसें, 7 क्षेत्रों में चलेंगी 5206 बसें
Bhopal भोपाल। मध्य प्रदेश में 21 साल बाद एक बार फिर सरकारी कंपनी की बसें सड़कों पर दौड़ेंगी। इस योजना की शुरुआत इंदौर से जुलाई-अगस्त में की जाएगी। इसके साथ ही पीएम ई-बस सेवा के तहत 150 इलेक्ट्रिक बसों का संचालन भी जुलाई से ही इंदौर शहर में शुरू किया जाएगा। इस नई परिवहन व्यवस्था को लेकर सोमवार को मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव की अध्यक्षता में मुख्यमंत्री सुगम परिवहन सेवा के अंतर्गत मध्य प्रदेश यात्री परिवहन एवं इन्फ्रास्ट्रक्चर लिमिटेड के संचालक मंडल की बैठक में तैयारियों की समीक्षा की गई और कई अहम निर्णय लिए गए।
बैठक में मुख्यमंत्री ने निर्देश दिए कि बस सेवा के मार्गों पर आने वाली सुविधाओं को बेहतर बनाने के लिए जिला प्रशासन और नगरीय निकायों को सक्रिय भूमिका निभानी होगी, ताकि यात्रियों को सुगम और सुरक्षित परिवहन मिल सके। परिवहन विभाग के सचिव और बोर्ड के प्रबंध संचालक मनीष सिंह ने योजना की विस्तृत प्रस्तुति दी।
प्रदेश में बस संचालन को सात क्षेत्रों में विभाजित किया गया है, जिनमें इंदौर, उज्जैन, भोपाल, जबलपुर, सागर, ग्वालियर और रीवा शामिल हैं। इंदौर क्षेत्र में इंदौर संभाग के सभी जिले शामिल होंगे और यहां से पड़ोसी राज्यों महाराष्ट्र, गुजरात, राजस्थान और उत्तर प्रदेश के लिए भी अंतरराज्यीय बस सेवाएं चलाई जाएंगी।
योजना के पहले चरण में सात क्षेत्रीय मुख्यालयों से कुल 620 मार्गों पर 2432 बसों के संचालन की तैयारी की गई है। इनमें इंदौर क्षेत्र से 121 मार्गों पर 608 बसें चलाई जाएंगी। इसके अलावा सिटी बस सेवा के तहत भी इंदौर में 28 मार्गों पर बसें संचालित होंगी, जिनमें पीएम ई-बस सेवा की 150 बसें शामिल हैं। इस श्रेणी में कुल 784 बसें चलाई जाएंगी।
इंदौर क्षेत्र से अंतरराज्यीय मार्गों पर भी 101 रूटों पर 276 बसों का संचालन किया जाएगा। कुल मिलाकर प्रदेश के सात क्षेत्रों में 1164 मार्गों पर 5206 बसों का संचालन प्रस्तावित है।
बैठक में यह भी निर्णय लिया गया कि राज्य स्तरीय होल्डिंग कंपनी और सात क्षेत्रीय सहायक कंपनियों के ढांचे को स्वीकृति दी गई है। होल्डिंग कंपनी में प्रतिनियुक्ति, संविदा और संविलयन के आधार पर भर्ती होगी। राज्य स्तरीय कंपनी में 140 पद स्वीकृत किए गए हैं, जबकि क्षेत्रीय कंपनियों में कुल 150 पद और विभिन्न विभागों में 1190 पदों की स्वीकृति दी गई है, जिन्हें चरणबद्ध तरीके से अगले चार वर्षों में भरा जाएगा।