जयपुर। राजस्थान में फर्जी मेडिकल प्रमाणपत्रों के जरिए डॉक्टर के रूप में पंजीकरण कराने वाले गिरोह के खिलाफ स्पेशल ऑपरेशन ग्रुप (एसओजी) की कार्रवाई जारी है। जांच एजेंसी ने 15 अक्टूबर को चार और विदेशी मेडिकल स्नातकों को गिरफ्तार किया। आरोपी रूस, किर्गिस्तान और कजाकिस्तान जैसे देशों से एमबीबीएस की पढ़ाई करने के बाद भारत में अनिवार्य स्क्रीनिंग परीक्षा पास नहीं कर पाए थे। इसके बावजूद फर्जी प्रमाणपत्रों के जरिए मेडिकल इंटर्नशिप और पंजीकरण हासिल करने का आरोप है।
27 से 30 लाख रुपये में बनवाए फर्जी सर्टिफिकेट
एसओजी के अनुसार, आरोपी फॉरेन मेडिकल ग्रेजुएट एग्जामिनेशन (एफएमजीई) पास नहीं कर सके थे। यह परीक्षा विदेशी मेडिकल स्नातकों के लिए भारत में चिकित्सा पंजीकरण की महत्वपूर्ण शर्त है। आरोप है कि उन्होंने 27 से 30 लाख रुपये देकर परीक्षा पास करने के फर्जी प्रमाणपत्र बनवाए। इन दस्तावेजों के आधार पर राजस्थान के विभिन्न सरकारी मेडिकल कॉलेजों में इंटर्नशिप प्राप्त की गई।
चार आरोपियों की हुई गिरफ्तारी
गिरफ्तार आरोपियों की पहचान भरत भूषण, शिवम चौधरी, सौरव शर्मा और हिमांशु शर्मा के रूप में हुई है। पुलिस के मुताबिक, भरत भूषण और शिवम चौधरी डीग जिले के रहने वाले हैं, जबकि सौरव और हिमांशु भरतपुर के निवासी हैं। जांच एजेंसी का आरोप है कि इन लोगों ने फर्जी दस्तावेजों के सहारे मेडिकल क्षेत्र में आगे बढ़ने का प्रयास किया।
100 से अधिक संदिग्धों की पहचान
एसओजी की जांच में फर्जी एफएमजीई प्रमाणपत्र उपलब्ध कराने वाले बड़े नेटवर्क की जानकारी सामने आई है। जांचकर्ताओं ने 100 से अधिक संभावित लाभार्थियों की पहचान की है। आरोप है कि गिरोह प्रत्येक व्यक्ति से 20 से 30 लाख रुपये लेकर जाली प्रमाणपत्र उपलब्ध कराता था।
मेडिकल काउंसिल से जुड़े लोगों पर भी कार्रवाई
15 अक्टूबर की रिपोर्ट के अनुसार, इस मामले में गिरफ्तार व्यक्तियों की कुल संख्या 33 पहुंच गई थी। इनमें विदेशी मेडिकल स्नातकों के अलावा राजस्थान मेडिकल काउंसिल के पूर्व रजिस्ट्रार, कर्मचारी और बिचौलिये भी शामिल हैं।
फर्जी डिग्री बनाने वालों की तलाश
एसओजी अब यह पता लगाने में जुटी है कि फर्जी प्रमाणपत्र किन लोगों ने तैयार किए और मेडिकल पंजीकरण तथा इंटर्नशिप हासिल करने में आरोपियों की किसने मदद की। जांच में मेडिकल दस्तावेजों के सत्यापन और पंजीकरण प्रक्रिया से जुड़ी अनियमितताओं की भी पड़ताल की जा रही है। तथ्य स्पष्टता: उपलब्ध ताजा रिपोर्टों में 15 अक्टूबर को चार नई गिरफ्तारियों की पुष्टि हुई है। अलग से आठ डॉक्टरों की गिरफ्तारी की पुष्टि नहीं मिली है। यह मामला मुख्य रूप से फर्जी एफएमजीई प्रमाणपत्रों का है, न कि सभी आरोपियों की विदेशी एमबीबीएस डिग्रियों के फर्जी होने का।
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