दिल्ली: तकनीक अब सिर्फ मोबाइल फोन और कंप्यूटर तक सीमित नहीं रह गई है। इसका इस्तेमाल स्वास्थ्य सेवाओं, डिजिटल पेमेंट, देश की सुरक्षा और प्राकृतिक आपदाओं से निपटने में भी तेजी से बढ़ रहा है। इंडिया मोबाइल कांग्रेस (IMC) 2026 में ऐसी कई तकनीकें पेश की गईं, जिनका उद्देश्य लोगों के रोजमर्रा के काम आसान बनाना है। इस आयोजन में AI स्मार्टग्लास, हेल्थ चेकअप मशीन, डेंटल रोबोट और आधुनिक ड्रोन जैसी तकनीकों ने ध्यान खींचा। खास बात यह रही कि इनमें से कई इनोवेशन भारतीय कंपनियों और स्टार्टअप्स ने तैयार किए हैं।
रिलायंस जियो ने कार्यक्रम में अपने AI स्मार्टग्लास पेश किए। कंपनी के मुताबिक, इनकी मदद से यूजर बिना मोबाइल हाथ में लिए UPI पेमेंट कर सकेंगे। चश्मे में लाइव वॉइस ट्रांसलेशन की सुविधा भी दी गई है, जिससे अलग-अलग भाषाएं बोलने वाले लोगों के बीच बातचीत आसान हो सकती है।
जियो इन्हें दो मॉडल में लाने की योजना बना रही है। एक मॉडल में ऑडियो सुविधाएं होंगी, जबकि दूसरे में कैमरा भी मिलेगा। कंपनी ने अभी पूरी तकनीकी जानकारी और कीमत सार्वजनिक नहीं की है। हालांकि, इसे आम भारतीय ग्राहकों के बजट के मुताबिक रखने का दावा किया गया है।
स्वास्थ्य तकनीक के क्षेत्र में क्योरबे ने केयर कियोस्क नाम की मशीन प्रदर्शित की। यह एक स्मार्ट हेल्थ चेकअप स्टेशन है, जहां एक ही जगह पर कई तरह की स्वास्थ्य जांच की जा सकती हैं। इसका उद्देश्य स्वास्थ्य जांच की प्रक्रिया को अधिक सुविधाजनक और सुलभ बनाना है।
कंपनी के मुताबिक, केयर कियोस्क मशीन से ब्लड शुगर, ब्लड प्रेशर, हीमोग्लोबिन और लिवर से जुड़ी जांच समेत 80 से अधिक टेस्ट किए जा सकते हैं। कंपनी का दावा है कि जांच पूरी होने के करीब 30 मिनट के भीतर रिपोर्ट मोबाइल पर भेज दी जाती है, जिससे लोगों को स्वास्थ्य संबंधी जानकारी आसानी से मिल सकती है।
ऐसी मशीनें छोटे शहरों और दूरदराज के इलाकों में शुरुआती स्वास्थ्य जांच के लिए उपयोगी हो सकती हैं। हालांकि, गंभीर बीमारी की पुष्टि और इलाज के लिए डॉक्टर की सलाह जरूरी होगी।
डेंटल रोबोट बताएगा दांतों और मसूड़ों की स्थिति
आयोजन में एक रोबोटिक डेंटल कियोस्क भी दिखाया गया, जिसे भारतीय मेडटेक स्टार्टअप ने विकसित किया है। इसमें कैमरे, स्कैनिंग सेंसर और आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस का इस्तेमाल किया गया है।
मशीन के सामने बैठने पर इसका रोबोटिक आर्म मुंह की स्कैनिंग करता है। डेवलपर के मुताबिक, यह दांतों की सड़न, प्लाक और मसूड़ों की सूजन जैसे संभावित लक्षण पहचान सकता है।
कंपनी ने करीब 60 सेकंड में शुरुआती रिपोर्ट देने का दावा किया है। रिपोर्ट स्क्रीन के साथ वॉट्सऐप पर भी मिल सकती है। हालांकि, यह दंत चिकित्सक की पूरी जांच का विकल्प नहीं है।
IMC 2026 में ड्रोनास्त्र नाम की एंटी-ड्रोन तकनीक प्रदर्शित की गई। इसे सीमावर्ती और संवेदनशील इलाकों में संदिग्ध ड्रोन की पहचान करने के लिए विकसित किया गया है। यह तकनीक सुरक्षा एजेंसियों को संभावित ड्रोन खतरों पर नजर रखने और सुरक्षा व्यवस्था मजबूत करने में मदद कर सकती है।
प्रदर्शित तकनीक के अनुसार, इसमें AI की मदद से ड्रोन का पता लगाने और खतरे को रोकने की क्षमता बताई गई है। इसके लिए सिग्नल जाम करने और इंटरसेप्टर ड्रोन जैसे तरीकों का इस्तेमाल किया जा सकता है।
वहीं, क्वालकॉम ने IMC 2026 में ओपन आर्म रोबोट प्रदर्शित किया, जो इंसानी हाथों की गतिविधियों की नकल कर सकता है। इस तकनीक का इस्तेमाल खतरनाक औद्योगिक क्षेत्रों और आपातकालीन परिस्थितियों में किया जा सकता है, जहां इंसानों के लिए सीधे काम करना जोखिम भरा होता है।
आपदा में मोबाइल नेटवर्क पहुंचाएगा PATANG ड्रोन
रिलायंस की एस्टेरिया एयरोस्पेस ने PATANG नाम का ड्रोन प्रदर्शित किया। इसका उद्देश्य प्राकृतिक आपदाओं के दौरान संचार व्यवस्था बनाए रखने में मदद करना है।
बाढ़, भूकंप या तूफान के कारण मोबाइल टावर प्रभावित होने पर यह ड्रोन अस्थायी नेटवर्क उपलब्ध कराने के काम आ सकता है। इसमें संचार उपकरणों के साथ 4K कैमरा भी दिया गया है। कंपनी के अनुसार, ड्रोन लंबे समय तक एक स्थान के ऊपर उड़ान भर सकता है। इससे राहत दलों को प्रभावित इलाकों की निगरानी और संपर्क व्यवस्था बनाए रखने में सहायता मिल सकती है।
IMC 2026 में दिखाई गई इन तकनीकों से स्पष्ट है कि AI और रोबोटिक्स का इस्तेमाल कई क्षेत्रों में बढ़ रहा है। हालांकि, इन उत्पादों की वास्तविक उपयोगिता उनकी कीमत, उपलब्धता और जमीनी प्रदर्शन पर निर्भर करेगी।
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