भारत आए विदेशी विशेषज्ञ पर चढ़ा गरबा का जादू, लोगों के साथ खेला डांडिया
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चित्तौड़गढ़: परमाणु ऊर्जा से जुड़े तकनीकी काम के लिए 24 अंतरराष्ट्रीय विशेषज्ञ राजस्थान आए थे. यहां जब उन्होंने गरबा और डांडिया देखा तो माहौल कुछ ऐसा बना कि वे खुद को नाचने से रोक नहीं पाए. राजस्थान के चित्तौड़गढ़ जिले के रावतभाटा में जापान से जुड़े ये विशेषज्ञ स्थानीय लोगों के साथ डांडिया खेलते नजर आए. मौका था नवरात्रि के सातवें दिन आयोजित गरबा महोत्सव का. यह आयोजन राजस्थान परमाणु बिजलीघर की आवासीय कॉलोनी के गोल गार्डन में हुआ.
कॉलोनी में मां भगवती के भजनों और पारंपरिक गीतों की धुन पर गरबा हो रहा था. स्थानीय लोग उत्सव में शामिल थे. इसी दौरान जापान सेंटर से जुड़े विशेषज्ञ भी इस रंग में रंगते नजर आए. ये 24 विशेषज्ञ विश्व परमाणु ऊर्जा क्षेत्र से जुड़े संगठन वानों के जापान सेंटर से संबंधित हैं. वे रावतभाटा स्थित राजस्थान परमाणु बिजलीघर की पांचवीं इकाई में विश्वस्तरीय गुणवत्ता से जुड़े कामों को देखने आए हैं.
यानी उनके रावतभाटा आने की वजह तकनीकी थी. उन्हें बिजलीघर की यूनिट में किए जा रहे कामों का जायजा लेना था. लेकिन इस दौरे के बीच गरबा महोत्सव में शामिल होना उनके लिए स्थानीय संस्कृति को करीब से जानने का अवसर बन गया.
गोल गार्डन में जैसे-जैसे पारंपरिक गीतों की धुन तेज हुई, उत्सव का माहौल भी बनता गया. डांडिया की ताल पर स्थानीय लोगों के साथ विदेशी विशेषज्ञों ने भी कदम मिलाए. अलग-अलग देशों से आए मेहमानों को भारतीय त्योहार के इस रंग में शामिल होते देखना आयोजन की खास तस्वीर बन गया.
गरबा और डांडिया गुजरात की सांस्कृतिक परंपरा से जुड़े लोकप्रिय नृत्य हैं, जो नवरात्र के दौरान देश के कई हिस्सों में उत्साह के साथ किए जाते हैं. लोग संगीत की लय पर गोल घेरे में नाचते हैं. डांडिया में लकड़ी की छड़ियों को ताल के साथ बजाते हुए कदम मिलाए जाते हैं. रावतभाटा के गोल गार्डन में भी यही माहौल था. मां भगवती के भजनों और पारंपरिक गीतों के बीच स्थानीय लोगों के साथ विदेशी मेहमान भी उत्सव का हिस्सा बने.
नवरात्रि के सातवें दिन गरबा महोत्सव में देर शाम तक नृत्य और संगीत का माहौल बना रहा. मां भगवती के भजन और पारंपरिक गीत आयोजन का हिस्सा रहे. स्थानीय लोगों और विदेशी मेहमानों की साझा भागीदारी ने इसे खास बना दिया. रावतभाटा की पहचान राजस्थान परमाणु बिजलीघर जैसे तकनीकी प्रतिष्ठान से भी जुड़ी है. त्योहारों की खूबी भी शायद यही है कि वे लोगों को उनके काम, भाषा और देश की सीमाओं से आगे एक साझा उत्सव में जोड़ देते हैं.