Bilaspur. बिलासपुर। देश को रोशन करने के लिए भाखड़ा बांध के निर्माण के दौरान अपना घर, जमीन, आस्था और संस्कृति तक न्योछावर कर चुके बिलासपुर शहर के लोग एक बार फिर विस्थापन जैसा दंश ही दंश झेल रहे हैं। हालांकि इस बार शहर के लोगों को अपना घर छोडक़र कहीं और नहीं जाना पड़ा है, लेकिन बदलते परिवहन मार्गों ने उनके कारोबार और रोजगार पर गहरा असर डाला है। कीरतपुर-नेरचौक फोरलेन के निर्माण के बाद बिलासपुर शहर में बाहरी लोगों की आवाजाही कम हुई है, जिसका सीधा असर
कारोबारियों
के कारोबार पर पड़ा है। शहर के व्यापार में करीब 50 फीसदी तक गिरावट आने का अनुमान है। वहीं, फोरलेन के किनारे मंडी-भराड़ी क्षेत्र एक नए व्यावसायिक केंद्र के रूप में उभर रहा है। करीब दो साल पहले शुरू हुए कीरतपुर-नेरचौक फोरलेन के बाद बिलासपुर शहर की रौनक अब काफी हद तक फोरलेन की ओर स्थानांतरित होती नजर आ रही है।

पहले बाहरी राज्यों से आने वाले पर्यटक और अन्य यात्री बिलासपुर शहर में रुकते थे, जिससे होटल, ढाबा संचालकों और दुकानदारों को कारोबार मिलता था। अब फोरलेन पर ही होटल, रैस्टोरेंट, ढाबे, पैट्रोप पंप और अन्य सुविधाएं उपलब्ध होने के कारण यात्री शहर में प्रवेश किए बिना सीधे अपने गंतव्य की ओर निकल जाते हैं। फोरलेन का लाभ झंडूता, नयनादेवी और घुमारवीं विधानसभा क्षेत्रों के कुछ हिस्सों को जरूर मिला है, लेकिन बिलासपुर शहर में बाहरी लोगों की आवाजाही घटने से पुराने बाजार की रौनक खत्म हो गई है। पहले जिन दुकानों पर ग्राहकों की भीड़ लगी रहती थी, वहां अब नाममात्र लोग दिखाई देते हैं। हालांकि शहर के कारोबार बचाने के लिए गोबिंदसागर झील पर पुल निर्माण की योजना भी चर्चा में है। माना जा रहा है कि पुल बनने से बिलासपुर शहर को फोरलेन से सीधा संपर्क मिल सकता है, लेकिन इसके लिए शहरवासियों को अभी इंतजार करना पड़ रहा है। कीरतपुर-नेरचौक फोरलेन बनने के बाद बरमाणा से स्वारघाट तक पुराने मार्ग पर कारोबार करने वाले 500 से अधिक दुकानदारों के रोजगार प्रभावित होने का अनुमान है। इनमें ढाबा संचालक, टायर पंक्चर, वाहन मैकेनिक और अन्य छोटे कारोबारी शामिल हैं। फोरलेन के किनारे नए व्यावसायिक केंद्र विकसित होने के बावजूद इन सभी को वहां दोबारा रोजगार स्थापित करने का अवसर नहीं मिल पाया है।
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