New Delhi. नई दिल्ली। संसद का मानसून सत्र मंगलवार को ऑपरेशन सिंदूर को लेकर जबरदस्त बहस का केंद्र बना रहा। लोकसभा और राज्यसभा दोनों सदनों में राष्ट्रीय सुरक्षा, आतंकवाद के खिलाफ कार्रवाई और राजनीतिक इच्छाशक्ति को लेकर तीखी बहस हुई। लोकसभा में गृहमंत्री अमित शाह और विपक्ष के नेता राहुल गांधी के बीच हुई बहस ने इस विषय को और गर्मा दिया।

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गृहमंत्री अमित शाह ने आतंकवाद के खिलाफ सरकार की कार्रवाई का जोरदार बचाव करते हुए बताया कि ऑपरेशन महादेव के तहत पहलगाम हमले के गुनहगार आतंकियों को सेना ने ढेर कर दिया है। उन्होंने कहा कि मारे गए आतंकियों के पाकिस्तान से जुड़े होने के पुख्ता सबूत मिले हैं।
लोकसभा में विपक्ष पर शाह का सीधा हमला
अमित शाह ने अपने संबोधन में विपक्ष पर तीखा हमला बोला। उन्होंने कहा, “जब सेना आतंकवादियों के खिलाफ कार्रवाई करती है, तो विपक्ष को सेना पर भरोसा क्यों नहीं होता? जब सैनिक अपनी जान जोखिम में डालकर ऑपरेशन को अंजाम देते हैं, तो उसे राजनीतिक चश्मे से देखना देशहित में नहीं है।”
उन्होंने कहा कि ऑपरेशन सिंदूर के तहत सेना ने एक सफल और सटीक जवाब दिया। इस ऑपरेशन की विस्तृत जानकारी रक्षा मंत्रालय और सुरक्षा एजेंसियों के पास है। उन्होंने बताया कि ऑपरेशन महादेव में पहलगाम हमले से जुड़े आतंकियों को ट्रैक कर मार गिराया गया है, और यह सर्जिकल स्ट्राइक पूरी तरह से भारतीय सेना की रणनीतिक सफलता है।
प्रियंका गांधी, अखिलेश यादव भी चर्चा में
विपक्ष की ओर से प्रियंका गांधी, अखिलेश यादव सहित अन्य प्रमुख नेताओं को चर्चा में शामिल किया गया। विपक्ष ने सरकार पर सवाल उठाए कि आखिर कैसे इतनी बड़ी चूक हुई जिससे पहलगाम जैसा हमला संभव हुआ?
प्रियंका गांधी ने कहा कि सरकार को सिर्फ जवाबी कार्रवाई का प्रचार करने की बजाय, खुफिया तंत्र की विफलता पर भी जवाब देना चाहिए। उन्होंने पूछा कि इतनी बड़ी संख्या में आतंकवादी सीमा पार से घुसपैठ कैसे कर पाए। सपा प्रमुख अखिलेश यादव ने कहा कि जब तक सुरक्षा एजेंसियों को राजनीतिक हस्तक्षेप से मुक्त नहीं किया जाएगा, तब तक जवाबी कार्रवाई से पहले रोकथाम पर ध्यान नहीं दिया जा सकेगा।
राहुल गांधी का सीधा हमला: "30 मिनट में कर दिया सरेंडर"
विपक्ष के नेता राहुल गांधी ने अपने भाषण में सरकार की रणनीति और इच्छाशक्ति पर सवाल उठाए। उन्होंने रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह द्वारा दिए गए बयान का हवाला देते हुए कहा कि सरकार ने महज 30 मिनट के भीतर पाकिस्तान को सूचित कर दिया कि हमला हुआ है और यह 'एस्केलेटरी' (आक्रामक नहीं) नहीं था।
राहुल ने कहा, “यह तो सीधा-सीधा सरेंडर है। आपने बता दिया कि आपके पास इच्छाशक्ति नहीं है। आपने पायलट्स के हाथ-पांव बांध दिए। सेना को पूरी आजादी देनी चाहिए थी, जैसा कि 1971 में इंदिरा गांधी ने किया था।”
उन्होंने आगे कहा कि पहलगाम हमला एक क्रूर और निंदनीय कृत्य था। इसके बाद विपक्ष ने सरकार की आलोचना नहीं की बल्कि पूरा विपक्ष सरकार और सेना के साथ खड़ा रहा। राहुल गांधी ने बताया कि वह और उनकी पार्टी के प्रतिनिधि पीड़ित परिवारों से मिलने जम्मू-कश्मीर, उत्तर प्रदेश सहित कई स्थानों पर गए। उन्होंने इसे राजनीति से ऊपर का मानवीय कर्तव्य बताया।
राजनाथ सिंह ने राज्यसभा में दी शुरुआत
राज्यसभा में भी ऑपरेशन सिंदूर पर चर्चा की शुरुआत रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने की। उन्होंने कहा कि सेना ने अपने सीमित संसाधनों में भी अद्भुत कार्य किया है। ऑपरेशन को उच्च स्तर पर समन्वयित किया गया और इसके जरिए आतंकियों को मुंहतोड़ जवाब दिया गया।
राजनाथ सिंह ने बताया कि सरकार की नीति स्पष्ट है – “आतंक के खिलाफ जीरो टॉलरेंस”। उन्होंने यह भी जोड़ा कि ऐसे हमलों का उद्देश्य भारत की आंतरिक स्थिरता को चुनौती देना है, लेकिन हमारी सेना और खुफिया एजेंसियां पूरी तरह से सतर्क हैं।
सत्तापक्ष बनाम विपक्ष: तीखे सवाल और जवाब
पूरे दिन चली चर्चा में कई बार टकराव की स्थिति बनती रही। विपक्ष के नेताओं ने सरकार की जवाबदेही तय करने की मांग की, जबकि सत्तापक्ष के सांसदों ने कहा कि ऐसे समय में राजनीतिक मतभेद को किनारे रखकर एकजुटता दिखाना जरूरी है। बीजेपी सांसदों ने राहुल गांधी के ‘सरेंडर’ वाले बयान पर कड़ा ऐतराज जताया। उन्होंने इसे सेना का अपमान बताया और कहा कि विपक्ष को सेना के पराक्रम पर सवाल नहीं उठाना चाहिए।
राजनीतिक इच्छाशक्ति पर बहस
पूरी चर्चा में “राजनीतिक इच्छाशक्ति” एक केंद्रीय मुद्दा बनकर उभरा। जहां राहुल गांधी ने इंदिरा गांधी का उदाहरण देकर 1971 के युद्ध में लिए गए निर्णायक कदमों की प्रशंसा की, वहीं सत्तापक्ष ने नरेंद्र मोदी सरकार की आतंक के खिलाफ की गई कार्रवाइयों जैसे सर्जिकल स्ट्राइक और बालाकोट एयरस्ट्राइक की मिसाल दी।
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