ऊर्जा संकट उत्पादन की कमी से नहीं, अनिश्चितता और आपूर्ति में बाधाओं से पैदा हो रहा: जयशंकर
नई दिल्ली: अमेरिका के अटलांटा में आयोजित जी20 विदेश मंत्रियों की बैठक के दूसरे पूर्ण सत्र को विदेश मंत्री एस. जयशंकर ने भी संबोधित किया। इस दौरान उन्होंने ऊर्जा संकट पर चिंता जताई। विदेश मंत्री एस. जयशंकर ने कहा कि दुनिया आज ऊर्जा उत्पादन की कमी से नहीं, बल्कि अनिश्चितता, आपूर्ति में व्यवधान, अत्यधिक लागत और ऊर्जा तक पहुंच की चुनौतियों से पैदा हुए संकट का सामना कर रही है। उन्होंने ऊर्जा व्यापार और बुनियादी ढांचे पर जानबूझकर किए जा रहे हमलों को कीमतों को अपने नियंत्रण में रखने की सोची-समझी रणनीति करार दिया।
उन्होंने शुक्रवार को सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर अपनी टिप्पणी साझा करते हुए कहा, " ऊर्जा व्यापार और ऊर्जा बुनियादी ढांचे पर जानबूझकर किए जाने वाले हमले ऊर्जा कीमतों को बंधक बनाने की एक सुनियोजित रणनीति हैं।"
विदेश मंत्री ने कहा, "बाधाओं, प्रतिबंधों और रणनीतिक रूप से महत्वपूर्ण समुद्री मार्गों में रुकावटों के कारण ऊर्जा बाजार लगातार प्रभावित हो रहे हैं। ऐसी स्थितियां अब अधिक बार सामने आ रही हैं और उनकी जटिलता तथा प्रभाव का दायरा भी बढ़ रहा है।"
उन्होंने कम आय वाले देशों की स्थिति पर विशेष चिंता जताते हुए कहा कि ऐसा प्रतीत होता है कि इन देशों की मुश्किलों और उनकी जरूरतों को पर्याप्त महत्व नहीं दिया जा रहा है। जयशंकर ने तेल और गैस के बीच सुविधानुसार अंतर किए जाने पर भी सवाल उठाया। उन्होंने कहा, "इन दोनों ऊर्जा स्रोतों को लेकर अलग-अलग छूट दिए जाने की प्रवृत्ति अपने आप में बहुत कुछ कहती है।" हालांकि, उन्होंने किसी देश का नाम नहीं लिया और न ही उन छूटों का स्पष्ट उल्लेख किया, जिनकी ओर उनका इशारा था।
उन्होंने आगाह किया कि वैश्विक बाजार में एक क्षेत्र में पैदा होने वाले व्यवधान का असर दूसरे क्षेत्रों पर भी पड़ता है। परस्पर निर्भरता के इस दौर में ऊर्जा आपूर्ति से जुड़ी समस्याओं के दूरगामी प्रभावों को कम करके नहीं आंकना चाहिए।
भारत की ऊर्जा जरूरतों का उल्लेख करते हुए विदेश मंत्री ने कहा," स्वच्छ रसोई व्यवस्था की जरूरतों को पूरा करने के लिए भारत को एलपीजी की भरोसेमंद और पूर्वानुमानित आपूर्ति की आवश्यकता है।" उन्होंने स्पष्ट किया कि ऊर्जा सुरक्षा केवल उत्पादन बढ़ाने तक सीमित नहीं है, बल्कि इसकी उपलब्धता और आपूर्ति में निरंतरता भी उतनी ही महत्वपूर्ण है।
जयशंकर ने महत्वपूर्ण खनिजों (क्रिटिकल मिनरल्स) के क्षेत्र में भारत की पहल का भी उल्लेख किया। उन्होंने कहा, " भारत का राष्ट्रीय महत्वपूर्ण खनिज मिशन खनिजों की खोज से लेकर उनके पुनर्चक्रण तक की पूरी प्रक्रिया को शामिल करता है। इसके साथ ही भारत ने जी20 के समक्ष महत्वपूर्ण खनिजों के सर्कुलरिटी यानी पुनर्चक्रण और दोबारा उपयोग को बढ़ावा देने की पहल का प्रस्ताव रखा है।"
विदेश मंत्री ने जी20 देशों से ऊर्जा बाजारों को खुला और पूर्वानुमानित बनाए रखने के लिए समझदारी और नेतृत्व दिखाने का आह्वान किया। उन्होंने कहा, " ऊर्जा क्षेत्र में वित्तीय संसाधनों तक पहुंच बढ़ाने के साथ ऊर्जा भंडारण, छोटे मॉड्यूलर परमाणु रिएक्टरों, हरित हाइड्रोजन और जैव ईंधन को आगे बढ़ाने की जरूरत है।"
इससे पहले बैठक के उद्घाटन सत्र में भी जयशंकर ने वैश्विक चुनौतियों के समाधान के लिए कूटनीति को प्राथमिकता देने की बात कही थी। उन्होंने कहा था कि सैन्य समाधान काम नहीं करेंगे और कूटनीति को मौका दिया जाना चाहिए।
उन्होंने यह भी रेखांकित किया था कि नागरिक जहाजों और नाविकों पर हमलों का सबसे ज्यादा खामियाजा ग्लोबल साउथ के देशों को भुगतना पड़ रहा है। इससे ईंधन, खाद्य पदार्थों और उर्वरकों की उपलब्धता प्रभावित होने के साथ उनकी कीमतों पर भी असर पड़ रहा है। अमेरिकी विदेश मंत्री मार्को रुबियो की मेजबानी में हो रही यह दो दिवसीय बैठक शनिवार को संपन्न होगी।