नई दिल्ली: स्पेशल इंटेंसिव रिवीजन यानी SIR को लेकर चुनाव आयोग के अंदर मतभेद की कथित रिपोर्ट सामने आने के बाद आयोग ने बुधवार को बयान जारी किया। EC ने कहा कि चुनाव आयुक्तों की टिप्पणियों, सुझावों और फैसलों की आंतरिक जांच सामान्य प्रक्रिया का हिस्सा है। वहीं, रिपोर्ट के मुताबिक दो चुनाव आयुक्तों ने कई फैसलों को लेकर लिखित आपत्तियां दर्ज की थीं। इस मुद्दे पर राहुल गांधी समेत कई विपक्षी नेताओं ने चुनाव आयोग की कार्यप्रणाली पर सवाल उठाए हैं।
चुनाव आयोग ने आंतरिक प्रक्रिया बताया
चुनाव आयोग ने कहा कि चुनाव आयुक्तों के लिखित सुझाव, टिप्पणियां और फैसलों की आंतरिक जांच की जाती है। आयोग के मुताबिक यह एक सामान्य प्रक्रिया है, जिसका मकसद काम में पारदर्शिता बनाए रखना और कानूनी नियमों का पालन सुनिश्चित करना है।
SIR को लेकर आयोग के भीतर मतभेद की कथित रिपोर्ट के बीच यह बयान सामने आया है।
दोनों आयुक्तों ने लिखित आपत्तियां जताईं
द इंडियन एक्सप्रेस की रिपोर्ट के मुताबिक, चुनाव आयुक्त सुखबीर सिंह संधू और विवेक जोशी ने आरोप लगाया कि आयोग के कुछ फैसले उनकी जानकारी या मंजूरी के बिना लिए गए।
रिपोर्ट में कहा गया है कि दोनों ने 28 अक्टूबर 2025 से 14 अगस्त 2026 के बीच आयोग के फैसलों पर 14 बार लिखित आपत्ति दर्ज की। इनमें 16 अप्रैल को दर्ज की गई चार आपत्तियां भी शामिल हैं।
इन आपत्तियों की प्रतियां मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार को भी भेजी गई थीं। कुछ आपत्तियां संबंधित काम की निगरानी कर रहे उप चुनाव आयुक्तों को भी भेजी गईं।
बिहार से शुरू हुआ था SIR विवाद
दिए गए विवरण के मुताबिक, यह विवाद जून 2025 में बिहार से शुरू हुए स्पेशल इंटेंसिव रिवीजन के दौरान सामने आया। SIR के तहत 30 राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों की ड्राफ्ट मतदाता सूचियों से 13 करोड़ से ज्यादा नाम हटाए गए हैं।
इसी प्रक्रिया को लेकर राजनीतिक दलों और नेताओं की ओर से अलग-अलग सवाल और प्रतिक्रियाएं सामने आई हैं।
राहुल गांधी और विपक्षी नेताओं की प्रतिक्रिया
राहुल गांधी ने वीडियो जारी कर वोट चोरी को संविधान के खिलाफ बताया। उन्होंने चुनाव आयोग और चुनाव अधिकारियों को लेकर कहा कि समय आने पर उन्हें पकड़ा जाएगा।
सपा प्रमुख अखिलेश यादव ने कहा कि अगर स्वतंत्र संस्था के सदस्यों को निष्पक्ष तरीके से काम करने की आजादी नहीं है या उनकी बात नहीं सुनी जाती, तो यह लोकतंत्र के लिए गंभीर स्थिति है। उन्होंने सुप्रीम कोर्ट से स्वत: संज्ञान लेने की मांग की।
AAP संयोजक अरविंद केजरीवाल ने सवाल उठाया कि जब मतदाता सूची में नाम जोड़ने और हटाने का अधिकार ERO के पास है, तो दिल्ली में बैठे लोग पूरे देश की वोटर लिस्ट कैसे बदल रहे हैं।
TMC की राज्यसभा सदस्य सागरिका घोष ने SIR की कथित खामियों और अव्यवस्था की जिम्मेदारी मुख्य चुनाव आयुक्त पर डाली। वहीं, UBT शिवसेना प्रमुख उद्धव ठाकरे ने महाराष्ट्र, पश्चिम बंगाल और तमिलनाडु में बैलट पेपर से दोबारा चुनाव कराने की बात कही।
ज्ञानेश कुमार को हटाने का मामला भी उठा था
अप्रैल 2026 में जयराम रमेश ने दावा किया था कि विपक्ष के 73 राज्यसभा सांसदों ने मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार को हटाने की मांग को लेकर नोटिस दिया। उनके मुताबिक, नोटिस में ‘साबित कदाचार’ का आरोप लगाया गया था। हालांकि, यहां यह स्पष्ट करना जरूरी है कि ये बातें जयराम रमेश के दावे के तौर पर सामने आई थीं।
कांग्रेस महासचिव केसी वेणुगोपाल ने भी उनके खिलाफ कार्रवाई की मांग की थी। उन्होंने SIR के दौरान वास्तविक मतदाताओं के प्रभावित होने का आरोप लगाते हुए सुप्रीम कोर्ट की निगरानी में जांच की मांग की थी।
इससे पहले लोकसभा में भी हटाने का प्रस्ताव लाया गया था, लेकिन लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला और राज्यसभा सभापति सीपी राधाकृष्णन ने उसे खारिज कर दिया था।
10 राज्यों एवं 3 केंद्र शासित प्रदेशों में पूरा हुआ SIR
SIR के पहले और दूसरे चरण में 10 राज्य और 3 केंद्र शासित प्रदेश शामिल हो चुके हैं। दिए गए विवरण के अनुसार, SIR के बाद बिहार, पश्चिम बंगाल, पुडुचेरी और असम विधानसभा चुनाव में भाजपा जीती है।
केरल में कांग्रेस गठबंधन और तमिलनाडु में TVK ने जीत हासिल की है। असम में स्पेशल रिवीजन यानी SR हुआ था और वहां भी भाजपा सरकार की वापसी हुई।
तीसरे फेज में 16 राज्य एवं 3 केंद्र शासित प्रदेश
चुनाव आयोग ने 14 मई को हरियाणा, झारखंड, उत्तराखंड, दिल्ली और महाराष्ट्र समेत 16 राज्यों और 3 केंद्र शासित प्रदेशों में SIR की घोषणा की थी। इसे SIR का तीसरा चरण बताया गया है।
पूरी प्रक्रिया 30 मई से 23 दिसंबर तक चलेगी। इस दौरान 36.73 करोड़ मतदाताओं का वेरिफिकेशन किया जा रहा है।
इन राज्यों में पंजाब, उत्तराखंड और मणिपुर में अगले साल विधानसभा चुनाव होने हैं। बाकी 13 राज्यों में 2028 और 2029 में चुनाव होने हैं।
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