Mohali. मोहाली। पंजाब की एक विशेष अदालत (पीएमएलए) ने जालंधर के तत्कालीन सब-पोस्ट मास्टर को छोटे जमाकर्ताओं के 16.56 करोड़ रुपए के धन शोधन से जुड़े मामले में 18 महीने के कठोर कारावास की सजा सुनाई है। ईडी के एक अधिकारी ने सोमवार को यह जानकारी दी। प्रवर्तन निदेशालय (ईडी), जालंधर जोनल कार्यालय ने जालंधर के नकोदर जिले के दखनी गेट स्थित तत्कालीन सब-पोस्ट मास्टर संजीव कुमार को 54 फर्जी डाकघर बचत खाते खोलकर सार्वजनिक धन के गबन के मामले में दोषी ठहराया।
ईडी ने बताया कि एसएएस नगर (मोहाली) स्थित विशेष अदालत (पीएमएलए) ने संजीव कुमार को 14 सितंबर को धन शोधन निवारण अधिनियम (पीएमएलए) 2002 की धारा 3 के तहत धन शोधन का दोषी पाया, जिस पर धारा 4 के तहत दंडनीय अपराध है। तत्कालीन सब-पोस्ट मास्टर को एक वर्ष छह महीने के कठोर कारावास और 50,000 रुपए के जुर्माने की सजा सुनाई गई। जुर्माना न भरने की स्थिति में उन्हें तीन महीने का अतिरिक्त कठोर कारावास भुगतना होगा।
ईडी ने बताया कि पीएमएलए जांच सीबीआई द्वारा 1 फरवरी, 2018 को संजीव कुमार और अन्य आरोपियों के खिलाफ दर्ज एफआईआर के आधार पर शुरू की गई थी। यह एफआईआर जालंधर जिले के नकोदर स्थित दखनी गेट के सब-पोस्ट मास्टर के पद के दुरुपयोग, गबन और धोखाधड़ी के आरोपों से संबंधित थी।
ईडी की जांच में पता चला है कि संजीव कुमार ने कथित तौर पर 54 फर्जी बचत खाते खोले और सरकारी खजाने को 3.40 करोड़ रुपए का नुकसान पहुंचाया, 41 बचत खातों में हेराफेरी करके 2.79 करोड़ रुपए का नुकसान पहुंचाया, 51 आरडी खातों में हेराफेरी करके 1.89 करोड़ रुपए का नुकसान पहुंचाया और ग्राहकों के पीपीएफ और सावधि जमा जैसे अन्य खातों में हेराफेरी करके धोखाधड़ी से 8.48 करोड़ रुपए की सरकारी धनराशि निकाल ली। ईडी ने एक आधिकारिक बयान में यह जानकारी दी।
ईडी ने बताया कि आरोपियों ने यह धनराशि नकद में और अपने तथा अपने सहयोगियों द्वारा संचालित कई बैंक खातों के माध्यम से निकाली। ईडी ने कहा कि इन आपराधिक गतिविधियों के माध्यम से आरोपियों ने भारी मात्रा में अपराध से प्राप्त धनराशि (पीओसी) अर्जित की और इसका उपयोग विलासितापूर्ण जीवन शैली बनाए रखने, जुआ खेलने, व्यक्तिगत खर्चों और अचल संपत्तियों की खरीद में किया।
ईडी ने कहा कि जांच के दौरान, ईडी ने 2 मार्च, 2025 के अनंतिम कुर्की के माध्यम से 42 लाख रुपए मूल्य की चल और अचल संपत्तियों को अनंतिम रूप से कुर्क किया और बाद में 20 अगस्त, 2025 को इस कार्रवाई की पुष्टि की। ईडी ने बताया कि मुकदमे की सुनवाई के दौरान, आरोपियों ने भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता, 2023 (बीएनएसएस) के प्रावधानों के तहत स्वेच्छा से प्ली बार्गेनिंग के माध्यम से मामले का निपटारा करने का अनुरोध किया।
विशेष न्यायालय ने याचिका स्वीकार कर संजीव कुमार को पीएमएलए की धारा 3 के तहत अपराध के लिए दोषी ठहराया, जो धारा 4 के तहत दंडनीय है। ईडी ने बताया कि विशेष न्यायालय ने यह भी निर्देश दिया कि आरोपी से वसूल की गई राशि कपूरथला मंडल के डाकघर अधीक्षक कार्यालय को देय होगी और पीड़ित विभाग को पीएमएलए की धारा 8(8) के तहत, संपत्ति बहाली नियम, 2016 के साथ, कुर्क की गई संपत्ति (यदि कोई हो) के संबंध में आवेदन करने का अधिकार होगा।
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