करोडो के पोंजी घोटाले में ED का बड़ा एक्शन, मास्टरमाइंड समेत 5 के खिलाफ शिकायत दाखिल
मंगलुरु। प्रवर्तन निदेशालय (ED) ने 2,459 करोड़ रुपये के कथित पोंजी घोटाले से जुड़े मनी लॉन्ड्रिंग मामले में बड़ी कानूनी कार्रवाई की है। ईडी के मंगलुरु उप-क्षेत्रीय कार्यालय ने 9 अक्टूबर 2026 को मंगलुरु के तृतीय अतिरिक्त जिला एवं सत्र न्यायाधीश की अदालत में अभियोजन शिकायत (प्रॉसिक्यूशन कंप्लेंट) दाखिल की है। इस शिकायत में कथित मुख्य आरोपी शिवानंद सिद्धप्पा नीलन्नावर और उनकी फर्म मेसर्स शिवम एसोसिएट्स सहित कुल पांच आरोपियों एवं संस्थाओं के खिलाफ दोषसिद्धि की मांग की गई है।
ईडी के अनुसार, यह मामला करीब 2,459 करोड़ रुपये के पोंजी घोटाले से संबंधित है। जांच एजेंसी ने मनी लॉन्ड्रिंग से जुड़े आरोपों के आधार पर अदालत का रुख किया है। अभियोजन शिकायत दाखिल होने के बाद मामले में आगे की कानूनी प्रक्रिया अदालत के समक्ष चलेगी। इस मामले में शिवानंद सिद्धप्पा नीलन्नावर को ईडी ने कथित घोटाले का मुख्य आरोपी बताया है। उनकी फर्म मेसर्स शिवम एसोसिएट्स का नाम भी अभियोजन शिकायत में शामिल है। कुल पांच व्यक्तियों और संस्थाओं को आरोपी बनाया गया है। हालांकि, उपलब्ध जानकारी में अन्य आरोपियों के नाम और उनकी कथित भूमिकाओं का विवरण नहीं दिया गया है।
पोंजी स्कीम सामान्य तौर पर ऐसी धोखाधड़ी वाली निवेश व्यवस्था होती है, जिसमें नए निवेशकों से प्राप्त धन का इस्तेमाल पुराने निवेशकों को भुगतान करने के लिए किया जाता है। ऐसी योजनाओं में निवेशकों को आकर्षित करने के लिए अधिक मुनाफे का लालच दिया जा सकता है। हालांकि, इस विशेष मामले में निवेशकों से धन जुटाने के तरीके, भुगतान व्यवस्था और कथित धोखाधड़ी की विस्तृत जानकारी उपलब्ध बयान में स्पष्ट नहीं की गई है।
ईडी की ओर से दाखिल अभियोजन शिकायत मनी लॉन्ड्रिंग के आरोपों से संबंधित कानूनी कार्रवाई का हिस्सा है। ऐसे मामलों में जांच एजेंसी अदालत के समक्ष अपनी जांच से जुड़े तथ्य और साक्ष्य प्रस्तुत करती है। इसके आधार पर न्यायालय आगे की प्रक्रिया निर्धारित करता है। मंगलुरु स्थित तृतीय अतिरिक्त जिला एवं सत्र न्यायाधीश की अदालत में शिकायत दाखिल करने की तारीख 9 अक्टूबर 2026 बताई गई है। ईडी ने इस मामले में आरोपियों को दोषी ठहराए जाने की मांग की है। हालांकि, अभियोजन शिकायत दाखिल किए जाने का अर्थ यह नहीं है कि आरोपियों का अपराध अदालत में सिद्ध हो चुका है। दोषसिद्धि का अंतिम निर्णय न्यायिक प्रक्रिया पूरी होने के बाद ही होगा।
इस मामले में 2,459 करोड़ रुपये की राशि विशेष रूप से महत्वपूर्ण है। इतनी बड़ी रकम से जुड़े कथित वित्तीय घोटाले में जांच एजेंसी की कार्रवाई के बाद अब न्यायिक प्रक्रिया पर ध्यान केंद्रित होगा। हालांकि, यह स्पष्ट नहीं किया गया है कि कथित घोटाले की कुल राशि में से कितनी रकम बरामद की गई है या कितनी संपत्ति जब्त अथवा कुर्क की गई है। ईडी के उपलब्ध बयान में यह भी नहीं बताया गया है कि इस कथित पोंजी घोटाले से कितने निवेशक प्रभावित हुए हैं। इसके अलावा निवेशकों की रकम की वापसी, आरोपियों की गिरफ्तारी और अन्य वित्तीय लेनदेन से संबंधित विस्तृत जानकारी भी सामने नहीं आई है।
मनी लॉन्ड्रिंग के मामलों में अभियोजन शिकायत दाखिल करना एक महत्वपूर्ण कानूनी कदम माना जाता है। इसके जरिए जांच एजेंसी अदालत से संबंधित आरोपों पर न्यायिक कार्रवाई आगे बढ़ाने का अनुरोध करती है। आरोपियों को अपना पक्ष रखने और आरोपों का बचाव करने का अवसर भी न्यायिक प्रक्रिया के तहत मिलता है।
फिलहाल ईडी ने शिवानंद सिद्धप्पा नीलन्नावर, मेसर्स शिवम एसोसिएट्स और अन्य आरोपियों एवं संस्थाओं के खिलाफ अदालत में अभियोजन शिकायत दाखिल कर दी है। अब इस मामले में अदालत की आगामी कार्यवाही महत्वपूर्ण होगी। जांच एजेंसी ने 2,459 करोड़ रुपये के कथित पोंजी घोटाले से संबंधित मनी लॉन्ड्रिंग के आरोपों में दोषसिद्धि की मांग की है।