TMC. टीएमसी। डॉ. राजेंद्र प्रसाद राजकीय आयुर्विज्ञान चिकित्सा महाविद्यालय टांडा के रेडियोथेरेपी एवं ऑन्कोलॉजी विभाग की ओर से स्तन कैंसर के प्रति जागरूकता बढ़ाने के उद्देश्य से भव्य वॉकथॉन का आयोजन किया गया। वॉकथॉन में चिकित्सकों, नर्सिंग विद्यार्थियों और एलाइड हेल्थ केयर के विद्यार्थियों ने बड़ी संख्या में भाग लेकर लोगों को स्तन कैंसर की समय पर पहचान और नियमित जांच के लिए जागरूक किया। कार्यक्रम की रूपरेखा रेडियोथेरेपी एवं ऑन्कोलॉजी विभाग की विभागाध्यक्ष डॉ. पूर्वा व्यास की पहल पर तैयार की गई। कार्यक्रम में टांडा मेडिकल कॉलेज के प्राचार्य डॉ. मिलाप शर्मा ने मुख्य अतिथि के रूप में शिरकत की और हरी झंडी दिखाकर वॉकथॉन का शुभारंभ किया। उन्होंने कहा कि स्तन कैंसर की समय रहते पहचान होने पर इसका उपचार काफी प्रभावी ढंग से किया जा सकता है। महिलाओं को अपने स्वास्थ्य के प्रति सजग रहते हुए नियमित जांच करवानी चाहिए। वॉकथॉन में टेमकोट के अध्यक्ष डॉ. विवेक सूद, डॉ. प्रीति, डॉ. अंजली, डॉ. शलीन सहित अन्य चिकित्सकों और टेमकोट सदस्यों ने हिस्सा लिया।

बीएससी नर्सिंग तथा एलाइड हेल्थ केयर के विद्यार्थियों ने भी उत्साहपूर्वक भाग लेकर जागरूकता का संदेश जन-जन तक पहुंचाया। प्रतिभागियों के हाथों में स्तन कैंसर से बचाव और समय पर जांच से संबंधित संदेश लिखी तख्तियां थीं। कार्यक्रम की खास बात यह रही कि चिकित्सकों, नर्सिंग विद्यार्थियों और अन्य प्रतिभागियों ने गुलाबी रंग के कपड़े, कैप और रिबन पहनकर स्तन कैंसर के खिलाफ एकजुटता का संदेश दिया। पूरे आयोजन के दौरान टांडा परिसर गुलाबी रंग में रंगा नजर आया। इस अवसर पर विशेषज्ञों और नर्सिंग छात्राओं ने
महिलाओं
को स्तन की स्वयं जांच करने की सही विधि का व्यावहारिक प्रदर्शन भी किया। महिलाओं को समझाया गया कि शरीर में किसी भी असामान्य बदलाव, गांठ या अन्य संदिग्ध लक्षण को नजरअंदाज न करें और समय रहते चिकित्सकीय सलाह लें। कार्यक्रम के दौरान कैंसर के खिलाफ जंग लड़ने वाली डॉ. अंजली सूद और वार्ड सिस्टर सीमा कटोच ने अपनी प्रेरणादायक कहानी साझा की। उनकी व्यक्तिगत संघर्ष और हौसले की कहानी ने कार्यक्रम में मौजूद लोगों को भावुक करने के साथ-साथ बीमारी से लड़ने का साहस भी दिया। यह आयोजन महज एक जागरूकता वॉकथॉन तक सीमित नहीं रहा, बल्कि उम्मीद, हौसले और सतर्कता का संदेश बनकर सामने आया। कार्यक्रम के माध्यम से समाज को स्पष्ट संदेश दिया गया कि स्तन कैंसर से डरने के बजाय जागरूक रहने, नियमित जांच करवाने और बीमारी की समय पर पहचान करने की जरूरत है।
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