कंकाल के दांत का DNA हुआ मैच, फिर भी परिजन नहीं मान रहे मौत की पुष्टि

पुष्पा कुमारी केस में हुआ बड़ा खुलासा

Update: 2026-06-25 12:08 GMT
Bokaro. बोकारो। झारखंड के बहुचर्चित पुष्पा कुमारी लापता मामले में गुरुवार को झारखंड हाईकोर्ट में हुई सुनवाई के दौरान एक महत्वपूर्ण वैज्ञानिक तथ्य सामने आया है। करीब 11 महीने पहले लापता हुई 18 वर्षीय युवती पुष्पा कुमारी के मामले में कोलकाता स्थित सेंट्रल फॉरेंसिक साइंस लेबोरेटरी (CFSL) की डीएनए जांच रिपोर्ट ने जांच को नई दिशा दे दी है। अदालत को बताया गया कि बरामद किए गए नरकंकाल के दांत से प्राप्त डीएनए नमूना पुष्पा कुमारी के डीएनए प्रोफाइल से मेल खाता है। हालांकि पूरे कंकाल का डीएनए अब तक उसके माता-पिता के डीएनए से पूरी तरह मैच नहीं हुआ है, जिसके कारण मामला अभी भी विवादों और सवालों के घेरे में बना हुआ है। यह मामला बोकारो जिले के पिंडराजोरा थाना क्षेत्र का है। यहां की रहने वाली पुष्पा कुमारी 31 जुलाई 2025 को रहस्यमय परिस्थितियों में लापता हो गई थी। परिवार ने उसकी काफी तलाश की, लेकिन कोई सुराग नहीं मिला।

बेटी के लापता होने के कई महीनों बाद भी पुलिस द्वारा संतोषजनक कार्रवाई नहीं किए जाने का आरोप लगाते हुए उसकी मां रेखा देवी ने झारखंड हाईकोर्ट में हेबियस कॉर्पस याचिका दायर की थी। याचिका में बेटी की बरामदगी और मामले की निष्पक्ष जांच की मांग की गई थी। जांच के दौरान पुलिस ने तकनीकी साक्ष्यों, मोबाइल लोकेशन और पूछताछ के आधार पर दिनेश कुमार महतो नामक युवक को गिरफ्तार किया था। पुलिस का दावा है कि पूछताछ के दौरान आरोपी ने पुष्पा की हत्या करने की बात स्वीकार की थी। आरोपी की निशानदेही पर एक
स्थान से नरकंकाल बरामद
किया गया था। पुलिस ने दावा किया था कि यह कंकाल पुष्पा का ही है। हालांकि मृतका के परिजनों ने शुरू से ही पुलिस के इस दावे पर सवाल उठाए। परिवार का कहना था कि बरामद नरकंकाल उनकी बेटी का नहीं है और जांच में कई विसंगतियां हैं। इसी कारण मामले ने कानूनी मोड़ ले लिया और हाईकोर्ट के हस्तक्षेप के बाद वैज्ञानिक जांच के आदेश दिए गए। हाईकोर्ट के निर्देश पर बरामद नरकंकाल तथा पुष्पा के परिजनों के डीएनए नमूने कोलकाता स्थित सीएफएसएल भेजे गए थे।

गुरुवार को अदालत में प्रस्तुत रिपोर्ट में बताया गया कि कंकाल के दांत से निकाले गए डीएनए नमूने का मिलान पुष्पा के डीएनए प्रोफाइल से हुआ है। यह जांच का महत्वपूर्ण पहलू माना जा रहा है, क्योंकि दांतों से प्राप्त डीएनए लंबे समय तक सुरक्षित रह सकता है और पहचान में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है। हालांकि जांच रिपोर्ट में यह भी स्पष्ट किया गया कि पूरे कंकाल का डीएनए अभी तक पुष्पा के माता-पिता के डीएनए से पूरी तरह मेल नहीं खाया है। यही कारण है कि परिजन अभी भी पुलिस के निष्कर्षों को स्वीकार करने के लिए तैयार
नहीं हैं। उनका कहना
है कि जब तक सभी वैज्ञानिक प्रमाण पूरी तरह स्पष्ट नहीं हो जाते, तब तक यह मान लेना उचित नहीं होगा कि बरामद कंकाल उनकी बेटी का ही है। सुनवाई के दौरान विशेष जांच दल (SIT) के सदस्य भी अदालत में मौजूद रहे। हाईकोर्ट ने मामले को गंभीर मानते हुए निचली अदालत में चल रही कार्यवाही की विस्तृत जानकारी मांगी है। इसके साथ ही राज्य सरकार से यह भी पूछा है कि जांच में कथित लापरवाही बरतने वाले पुलिस अधिकारियों के खिलाफ अब तक क्या कार्रवाई की गई है।
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