AISA अध्यक्ष नेहा बोरा को दिल्ली हाईकोर्ट से झटका
10 हजार के बॉन्ड नोटिस पर याचिका खारिज
दिल्ली। ऑल इंडिया स्टूडेंट्स एसोसिएशन (AISA) की अध्यक्ष नेहा बोरा को दिल्ली हाईकोर्ट से राहत नहीं मिली है। अदालत ने स्पेशल एग्जीक्यूटिव मजिस्ट्रेट (SEM) की ओर से जारी नोटिस को चुनौती देने वाली उनकी याचिका खारिज कर दी है। नोटिस में उन्हें मजिस्ट्रेट के सामने पेश होने और शांति बनाए रखने के लिए 10 हजार रुपये का बॉन्ड भरने को कहा गया था। हालांकि, हाईकोर्ट ने मजिस्ट्रेट को आगे की प्रक्रिया में कानूनी प्रावधानों का पालन करने के निर्देश भी दिए हैं।
चुनाव आयोग के खिलाफ प्रदर्शन से जुड़ा मामला
जानकारी के अनुसार, चुनाव आयोग के खिलाफ आयोजित विरोध मार्च के दौरान विभिन्न संगठनों और नेताओं ने प्रदर्शन किया था। इसी मामले में नेहा बोरा को स्पेशल एग्जीक्यूटिव मजिस्ट्रेट की ओर से नोटिस जारी किया गया। नोटिस के तहत उन्हें मजिस्ट्रेट के समक्ष उपस्थित होने और शांति बनाए रखने के लिए 10 हजार रुपये का बॉन्ड भरने को कहा गया था। नेहा बोरा ने इस नोटिस को दिल्ली हाईकोर्ट में चुनौती दी थी।
दिल्ली पुलिस ने किया याचिका का विरोध
मामले की सुनवाई के दौरान दिल्ली पुलिस ने नेहा बोरा की याचिका का विरोध किया। पुलिस की ओर से दलील दी गई कि याचिका सुनवाई योग्य नहीं है। दोनों पक्षों की दलीलें सुनने के बाद हाईकोर्ट ने याचिका खारिज कर दी। हालांकि, अदालत ने स्पष्ट किया कि याचिका खारिज होने का मतलब यह नहीं है कि मजिस्ट्रेट बिना आवश्यक कानूनी प्रक्रिया पूरी किए बॉन्ड भरने का आदेश दे सकते हैं।
मजिस्ट्रेट को उपलब्ध कराना होगा पूरा रिकॉर्ड
हाईकोर्ट के न्यायमूर्ति सुब्रमण्यम प्रसाद ने निर्देश दिया कि नेहा बोरा को मामले से संबंधित सभी जरूरी दस्तावेज और सामग्री उपलब्ध कराई जाए। इससे उन्हें अपने खिलाफ शुरू की गई प्रक्रिया का आधार समझने और अपना पक्ष रखने का अवसर मिलेगा। अदालत ने यह भी कहा कि मजिस्ट्रेट भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता (BNSS) की धारा 135 के तहत विचार करें कि बॉन्ड प्रारंभिक चरण में ही लिया जाना आवश्यक है या जांच के दौरान सामने आने वाले तथ्यों के आधार पर फैसला किया जाना चाहिए।
अब मजिस्ट्रेट के फैसले पर नजर
नेहा बोरा की याचिका खारिज होने के बावजूद बॉन्ड से जुड़ी प्रक्रिया में कानूनी सुरक्षा उपाय लागू रहेंगे। मामले में आगे की कार्रवाई मजिस्ट्रेट के स्तर पर होगी। हाईकोर्ट का विस्तृत लिखित आदेश सामने आने के बाद स्थिति और स्पष्ट होगी।