'अंतरिक्ष को छू रहे बेटियों के सपने': पीएम मोदी ने सराहा 'मिशन शक्तिसैट'
नई दिल्ली: प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने रविवार को भारत में महिलाओं के नेतृत्व वाले इनोवेशन पर ज़ोर दिया और 'मिशन शक्तिसैट' (Mission ShaktiSAT) पहल की तारीफ़ की। इस पहल के तहत 100 से ज़्यादा देशों की लड़कियों को स्पेस टेक्नोलॉजी सीखने और इनोवेशन के क्षेत्र में आगे बढ़ने का मौका मिल रहा है।
'मिशन शक्तिसैट' एक ग्लोबल स्पेस पहल है जो 108 देशों की 12,000 लड़कियों को स्पेस टेक्नोलॉजी और STEM शिक्षा से जोड़ती है। इस मिशन का मकसद लड़कियों को साइंस और टेक्नोलॉजी के क्षेत्र में सशक्त बनाना और उन्हें स्पेस साइंस की बारीकियां सिखाना है - जैसे सैटेलाइट बनाने से लेकर स्पेस साइंस तक की जानकारी देना।
यह पहल न सिर्फ़ भारतीय छात्रों को, बल्कि दुनिया भर के छात्रों को एक साथ ला रही है, ताकि वे मिलकर इनोवेशन कर सकें और भविष्य में स्पेस सेक्टर में भारत का नाम रोशन कर सकें।
अपने मासिक रेडियो कार्यक्रम 'मन की बात' के 137वें एपिसोड में बोलते हुए पीएम मोदी ने कहा, "आज हमारी बेटियों के सपनों की उड़ान ज़मीन से अंतरिक्ष तक पहुँच रही है। और आपको यह जानकर गर्व होगा कि भारत दुनिया भर से ऐसी हज़ारों बेटियों को एक साथ ला रहा है जो ऐसे सपने देख रही हैं। इस पहल का नाम 'मिशन शक्तिसैट' है।"
प्रधानमंत्री ने बताया कि 'मिशन शक्तिसैट' के ज़रिए 108 देशों की 12,000 छात्राओं को सैटेलाइट टेक्नोलॉजी सीखने और इनोवेशन के क्षेत्र में आगे बढ़ने का मौका मिल रहा है।
पीएम मोदी ने बताया कि 23 अगस्त को, जिसे 'नेशनल स्पेस डे' के तौर पर मनाया जाता है, उत्तर प्रदेश के ग्रेटर नोएडा में इस मिशन की एक "शानदार झलक" देखने को मिली।
उन्होंने कहा, "'मिशन शक्तिसैट' का दूसरा चरण गौतम बुद्ध यूनिवर्सिटी में शुरू किया गया। इस मौके पर भारत और कई अन्य देशों की लगभग 100 छात्राएं एक साथ आईं। भारत के दूर-दराज़ इलाकों से चुनी गई छात्राएं भी इसमें हिस्सा ले रही हैं।"
प्रधानमंत्री ने कहा, "इस पूरी पहल का मकसद वाकई खास है: एक ऐसे सैटेलाइट को चंद्रमा की कक्षा (लूनर ऑर्बिट) में भेजने की तैयारी चल रही है, जिसे पूरी तरह से छात्राओं की भागीदारी से तैयार किया गया है।"
उन्होंने कहा, "मुझे पूरा भरोसा है कि इनमें से कई छात्राएं भविष्य में साइंस, टेक्नोलॉजी और इनोवेशन के क्षेत्र में अपनी एक अलग पहचान बनाएंगी।"