सावधान ग्राहक! सेहत से खिलवाड़, चटनी के नाम पर बिक रहा 'लाल केमिकल'

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Update: 2025-10-27 03:26 GMT
गोरखपुर: होटल, रेस्टोरेंट या फिर ठेले-खोमचे पर चाट-पकौड़ी, मोमो आदि के साथ मिलने वाली चटनी के चटकारे अगर आप भी ले रहे हैं तो सावधान रहने की जरूरत है। स्वाद भले मिल रहा हो, पर सेहत बिगड़ सकती है। इसमें न तो टमाटर है न ही मिर्च, केमिकल और कद्दू आदि कुछ सब्जियों को मिलाकर बनाई गई चटनी स्वास्थ्य के लिए यह चटनी बेहद हानिकारक है। खाद्य सुरक्षा विभाग की जांच रिपोर्ट में भी यह बात साबित हुई है।
खाद्य सुरक्षा विभाग की जांच में साबित हो गया है कि लाल दिखने वाली चटनी में टमाटर और लाल मिर्च नहीं है, बल्कि रंग और रसायन है। यह रसायन इतना खतरनाक है कि इसे नियमित तौर पर खाने वालों की सेहत खराब हो सकती है। खाद्य सुरक्षा विभाग ने गोरखपुर और आसपास के प्रमुख कस्बों से चटनी के 14 नमूने लिए थे, जिनमें से 11 फेल हो गए हैं। तीन नमूनों की रिपोर्ट मानक के अनुसार सही निकली, जबकि नौ अधोमानक पाए गए हैं। वहीं दो नमूने असुरक्षित मिले हैं। कारोबारी ने अपील करके दूसरे नमूने की जांच कराई तो दूसरी बार भी रिपोर्ट असुरक्षित आई है। इसके बाद विभाग और सतर्क हुआ है।
जानकारों के अनुसार मिलावटखोर कद्दू और आलू से चटनी बना रहे हैं। इसमें रसायनों से रंग और स्वाद ला रहे हैं। दोनों सब्जियां सस्ती है, इसके पेस्ट को चटनी के रूप में प्रयोग किया जा रहा है। गृह विज्ञान विभाग की असिस्टेंट प्रोफेसर डॉ. कुमुद त्रिपाठी बताती हैं कि आलू और कद्दू से नुकसान नहीं है, लेकिन चटनी में इनके साथ मिलाया जाने वाला रसायन स्वास्थ्य के लिए हानिकारक है। बाजार की चटनी खाने से बचना चाहिए, अच्छी गुणवत्ता के लिए घर में बनानी चाहिए।
खाद्य सुरक्षा विभाग के सहायक आयुक्त डॉ.सुधीर कुमार सिंह ने कहा कि चटनी के एक और नमूने की रिपोर्ट असुरक्षित आई है। इस मामले में विधिक कार्रवाई की जा रही है। चटनी के मामले में नियमित तौर पर जांच की जा रही है। शहर के साथ प्रमुख कस्बों में भी जांच की जाएगी।
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