नई दिल्ली: दीपावली का त्योहार पर महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस ने इस बार किसानों के बीच पहुंचकर त्योहार की खुशियां साझा कीं। उन्होंने नागपुर जिले के लोहारी सावंगा गांव में किसानों के साथ दीपावली मनाई और स्थानीय किसान परिवार अरुणाबाई बालपांडे और रामभाऊ बालपांडे के घर पर रात बिताई।
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने सीएम फडणवीस के इस कदम की सराहना करते हुए इसे बेहद भावुक कर देने वाला बताया है। पीएम मोदी ने मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस के 'एक्स' पोस्ट को रिपोस्ट करते हुए लिखा कि महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री का नागपुर जिले के नरखेड़ स्थित लोहारी सावंगा गांव में किसानों के साथ दीपावली मनाना और अरुणाबाई तथा रामभाऊ बालपांडे के घर पर रुकना दिल को छू लेने वाला कदम है। यह दिखाता है कि महाराष्ट्र में एनडीए सरकार किसानों के प्रति संवेदनशीलता के साथ काम कर रही है और उनके कल्याण को सुनिश्चित करने के लिए प्रयासरत है।
बता दें कि मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस ने अपने पोस्ट में लिखा था कि किसानों की आंखों से आंसू पोंछना ही उनके लिए दीपावली का असली अर्थ है। उन्होंने बताया कि उन्हें नागपुर जिले के लोहारी सावंगा गांव में अपने किसान भाइयों के साथ दीपावली मनाने का अवसर मिला। यह गांव ऐतिहासिक हेमाडपंथी शिव मंदिर की विरासत और कन्हान नदी की प्राकृतिक सुंदरता के लिए जाना जाता है।
सीएम फडणवीस ने बताया कि सूखे से जूझ रहे किसानों की परेशानियां, उनके परिवारों की चिंता और भविष्य को लेकर उनकी आशंकाएं सुनकर उनका मन भावुक हो गया। इस दौरान बालपांडे परिवार ने जिस अपनत्व, प्रेम और गर्मजोशी से उनका स्वागत किया, उसने उन्हें गहराई से प्रभावित किया।
मुख्यमंत्री ने कहा कि पूरे देश में दीपावली उत्साह के साथ मनाई जा रही है, लेकिन राज्य के किसान इस समय कई तरह की परेशानियों से घिरे हैं। प्राकृतिक आपदा के कारण फसलें बर्बाद हो रही हैं। आर्थिक तंगी के साथ-साथ किसानों को अपने बच्चों की पढ़ाई और परिवार के भविष्य की भी चिंता सता रही है।
मुख्यमंत्री ने बताया कि जब उन्होंने लोहारी सावंगा के किसानों से बातचीत की और उनकी समस्याएं सुनीं तो उनके चेहरों पर धीरे-धीरे तनाव कम होता दिखाई दिया। किसानों ने उनसे कहा कि साहब, आप इतनी दूर हमारे गांव आए और हमारे सुख-दुख में शामिल हुए, इससे ही हमारा आधा दर्द कम हो गया। किसानों की यह बात उनके दिल को छू गई।
सीएम फडणवीस ने कहा कि महाराष्ट्र के हर किसान की फसल उनके लिए केवल एक कृषि उत्पाद नहीं है, बल्कि उसमें पूरे परिवार की सालभर की मेहनत, त्याग और सपने जुड़े होते हैं। हर फसल परिवार के बेहतर भविष्य की उम्मीद होती है। ऐसे में जब प्रकृति की मार से फसल बर्बाद होती है तो किसान के परिवार का भविष्य भी संकट में पड़ जाता है।
मुख्यमंत्री ने बताया कि उन्होंने किसानों के साथ रबी की फसलों को नुकसान से बचाने के उपायों पर चर्चा की। सूखे की स्थिति को देखते हुए जहां भी संभव होगा, वहां बोरवेल खोदने की अनुमति दी जाएगी।
उन्होंने यह भी बताया कि काटोल और नरखेड़ क्षेत्र में संतरे के साथ-साथ मौसंबी का भी बड़े पैमाने पर उत्पादन होता है। हालांकि, अंतरराष्ट्रीय स्तर पर निर्यात से जुड़ी नई चुनौतियों के कारण किसानों को नुकसान उठाना पड़ रहा है। इस समस्या को देखते हुए नागपुर के 'मिहान' प्रोजेक्ट के तहत संतरे और मौसंबी के प्रसंस्करण के लिए एक बड़ी परियोजना स्थापित करने की योजना बनाई जा रही है। सीएम फडणवीस ने कहा कि इस पूरी प्रक्रिया में किसानों को किसी तरह की परेशानी न हो, इसके लिए जरूरी सावधानियां बरती जाएंगी।
उन्होंने कहा कि उनका प्रयास केवल मंत्रालय में बैठकें करने, फैसले लेने, योजनाएं बनाने या आर्थिक सहायता देने तक सीमित नहीं है। वे किसानों के बीच बैठकर उनकी समस्याएं समझना, उनका दर्द बांटना और उन्हें दोबारा अपने पैरों पर खड़ा होने में मदद करना चाहते हैं।
इस मौके पर महाराष्ट्र के मंत्री चंद्रशेखर बावनकुले, विधायक डॉ. आशीष देशमुख और अन्य गणमान्य लोग भी मौजूद थे।