नई दिल्ली: क्या सोशल मीडिया पर सरकार की आलोचना करना अब किसी के अकाउंट की पहुंच पर भारी पड़ सकता है? क्या किसी पोस्ट को रिपोर्ट किए जाने के बाद बिना पूरी जांच के कंटेंट ब्लॉक कर दिया जाता है? कॉकरोच जनता पार्टी यानी CJP के मुख्य प्रवक्ता सौरव दास ने Meta और सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म्स को लेकर ऐसे ही सवाल खड़े किए हैं। उन्होंने दावा किया है कि उनके सोशल मीडिया अकाउंट्स को लगातार निशाना बनाया जा रहा है और इसका असर उनकी पोस्ट की रीच पर भी पड़ रहा है।
सौरव दास ने शनिवार, 12 सितंबर को एक्स पर एक पोस्ट के जरिए अपनी बात रखी। उन्होंने आरोप लगाया कि उनके सोशल मीडिया अकाउंट्स को लगातार टारगेट किया जा रहा है। इसी पोस्ट में उन्होंने बताया कि किसी नय्यर गितेश ने अक्षत त्रिपाठी के साथ उनके वीडियो को रिपोर्ट किया है।
सौरव दास ने अक्षत त्रिपाठी का जिक्र करते हुए कहा कि वह 20 साल का छात्र है और उसके मामले में ग्रेटर नोएडा अथॉरिटी की ओर से 5 लाख रुपये का बेल बॉन्ड जारी किया गया था। हालांकि, सोशल मीडिया पोस्ट में सौरव ने इस रिपोर्टिंग की प्रक्रिया और उसके आधार को लेकर सवाल उठाए।
सबसे बड़ा सवाल उन्होंने सोशल मीडिया कंपनी Meta से किया है। सौरव दास ने पूछा कि क्या Meta में किसी कंटेंट को ब्लॉक करने से पहले सही तरीके से जांच-पड़ताल नहीं होती? उनका कहना है कि इस तरह की कार्रवाई से उनके अकाउंट की पहुंच कम हो रही है।
यानी मामला सिर्फ एक पोस्ट के ब्लॉक होने तक सीमित नहीं है। सौरव दास का दावा है कि उनके सोशल मीडिया अकाउंट की रीच पर भी इसका असर पड़ रहा है। उन्होंने सोशल मीडिया कंपनियों से अपील की कि किसी भी अकाउंट या पोस्ट के खिलाफ कार्रवाई करने से पहले उचित जांच की जानी चाहिए।
सरकार पर भी साधा निशाना
सौरव दास ने इस पूरे मामले को लेकर मोदी सरकार पर भी निशाना साधा। उन्होंने सोशल मीडिया कंपनियों से अपील करते हुए कहा कि उन्हें सरकार के दबाव में नहीं आना चाहिए।
सौरव ने अपनी पोस्ट के साथ अपने अकाउंट का स्क्रीनशॉट भी शेयर किया है। स्क्रीनशॉट में कॉपीराइट वायलेशन से जुड़ा नोटिस दिखाई दे रहा है, जिसमें कंटेंट ब्लॉक किए जाने की जानकारी दी गई है। उनके मुताबिक, 10 सितंबर को Instagram पर पोस्ट किए गए कंटेंट को ब्लॉक किया गया।
हालांकि, इस मामले में Meta की ओर से क्या वजह बताई गई है और रिपोर्ट किए गए वीडियो की समीक्षा किस प्रक्रिया के तहत हुई, इस बारे में सौरव दास की पोस्ट में विस्तृत जानकारी नहीं दी गई है। इसलिए उनके लगाए आरोपों को उनके दावे के तौर पर ही देखा जाना चाहिए।
कौन हैं सौरव दास?
अब सवाल यह भी है कि CJP के प्रवक्ता सौरव दास कौन हैं और उनकी पृष्ठभूमि क्या है? उनके LinkedIn प्रोफाइल के मुताबिक, वह दिल्ली के रहने वाले हैं और खोजी पत्रकार के तौर पर भी काम कर चुके हैं। उन्होंने जर्नलिज्म एंड मास कम्युनिकेशन की पढ़ाई की है।
सौरव दास के मुताबिक, उन्होंने महज 18 साल की उम्र में यानी 2017 में सूचना का अधिकार कानून यानी RTI का इस्तेमाल शुरू किया था। इस दौरान उन्होंने कई मामलों को लेकर जानकारी जुटाई और खुलासे किए।
इसके बाद 2020 में उन्होंने पेशेवर पत्रकार के तौर पर लिखना शुरू किया। उनके लेख कानून, शासन, न्यायपालिका, अपराध और संस्थागत पारदर्शिता जैसे मुद्दों पर केंद्रित रहे हैं। उनके LinkedIn प्रोफाइल के मुताबिक, उनके लेख द कारवां, अल जजीरा, द वायर और द हिंदू समेत कई बड़े मीडिया संस्थानों में प्रकाशित हुए हैं।
फिलहाल सौरव दास के आरोपों के बाद सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म्स पर कंटेंट ब्लॉकिंग और अकाउंट रीच को लेकर बहस फिर तेज हो गई है। सवाल यही है कि किसी पोस्ट पर कार्रवाई से पहले सोशल मीडिया कंपनियां किस तरह की जांच करती हैं और क्या यूजर को उस कार्रवाई के खिलाफ पर्याप्त स्पष्टीकरण या अपील का मौका मिलता है?
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