‘सत्ता बदलने से हालात नहीं सुधरते’, मोहन भागवत ने आंदोलन, एकता और विकास पर क्या कहा?
नागपुर: राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (RSS) के प्रमुख मोहन भागवत ने मंगलवार, 20 अक्टूबर को नागपुर में विजयादशमी उत्सव के दौरान अपने संबोधन में कहा कि भारत में भी बांग्लादेश और फ्रांस जैसे हालात पैदा करने की कोशिशें हो रही हैं। उन्होंने दावा किया कि दुनिया में कुछ ऐसी शक्तियां हैं, जो भारत को अपने प्रभाव में लेना चाहती हैं। उनके मुताबिक, इनका उद्देश्य केवल सत्ता परिवर्तन करना नहीं, बल्कि अपनी पसंद के लोगों को सत्ता में बैठाना है।
भागवत ने कहा कि भारत, हिंदू समाज और संघ को कमजोर करने के प्रयास किए जा रहे हैं। उन्होंने लोगों से ऐसी परिस्थितियों में उत्तेजित होने के बजाय एकता बनाए रखने की अपील की। संघ हर साल विजयादशमी के अवसर पर अपना स्थापना दिवस मनाता है। वर्ष 1925 में इसी दिन RSS की स्थापना हुई थी। कार्यक्रम में भागवत ने शस्त्र पूजन किया और संघ के संस्थापक डॉ. केशवराव बलिराम हेडगेवार को श्रद्धांजलि दी।
भागवत ने अपने भाषण में...
भागवत ने अपने भाषण में आंदोलनों की भूमिका पर भी बात की। उन्होंने कहा कि समाज में समस्याएं पैदा होने पर लोग आंदोलन करते हैं, लेकिन उनका उद्देश्य समाधान निकालना होना चाहिए। यदि किसी आंदोलन से समाज में नफरत और विभाजन बढ़ता है, तो उसका इस्तेमाल किसी दूसरे मकसद के लिए किए जाने की आशंका रहती है।
उन्होंने कहा कि आंदोलन कई बार राजनीति का माध्यम बन जाते हैं और लोगों के बीच विरोध को बढ़ावा देते हैं। भागवत के अनुसार, देश को चलाने में केवल नेताओं की भूमिका नहीं होती, बल्कि समाज की सक्रिय भागीदारी से भी समस्याओं का समाधान निकल सकता है।
RSS प्रमुख मोहन भागवत ने कहा कि भारत के लोगों की सांस्कृतिक जड़ें और पूर्वज साझा हैं। उन्होंने अलग-अलग पहचानों का सम्मान करते हुए समाज को साथ लेकर चलने पर जोर दिया। बंगाल विभाजन का उदाहरण देते हुए उन्होंने कहा कि 1905 का विभाजन चार साल बाद रद्द हुआ, लेकिन 1947 में देश का विभाजन नहीं रोका जा सका। इसके लिए उन्होंने अलगाव की भावना और तुष्टिकरण की राजनीति को जिम्मेदार ठहराया।
उन्होंने लोगों से छोटे-छोटे अहंकार छोड़कर देश के लिए काम करने की अपील की। उनके अनुसार, समाज को जोड़ने और सबको साथ लेकर आगे बढ़ने वाला विचार ही भारत की ताकत बन सकता है।
भागवत ने विकास और तकनीक के इस्तेमाल पर भी अपनी बात रखी। नेपाल में आई बाढ़ का जिक्र करते हुए उन्होंने कहा कि हिमालयी क्षेत्रों में एकतरफा विकास के प्रयास प्रकृति के संतुलन को प्रभावित कर सकते हैं। उन्होंने ऐसे विकास की जरूरत बताई, जिसमें आर्थिक प्रगति के साथ पर्यावरण और नैतिकता का भी ध्यान रखा जाए। उन्होंने कहा कि ज्ञान और तकनीक का विकास जरूरी है, लेकिन इनका इस्तेमाल किस तरह किया जाता है, यह ज्यादा महत्वपूर्ण है। नई तकनीकों के लाभों को स्वीकार करते हुए उन्होंने कहा कि समाज को इनके सही और गलत प्रभावों को समझने की क्षमता भी विकसित करनी होगी।
अपने संबोधन में भागवत ने ...
अपने संबोधन में भागवत ने डिजिटल सामग्री और आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) के उपयोग पर भी चिंता जताई। उन्होंने कहा कि आज लोगों तक बड़ी मात्रा में जानकारी पहुंच रही है, लेकिन बिना सही-गलत समझे उसका इस्तेमाल नुकसान पहुंचा सकता है। उन्होंने OTT प्लेटफॉर्म के लिए नियमों की जरूरत बताई और सरकार तथा प्रशासन से इस विषय पर ध्यान देने की बात कही।
भागवत ने नई पीढ़ी को भविष्य की जिम्मेदारियों के लिए तैयार करने पर भी जोर दिया। उन्होंने कहा कि भारत को दुनिया के सामने एक उदाहरण पेश करना है और इसके लिए तकनीक के साथ विवेक का विकास भी जरूरी है।
विजयादशमी कार्यक्रम में कई प्रमुख हस्तियां शामिल
नागपुर में आयोजित इस कार्यक्रम में पूर्व उपराष्ट्रपति जगदीप धनखड़ और उनकी पत्नी डॉ. सुदेश धनखड़, महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस, केंद्रीय मंत्री नितिन गडकरी और इजराइल के काउंसल जनरल यानिव रेवाच सहित कई प्रमुख हस्तियां मौजूद रहीं।
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने भी भागवत के संबोधन की तारीफ की। उन्होंने कहा कि भाषण में राष्ट्रीय प्रगति, सामाजिक एकता, आत्मनिर्भरता और समाज के चरित्र को मजबूत करने जैसे विषयों पर जोर दिया गया। मोदी ने स्वयंसेवकों की सेवा भावना और ‘पंच परिवर्तन’ के माध्यम से सकारात्मक सामाजिक बदलाव लाने के प्रयासों का भी उल्लेख किया।