दिल्ली। दिल्ली-एनसीआर में बढ़ते वायु प्रदूषण की समस्या को देखते हुए वायु गुणवत्ता प्रबंधन आयोग (CAQM) ने पंजाब और हरियाणा में प्रदूषण नियंत्रण के लिए उठाए जा रहे कदमों की समीक्षा की है। इस दौरान पराली जलाने की घटनाओं को रोकने, औद्योगिक प्रदूषण, वाहनों से निकलने वाले धुएं और अन्य प्रमुख प्रदूषण स्रोतों को नियंत्रित करने पर विशेष ध्यान दिया गया। आयोग का उद्देश्य सर्दियों के दौरान दिल्ली-एनसीआर और आसपास के क्षेत्रों में वायु गुणवत्ता को खराब होने से बचाना है।
पराली जलाने की घटनाओं पर विशेष निगरानी
पंजाब और हरियाणा में धान की कटाई के बाद पराली जलाने की घटनाएं वायु प्रदूषण की एक बड़ी चुनौती बनी हुई हैं। इसी को देखते हुए आयोग ने संबंधित राज्यों की तैयारियों और निगरानी व्यवस्था की समीक्षा की है। अधिकारियों से खेतों में पराली जलाने की घटनाओं को रोकने के लिए प्रभावी कदम उठाने और किसानों को वैकल्पिक व्यवस्थाएं उपलब्ध कराने पर जोर दिया गया है। CAQM ने अक्टूबर और नवंबर के दौरान पराली जलाने की रोकथाम के लिए पंजाब के 18 और हरियाणा के 16 जिलों में विशेष उड़नदस्ते तैनात किए हैं। ये टीमें स्थानीय प्रशासन के साथ मिलकर निगरानी कर रही हैं।
औद्योगिक और वाहन प्रदूषण पर भी नजर
आयोग की समीक्षा केवल पराली जलाने तक सीमित नहीं है। इसमें औद्योगिक इकाइयों से निकलने वाले प्रदूषक तत्वों, वाहनों के उत्सर्जन और धूल से होने वाले प्रदूषण को नियंत्रित करने के उपाय भी शामिल हैं। आयोग ने पहले भी संबंधित राज्यों और एजेंसियों को प्रदूषण नियंत्रण संबंधी निर्देशों का समयबद्ध पालन सुनिश्चित करने पर जोर दिया था। इसके तहत निगरानी, नियमों के अनुपालन और विभागीय समन्वय को महत्वपूर्ण माना गया है।
किसानों को वैकल्पिक उपाय अपनाने पर जोर
पराली जलाने की समस्या से निपटने के लिए किसानों को फसल अवशेष प्रबंधन मशीनों का इस्तेमाल करने के लिए प्रोत्साहित किया जा रहा है। हरियाणा सरकार ने पराली प्रबंधन मशीनों के उचित इस्तेमाल के लिए किसानों को प्रति एकड़ 1,200 रुपये प्रोत्साहन राशि देने की योजना भी घोषित की है। इसके अलावा ड्रोन निगरानी और विशेष टीमों की सहायता से खेतों में आग लगाने की घटनाओं की पहचान करने की व्यवस्था की गई है।
दिल्ली-एनसीआर की हवा सुधारने की कवायद
सर्दियों में मौसम संबंधी परिस्थितियों के कारण प्रदूषक तत्व वातावरण में जमा हो सकते हैं। ऐसे में पराली जलाने, वाहनों और उद्योगों से होने वाले उत्सर्जन को नियंत्रित करना महत्वपूर्ण है। आयोग की यह पहल राज्यों के बीच बेहतर समन्वय स्थापित करने और प्रदूषण नियंत्रण के प्रयासों को मजबूत बनाने की दिशा में महत्वपूर्ण मानी जा रही है।