रांची: झारखंड की राजधानी रांची के खेलगांव थाना क्षेत्र स्थित भारतीय सूचना प्रौद्योगिकी संस्थान (आईआईआईटी) के हॉस्टल में प्रथम वर्ष के बीटेक छात्र आदित्य कुमार शनिवार देर रात फंदे से लटका मिला। मृतक छात्र की पहचान बिहार के पूर्णिया निवासी आदित्य के रूप में हुई है।
छात्र की मौत के बाद संस्थान में छात्रों के बीच आक्रोश फैल गया। उन्होंने समय पर चिकित्सा सहायता नहीं मिलने और प्रबंधन पर लापरवाही का आरोप लगाते हुए विरोध-प्रदर्शन किया। इस बीच राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग ने भी इस घटना पर संज्ञान लिया है। प्रारंभिक जानकारी के अनुसार, घटना शनिवार रात करीब 10:45 बजे की है।
आदित्य के कमरे से कोई जवाब नहीं मिलने पर उसके रूममेट ने दरवाजा खटखटाया। प्रतिक्रिया नहीं मिलने पर किसी तरह दरवाजा खोला गया। कमरे के भीतर आदित्य फंदे से लटका मिला। उसे नीचे उतारने के बाद छात्रों ने सीपीआर देकर बचाने की कोशिश की। बताया गया कि इस दौरान उसमें कुछ हलचल दिखाई दी। इसके बाद कुछ छात्र मदद के लिए दौड़े।
छात्रों का आरोप है कि समय पर चिकित्सा सहायता उपलब्ध नहीं कराई गई। उनके अनुसार, हॉस्टल के केयरटेकर दीपक रौशन अपने सहयोगी आकाश के साथ वहां से चले गए। ड्यूटी पर मौजूद चिकित्सक डॉ कुंज बिहारी खरे पर भी नशे की हालत में होने और घटनास्थल से चले जाने के आरोप लगाए गए हैं।
छात्रों का कहना है कि सुरक्षाकर्मी भी नशे में थे और करीब 45 मिनट बाद आदित्य को एंबुलेंस तक पहुंचाया गया। बाद में उसे मेडिका अस्पताल ले जाया गया, जहां चिकित्सकों ने मृत घोषित कर दिया। छात्र की मौत के बाद हॉस्टल में विरोध-प्रदर्शन शुरू हो गया। विद्यार्थियों का आरोप है कि संस्थान में बुनियादी सुविधाओं की कमी को लेकर पहले से आंदोलन चल रहा है। उनका कहना है कि यदि समय पर एंबुलेंस और ऑक्सीजन की सुविधा उपलब्ध होती, तो छात्र की जान बचाई जा सकती थी।
रांची के सदर डीएसपी संजीव बेसरा ने बताया कि पुलिस मामले की जांच कर रही है। मौत के कारणों और घटना से जुड़े अन्य पहलुओं की पड़ताल की जा रही है। परिजनों को भी सूचना दे दी गई है। इस बीच, राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग के सदस्य प्रियांक कानूनगो ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म 'एक्स' पर कहा कि आयोग ने घटना का संज्ञान लिया है।
उन्होंने छात्र को इलाज मिलने में देरी, प्रशासनिक लापरवाही और कथित आत्महत्या की परिस्थितियों की जांच कराने की बात कही। उन्होंने बताया कि आयोग शिक्षा मंत्रालय, कानून प्रवर्तन एजेंसियों और जांच एजेंसियों को आवश्यक निर्देश देने जा रहा है।
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