BREAKING: कांवड़ यात्रा के दौरान सांप्रदायिक तनाव से भड़ी हिंसा, 3 लोगों की मौत

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Update: 2026-07-30 13:46 GMT
Kathmandu. काठमांडू। नेपाल में कांवड़ यात्रा यानी बोलबम यात्रा के दौरान शुरू हुआ विवाद अब बड़े सांप्रदायिक तनाव में बदल गया है। देश के कई हिस्सों में पिछले चार दिनों से जारी हिंसा, आगजनी, पथराव और तोड़फोड़ की घटनाओं ने कानून-व्यवस्था को लेकर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। हालात बिगड़ने के बाद प्रशासन को कई शहरों में कर्फ्यू लागू करना पड़ा है। हिंसक घटनाओं में अब तक तीन लोगों की मौत की जानकारी सामने आई है, जबकि बड़ी संख्या में लोग घायल हुए हैं। नेपाल के सुनसरी जिले से शुरू हुआ विवाद धीरे-धीरे अन्य इलाकों तक फैल गया। कई शहरों में प्रदर्शनकारियों और सुरक्षाबलों के बीच झड़प हुई। हिंसा के दौरान कई सरकारी और निजी संपत्तियों को नुकसान पहुंचाया गया। दर्जनों वाहनों, दुकानों और अन्य प्रतिष्ठानों में आग लगाए जाने की घटनाएं सामने आई हैं। प्रशासन ने स्थिति को नियंत्रित करने के लिए पुलिस के साथ सशस्त्र पुलिस बल और नेपाली सेना को भी तैनात किया है।
बताया जा रहा है कि विवाद की शुरुआत सुनसरी जिले के देवानगंज क्षेत्र में हुई, जहां बोलबम यात्रा के दौरान हिंदू श्रद्धालुओं और स्थानीय मुस्लिम समुदाय के कुछ लोगों के बीच तनाव पैदा हो गया। स्थानीय लोगों और प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार, मंदिर की सार्वजनिक भूमि पर मुहर्रम के अवसर पर लगाए गए झंडे को लेकर पहले से विवाद चल रहा था। आरोप है कि झंडा हटाने को लेकर दोनों पक्षों के बीच बातचीत और विवाद की स्थिति बनी हुई थी। स्थानीय लोगों के मुताबिक, रविवार रात जब कांवड़ यात्रा की शुरुआत उसी स्थान से हो रही थी, तभी अचानक तनाव बढ़ गया। इसके बाद दोनों पक्ष आमने-सामने आ गए और देखते ही देखते विवाद हिंसक झड़प में बदल गया। पथराव और मारपीट की घटनाओं के बीच पुलिस ने स्थिति संभालने की कोशिश की, लेकिन भीड़ को नियंत्रित करने में काफी मशक्कत करनी पड़ी।


सुनसरी में भड़की हिंसा के बाद नेपाल के अन्य हिस्सों में भी तनाव फैल गया। कई शहरों में प्रदर्शन, आगजनी और तोड़फोड़ की घटनाएं सामने आईं। प्रशासन ने संवेदनशील क्षेत्रों में सुरक्षा बढ़ा दी है। कई स्थानों पर अतिरिक्त सुरक्षाबलों की तैनाती की गई है और लोगों से शांति बनाए रखने की अपील की गई है। हालात को देखते हुए इनरवा, जनकपुर, सिरहा, गोलबाजार, लहान सहित कई शहरों में कर्फ्यू लागू किया गया है। प्रशासन ने लोगों की आवाजाही पर रोक लगाई और संवेदनशील इलाकों में विशेष निगरानी शुरू कर दी। कुछ क्षेत्रों में इंटरनेट सेवाओं पर भी निगरानी बढ़ाई गई है ताकि अफवाहों और भ्रामक सूचनाओं को फैलने से रोका जा सके।
सुरक्षा व्यवस्था को मजबूत करने के लिए नेपाली सेना को भी मैदान में उतारा गया है। सेना ने कई इलाकों में फ्लैग मार्च किया और हेलिकॉप्टर के जरिए संवेदनशील क्षेत्रों की निगरानी की गई। प्रशासन का कहना है कि हिंसा फैलाने वालों की पहचान की जा रही है और दोषियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाएगी। इस पूरे घटनाक्रम के बीच नेपाल के राष्ट्रपति रामचंद्र पौडेल ने चिंता जताई है। उन्होंने सुनसरी जिले सहित प्रभावित क्षेत्रों में उत्पन्न स्थिति पर गहरी चिंता व्यक्त करते हुए लोगों से सदियों से चली आ रही सामाजिक, धार्मिक और जातीय एकता बनाए रखने की अपील की है। राष्ट्रपति ने कहा कि नेपाल की पहचान आपसी भाईचारे, सहिष्णुता और मेल-मिलाप से जुड़ी हुई है, जिसे हर हाल में बनाए रखना जरूरी है।
वहीं नेपाल सरकार भी विपक्ष के निशाने पर आ गई है। विपक्षी दलों ने आरोप लगाया है कि सरकार शुरुआती समय में स्थिति को नियंत्रित करने में असफल रही, जिसके कारण तनाव कई इलाकों तक फैल गया। विपक्ष का कहना है कि प्रशासन को पहले ही प्रभावी कदम उठाने चाहिए थे। सरकार की ओर से लगातार उच्चस्तरीय बैठकें की जा रही हैं। अधिकारियों का कहना है कि हिंसा में शामिल लोगों पर कार्रवाई की जाएगी और किसी भी कीमत पर कानून-व्यवस्था बनाए रखी जाएगी। सरकार ने आम लोगों से अफवाहों पर ध्यान नहीं देने और शांति बनाए रखने की अपील की है।
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