BREAKING: भोपाल-इंदौर में हेलमेट अनिवार्य, बिना हेलमेट अब नहीं मिलेगा पेट्रोल और सीएनजी

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Update: 2025-07-30 17:35 GMT
Bhopal. भोपाल। मध्य प्रदेश की राजधानी भोपाल और व्यावसायिक नगरी इंदौर में अब बिना हेलमेट के टू-व्हीलर चालकों को पेट्रोल और सीएनजी नहीं मिलेगा। यह फैसला सड़क सुरक्षा को प्राथमिकता देते हुए बुधवार को भोपाल कलेक्टर कौशलेंद्र विक्रम सिंह और इंदौर कलेक्टर आशीष सिंह ने लिया। आदेश के अनुसार, जिले के सभी पेट्रोल पंप और सीएनजी स्टेशन पर दोपहिया चालकों को हेलमेट पहनना अनिवार्य कर दिया गया है, अन्यथा उन्हें ईंधन नहीं दिया जाएगा।
यह आदेश दोनों शहरों में लगातार बढ़ते सड़क हादसों और हेलमेट न पहनने के कारण हो रही मौतों को देखते हुए लागू किया गया है। इससे पहले भी केंद्र और राज्य सरकारों द्वारा इस संबंध में निर्देश जारी किए गए थे, लेकिन अब जिला प्रशासन ने एकपक्षीय आदेश जारी कर इसे सख्ती से लागू करने का निर्णय लिया है।
कलेक्टरों के आदेश का पालन अनिवार्य
भोपाल कलेक्टर ने साफ निर्देश दिए कि मप्र मोटर यान अधिनियम 1988 की धारा 129 के अनुसार, दोपहिया वाहन चालक और पीछे बैठने वाले यात्री दोनों के लिए ISI मार्क हेलमेट पहनना अनिवार्य है। इस नियम के उल्लंघन से दुर्घटनाओं की आशंका बनी रहती है। इसलिए अब जिले में कोई भी पेट्रोल पंप बिना हेलमेट के व्यक्ति को पेट्रोल या सीएनजी नहीं देगा। इसी तरह, इंदौर कलेक्टर आशीष सिंह ने भी आदेश जारी कर सभी पंप संचालकों को निर्देश दिए हैं कि बिना हेलमेट के दोपहिया चालकों को ईंधन न दें। आदेश का उल्लंघन करने पर संबंधित पेट्रोल पंप के खिलाफ कार्रवाई की जाएगी।



 



महापौर ने शासकीय कार्यालयों में भी हेलमेट की वकालत की
इंदौर महापौर पुष्यमित्र भार्गव ने कलेक्टर को पत्र लिखकर यह मांग की कि शहर के सभी सरकारी कार्यालयों में भी हेलमेट अनिवार्य किया जाए। उन्होंने सुझाव दिया कि हेलमेट न पहनने वालों को कार्यालय परिसर में प्रवेश न दिया जाए, ताकि लोगों में हेलमेट को लेकर जागरूकता और जिम्मेदारी बढ़े।
डीलर्स एसोसिएशन की चिंता
भोपाल पेट्रोल पंप डीलर्स एसोसिएशन के अध्यक्ष अजय सिंह ने जिला प्रशासन के आदेश पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि यह फैसला सुरक्षा की दृष्टि से सराहनीय है, लेकिन इसमें व्यावहारिक अड़चनें भी हैं। उन्होंने कहा, “हम पर तो कार्रवाई की जाएगी, लेकिन जो व्यक्ति जानबूझकर बिना हेलमेट पेट्रोल लेने आता है, उस पर क्या कार्रवाई होगी? सड़क पर पुलिस भी ऐसे वाहन चालकों पर सख्ती से कार्रवाई नहीं कर रही है।” डीलर्स का मानना है कि प्रशासन को सिर्फ पंप संचालकों को टारगेट करने की बजाय यातायात पुलिस और निगम कर्मचारियों की भी जवाबदेही तय करनी चाहिए, ताकि यह अभियान सफल हो सके।
आंकड़ों में सड़क सुरक्षा की गंभीरता
भोपाल में वर्तमान में 192 पेट्रोल पंप हैं, जहां प्रतिदिन लगभग 21 लाख लीटर पेट्रोल-डीजल की खपत होती है, जिसमें से करीब आधी खपत सिर्फ पेट्रोल की होती है। दोपहिया वाहन चालकों की संख्या लगातार बढ़ रही है, और इसके साथ ही सड़क दुर्घटनाओं की घटनाएं भी बढ़ी हैं।
इसी पृष्ठभूमि में सुप्रीम कोर्ट की सड़क सुरक्षा समिति के अध्यक्ष और रिटायर्ड न्यायाधीश न्यायमूर्ति अभय मनोहर सप्रे ने मंगलवार को इंदौर में जिला सड़क सुरक्षा समिति की बैठक में भाग लिया था। उन्होंने भी टू-व्हीलर चालकों के लिए हेलमेट अनिवार्यता पर जोर दिया और प्रशासन से सख्ती बरतने के निर्देश दिए।
अभियान को व्यापक समर्थन की आवश्यकता
प्रशासन का यह कदम सड़क सुरक्षा की दिशा में एक सकारात्मक प्रयास है, लेकिन इसकी सफलता तभी संभव है जब आम जनता और पुलिस प्रशासन दोनों मिलकर इसे लागू करें। इसके लिए जनजागरूकता अभियान, स्कूल-कॉलेजों में जागरूकता कार्यक्रम और मीडिया के माध्यम से जानकारी प्रसारित करने की आवश्यकता है। कुल मिलाकर यह आदेश न सिर्फ कानून के पालन की दिशा में एक अहम कदम है, बल्कि लोगों की जान बचाने के लिए उठाया गया साहसिक निर्णय भी है। यदि इसे गंभीरता से लागू किया गया तो निश्चित रूप से सड़क हादसों में कमी आएगी और लोग हेलमेट के महत्व को समझेंगे।
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